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संघी मौलाना इंद्रेश कुमार

इंद्रेश कुमार ने तो जैसे मुसलमानों का मसीहा बनने की ठान ली है।
Author May 8, 2017 06:49 am
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की संस्था मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक इंद्रेश कुमार। (File Photo)

संघी मौलाना
राष्ट्रीय मुसलिम मंच के संयोजक हैं इंद्रेश कुमार। आरएसएस के प्रचारक का मुसलमानों की सियासत करना अटपटा लग सकता है। पर इंद्रेश कुमार ने तो जैसे मुसलमानों का मसीहा बनने की ठान ली है। उदार हिंदू नेता की छवि बनाने की कब से कवायद कर रहे हैं मुसलमानों के बीच कट्टरपंथी संगठन के इंद्रेश। और तो और उत्तराखंड में रुड़की के पास पिरान कलियर में साबिर साहब की दरगाह पर चादर चढ़ाने जा पहुंचे। दरगाह के सज्जादा नशीन शाह मंसूर एजाज साबरी ने उनकी दत्तारबंदी की। भाजपा और संघ का इससे पहले तो कभी कोई नेता नहीं पहुंचा इस दरगाह में चादर चढ़ाने और मत्था टेकने। इस बहाने दो दिन का मुसलिम राष्ट्रीय सम्मेलन भी कर दिया। मुसलमानों से ऐसे प्रस्ताव पारित करा दिए जो हिंदुओं के प्रस्ताव रहे हैं। मसलन, गो हत्या पर पाबंदी, अयोध्या में राममंदिर का निर्माण, तीन तलाक की प्रथा पर पाबंदी, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के भारत में विलय और तिब्बत को चीन से मुक्त कराने की केंद्र सरकार से मांग वाले प्रस्ताव। कांग्रेसी तो इंद्रेश कुमार को अब खिल्ली उड़ाने के लिए मौलाना इंद्रेश कहने लगे हैं।
पराक्रमी योगी
आदित्यनाथ योगी के बारे में लखनऊ के सियासी गलियारों में तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। मसलन, वे जो ठान लेते हैं, वही कर दिखाते हैं। सरकार पर थोड़ी पकड़ बनी तो अब सूबे के दौरे पर निकल पड़े। रविवार को एटा की सड़क दुर्घटना के पीड़ित परिवारों से मुलाकात की तो नौ मई को मेरठ पहुंचने का एलान कर दिया। जहां सरकारी मेडिकल कालेज के मुआयने से लेकर सरकारी गेहूं खरीद केंद्र की पड़ताल करेंगे। वैसे असली मकसद तो शहीदों को नमन करना ठहरा। पाठकों को बता दें कि आजादी की पहली लड़ाई 10 मई, 1857 को सैनिक विद्रोह के साथ मेरठ से ही शुरू हुई थी। क्रांति दिवस की पूर्व संध्या पर क्रांति के उद्गम स्थल पर मत्था टेकेंगे योगी। लगे हाथ सभी विधायकों और सांसदों से मुलाकात भी करेंगे। मंडल की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति की जांच-परख भी कार्यक्रम का हिस्सा है। लेकिन असली पराक्रम तो योगी ने संघ के लोगों को दिखाया है। लखनऊ में पहली बार संघी धुरंधर मुख्यमंत्री आवास पर गए योगी से मिल कर अपना रोडमैप बताने। अतीत में कभी नहीं हुआ ऐसा। हमेशा मुख्यमंत्री ही हाजिरी बजाते रहे आरएसएस के दफ्तर पहुंच कर। अफसरों के तबादलों से लेकर कानून व्यवस्था के पालन तक किसी का दखल स्वीकार नहीं। तभी तो पेट्रोल पंपों पर चिप के जरिए तेल की मापतौल में चोरी करने वाले तुर्रम खां पेट्रोल पंप मालिक पकड़ पाई सूबे की एसटीएफ। लखनऊ में किससे छिपा है कि मापतौल में हेराफेरी कर करोड़ों कमाने वाले ये पंप मालिक भाजपा को दिल खोलकर देते थे दान।

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