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राजपाट: बहाने की दरकार,अदावत का अंजाम

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती मंत्रिमंडल की बैठक बीच में ही छोड़ कर चली गईं। वे समझ चुकी हैं कि भाजपा के साथ गठबंधन ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा।
Author December 12, 2016 04:44 am
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती। (Photo Source: PTI/File)

बहाने की दरकार

जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ गठबंधन के दलों का बेमेल गठबंधन स्वाभाविक होता तो एका स्थायी रहता। अस्वाभाविक गठजोड़ है तो खटास खत्म कैसे हो? दोनों दलों में खटपट है तभी तो शनिवार को मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती मंत्रिमंडल की बैठक बीच में ही छोड़ कर चली गईं। वे समझ चुकी हैं कि भाजपा के साथ गठबंधन ज्यादा दिन नहीं चल पाएगा। भाजपा के विरोध के चलते राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को आइजी के पद पर तरक्की देने का मुख्यमंत्री का प्रस्ताव लटका। इस मुद्दे पर गरमा गर्मी इस कदर बढ़ी कि महबूबा बैठक अधूरी छोड़ गईं। वैसे भी प्रस्ताव गृह मंत्रालय से आया था। जिसकी कर्ताधर्ता खुद महबूबा ठहरीं। भाजपाई मंत्रियों की अपनी दलील थी। वे तरक्की वाले पुलिस अफसरों को आइजी जैसा बड़ा ओहदा सौंपने से असहमत थे। यह तो रही दिखावटी अनबन। पर अंदरूनी कारण और भी कई हैं। गठबंधन तोड़ना है तो भूमिका पहले से ही बनाना फायदेमंद होता है।

अदावत का अंजाम

हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को लेकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके विरोधी प्रेम कुमार धूमल के बीच खिच-खिच अब आम हो गई है। धूमल के सांसद पुत्र अनुराग ठाकुर बीसीसीआइ से जुड़े हैं। साथ ही हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन के मुखिया तो हैं ही। भाजपा के युवा मोर्चे के मुखिया भी वही ठहरे। फिर क्यों न चिढ़ें उनसे मुख्यमंत्री वीरभद्र। एसोसिएशन में अनुराग ठाकुर पर मनमानी करने का आरोप भी लगा चुके हैं वीरभद्र सिंह। क्रिकेट स्टेडियम के पास बने होटल को तोड़े जाने पर एतराज है उन्हें। इस चक्कर में की गई गलत बयानी से मुद्दा मिल गया है वीरभद्र को। अनुराग ठाकुर ने जिस जमीन को बंजर बता कर होटल बनाया था, वहां निर्माण से पहले डेढ़ हजार पेड़ थे। फिर क्यों की गलतबयानी। वीरभद्र को हैरानी अपने ही मंत्री कौल सिंह की इस मामले में बरकरार चुप्पी से भी हो रही है। राजस्व मंत्री हैं तो जमीन जायदाद के बेजा इस्तेमाल की चिंता उन्हें करनी ही चाहिए। पर वे चुप्पी साधे हैं। पत्रकारों से वीरभद्र ने कह दिया कि चुप्पी की वजह वे कौल सिंह से खुद पूछ लें। हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन को कमजोर करने की मंशा से वीरभद्र ने विधेयक पारित कर राज्यपाल के पास भेजा था। पर राज्यपाल ने उस पर कुंडली मार ली। वीरभद्र ने तो सत्ता में आते ही क्रिकेट स्टेडियम से लेकर धर्मशाला तक सरकारी कब्जे की कोशिश की थी। गनीमत है कि हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी। सो, कानूनी रास्ता छोड़ वीरभद्र अब मौखिक हमला कर रहे हैं अनुराग ठाकुर पर।

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