December 06, 2016

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राजपाट: चूक पर गर्व, पैसा नहीं पास

देश के तमाम सियासी दलों की नोट बदलने के मामले में उदासीनता पर आम आदमी हैरान है।

Author November 14, 2016 04:36 am
गोवा में बोलते पीएम नरेंद्र मोदी। (Source: ANI)

चूक पर गर्व
देश के तमाम सियासी दलों की नोट बदलने के मामले में उदासीनता पर आम आदमी हैरान है। सरकार ने कालाधन खत्म करने के नाम पर लोगों का चैन छीन लिया है। जो मुंह खोलता है उसे देशद्रोही और कालाधन समर्थक साबित करने की रणनीति से लगता है कि विरोधी दल भी खौफजदा हैं। कांग्रेस ने तभी तो सधी प्रतिक्रिया दिखाई। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निशाने पर सबसे ज्यादा तो कांग्रेस ही रही है। गनीमत है कि राहुल गांधी को सद्बुद्धि आ गई है। वे बैंक के बाहर नोट बदलने के लिए कतार में जा लगे। भाजपाई भले उनकी खिल्ली उड़ाएं पर यह प्रयास आम आदमी को भाया है। इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की दोनों बड़ी पार्टियां सपा और बसपा की हालत मूर्छा जैसी है।

हर कोई जानता है कि कालेधन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल अपने देश में चुनाव में ही होता है। सो इन दोनों दलों को आर्थिक तंगी का डर सता रहा है। मुलायम की प्रतिक्रिया हास्यास्पद रही। मुद्रा बदलने के लिए जिस अंदाज में उन्होंने मोहलत दिए जाने की मांग की उससे धारणा यही बनाई गई कि मानो वे कालेधन के पक्ष में हों। मायावती ने जरूर आम आदमी के लिए इसे आर्थिक आपातकाल बता सही दिशा दिखाई। अच्छा होता कि विरोधी दलों के बड़े नेता बैंकों के बाहर कतारों में खड़े होते। आम आदमी की नाराजगी का तो आकलन होता ही, मोदी के खिलाफ हवा बनाने में भी मदद मिलती। हर कोई मोदी को कोस रहा है। पता नहीं प्रधानमंत्री के सलाहकार उन्हें जमीनी हकीकत से रूबरू क्यों नहीं करा रहे। आम आदमी तो यह भी कहने से नहीं चूक रहा कि जिन्होंने कालेधन को डालर में बदल कर विदेश में रख लिया उनका तो मोदी कुछ बिगाड़ नहीं पाए पर खून-पसीने की कमाई को जोड़ कर रखने वालों की नींद जरूर उड़ा दी। इससे भारतीय मुद्रा में लोगों की निष्ठा डिगी है। सोने-चांदी में निवेश का रास्ता लोगों को बेहतर नजर आने लगा है। इससे तो मोदी का मंसूबा बाधित ही होगा। ऊपर से नित नई अफवाहें अलग सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ माहौल को हवा दे रही हैं। मसलन, एक तो यही कि अगली बारी बैंक के लॉकरों की होगी। यानी महिलाओं के आभूषणों को भी कालाधन बता उनसे छीन सकती है सरकार।
पैसा नहीं पास
बीमार थे तो चुप रहना मजबूरी थी। हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का इलाज दिल्ली के एम्स में भी हुआ। तबीयत में थोड़ा सुधार दिखते ही फिर दहाड़ मारी। दिल्ली में पहले सरकारी कामकाज निपटाए। फिर डॉक्टरी जांच पड़ताल के बाद सिरमौर जिले के रेणुकाजी मेले में जा धमके। ऊपर से लगे हाथ अपनी सरकार के चार साल पूरे होने का मंडी में जश्न मनाने का एलान अलग कर दिया। पाठकों को याद होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली भी पिछले दिनों मंडी में ही हुई थी। अब वीरभद्र देंगे उस रैली का जवाब। सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों को बुलाने की तैयारी है। पर दिक्कत पांच सौ और एक हजार के नोट बंद हो जाने से सामने आ रही है। लोगों को रैली में जुटाने के लिए पैसा चाहिए। यों 25 दिसंबर में अभी वक्त है। पर तब तक भी बैंकों से लोग कितना पैसा निकाल पाएंगे, कहना मुश्किल है। चुनाव से पहले का आखिरी जश्न होगा सो दम दिखाने की सोची है राजा ने। मोदी के मुकाबले उन्नीस रहे या इक्कीस पर जोश तो बुजुर्ग वीरभद्र का देखने लायक है।

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First Published on November 14, 2016 4:36 am

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