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राजपाट: एक ही भारी, अग्नि परीक्षा

घनश्याम तिवाड़ी तो मुसीबत बन गए हैं महारानी की। राजस्थान में भाजपा के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं इस समय तिवाड़ी।
Author December 26, 2016 04:19 am
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे। (फाइल फोटो)

एक ही भारी
घनश्याम तिवाड़ी तो मुसीबत बन गए हैं महारानी की। राजस्थान में भाजपा के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं इस समय तिवाड़ी। उन्हीं की पार्टी की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अपनी दूसरी पारी में कई मुश्किलों से दो-चार होना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सिरदर्द तिवाड़ी का विरोध बन चुका है। ऊपर से पार्टी का आलाकमान अलग उनसे संतुष्ट नहीं। आडवाणी और वाजपेयी के दौर में तो कोई चूं-चपट नहीं करता था उनसे। पर अब जमाना नरेंद्र मोदी और अमित शाह का ठहरा। गुजराती नेताओं की यह जोड़ी वसुंधरा से खफा ही रही है। ऊपर से घनश्याम तिवाड़ी के तीखे बोल परेशान कर रहे हैं। अपने जन्मदिन के मौके पर बाकायदा समारोह की आड़ में जलसा ही कर दिखाया घनश्याम तिवाड़ी ने। पार्टी की लक्ष्मण रेखा को भले न लांघा हो पर वसुंधरा सरकार की कार्यशैली की जम कर खिल्ली उड़ाई। फरमाया कि वे सूबे में तीन साल से सरकार को ढूंढ़ रहे हैं। वसुंधरा को मालूम है कि तिवाड़ी अकेले नहीं हैं। संघ परिवार की पूरी शह है उन्हें। जबकि आलाकमान और संघ का नेतृत्व उनसे अपनी विचारधारा पर अमल नहीं होने के चलते रूठा है। केंद्रीय योजनाओं की गत अलग बुरी है उनके सूबे में। स्वच्छ भारत अभियान में तो राजस्थान एकदम फिसड्डी साबित हुआ है। उधर बागी तिवाड़ी के खिलाफ कार्रवाई करें तो कैसे? तिवाड़ी तो एकदम चतुर सुजान ठहरे। बोलते वक्त सीमाओं को नहीं लांघते। सूबे के भ्रष्टाचार पर जमकर भड़ास निकालते हैं। जाहिर है कि जवाबदेह तो वसुंधरा ही हैं। वसुंधरा खेमे ने तिवाड़ी की काट के लिए जयपुर के पार्टी सांसद रामचरण बोहरा को लगाया था। पर बोहरा को अपने कामधंधों से ही फुर्सत नहीं। रही पार्टी के सूबेदार अशोक परनामी की बात तो वे अमित शाह से थर्राते हैं। आलाकमान की इजाजत के बिना तिवाड़ी को कारण बताओ नोटिस तक नहीं भेज सकते। बेचारे सरकार और संगठन के बीच पिस कर रह गए हैं।

मुख्यमंत्री सीधे प्रधानमंत्री से टकराए तो भला राजभवन में बेचैनी क्यों नहीं होगी। पश्चिम बंगाल के राजभवन का धीरज भी चुक गया है। राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच भी तनातनी बढ़ गई है। राज्य विधानसभा के परिसर में आयोजित सालाना पुष्प प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में यह तल्खी साफ दिखी। परंपरा इस कार्यक्रम के राज्यपाल के हाथों उद्घाटन की रही है। इस बार उन्हें न्योता तक नहीं दिया गया। उद्घाटन ममता सरकार के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के हाथों कराना तय हो गया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री के रिश्तों में तनातनी की शुरुआत पिछले महीने ममता के केंद्र सरकार पर लगाए आरोप से हुई थी। राजमार्ग के टोल नाकों पर सेना तैनात करने का आरोप लगा जब ममता ने तीखे तेवर दिखाए तो त्रिपाठी ने भी उनकी आलोचना कर दी। मुख्यमंत्री के आरोपों से सेना के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ने की बात कह दी। ममता चुप रहने वाली कहां हैं? फौरन पलटवार कर दिया कि राज्यपाल को पूरी जानकारी हासिल करने के बाद ही करनी चाहिए थी टिप्पणी। घटना के वक्त वे तो थे ही नहीं कोलकाता में। अब राज्यपाल को प्रदर्शनी का न्योता नहीं देने से विवाद और गहराया है। ऊपर से विधानसभा अध्यक्ष बिमान चटर्जी का तुर्रा देखिए कि इस घटना से कोई खास निहितार्थ नहीं निकालना चाहिए।

अग्नि परीक्षा
पंजाब का चौटाला परिवार और हरियाणा का देवीलाल परिवार एक दूसरे के पुराने रिश्तेदार हैं, लेकिन आजकल रिश्तों में खटास है। इसी तरह हरियाणा के कांग्रेसी नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने भी पंजाब के अपने सहयोगी कैप्टन अमरिंदर से साफ-साफ कह दिया है कि वे कांग्रेस का प्रचार पंजाब में तभी कर पाएंगे जब कैप्टन वायदा करें कि मख्यमंत्री बने तो हरियाणा को उसके हिस्से का पानी देंगे। बकौल हुड्डा पंजाब के पार्टी हित से ज्यादा अहम उनके लिए हरियाणा की जनता का हित है। दरअसल, पंजाब और हरियाणा के बीच चल रहे जल समझौते को अमरिंदर सिंह ने ही मुख्यमंत्री रहते कानून बना कर रद्द किया था। सो, हुड्डा ने उनसे सार्वजनिक वादे की शर्त रखी है। हुड्डा तो हरियाणा के हित में पार्टी आला कमान के फरमान तक को ठुकराने के लिए तैयार हैं। रही कैप्टन की बात तो चुनाव के मौके पर वे भला आत्मघाती वादा क्यों करेंगे? जाहिर है हरियाणा के कांग्रेसी नेता अब पड़ोसी होकर भी नहीं करना चाहेंगे अपनी पार्टी का पंजाब में प्रचार। सतलज-यमुना नहर की बाबत सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दोनों सूबों की सियासत गरमा रखी है। भाजपा इस मामले पर चुप्पी साधे है। एक तरफ हरियाणा का सवाल है जहां वह खुद सत्ता में है तो दूसरी तरफ पंजाब में सहयोगी अकाली दल के साथ उसकी भी तो नैया मझधार में है। ऐसे में मनोहर लाल खट्टर अपनी पार्टी का पंजाब में प्रचार किस मुंह से कर पाएंगे।

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