ताज़ा खबर
 

कॉलेज शिक्षकों की पदोन्नति के लिए अनिवार्य नहीं रहेगा शोध

महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों को पदोन्नति के लिए शोध की अनिवार्यता खत्म की जाएगी। इसके लिए आधार शैक्षणिक प्रदर्शन संकेतक (एपीआइ) में जल्द ही बदलाव किया जाएगा।
Author July 30, 2017 01:38 am
प्रकाश जावड़ेकर

महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों को पदोन्नति के लिए शोध की अनिवार्यता खत्म की जाएगी। इसके लिए आधार शैक्षणिक प्रदर्शन संकेतक (एपीआइ) में जल्द ही बदलाव किया जाएगा। यह घोषणा शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज में आयोजित अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) की दो दिवसीय संगोष्ठी के उद्घाटन पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने की।

जावड़ेकर ने कहा कि स्नातक कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों को पदोन्नति लेने के लिए शोध कार्य अनिवार्य करने से शोध पूरी तरह से खत्म हो गया। इन शोधों को प्रकाशित करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पास 13 हजार से अधिक पत्रिकाएं हो गर्इं। उनके मुताबिक, कुछ कॉलेजों ने तो अपनी वार्षिक पत्रिका को त्रैमासिक करके उसे भी शोध पत्रिका के रूप में यूजीसी की शोध पत्रिकाओं की सूची में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि कॉलेज शिक्षक और विश्वविद्यालय शिक्षक दो अलग-अलग श्रेणी हैं। दोनों के अलग काम हैं और दोनों से ही अलग अपेक्षाएं हैं। इसलिए कॉलेज के शिक्षक पर अच्छा पढ़ाने की जवाबदेही होनी चाहिए। अच्छा पढ़ाना कॉलेज शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी। इसलिए कॉलेज के शिक्षकों से पदोन्नति के लिए शोध की अनिवार्यता को खत्म किया जाएगा। यह उनकी पसंद के ऊपर निर्भर रहेगा कि वे शोध करना चाहते हैं या नहीं, लेकिन अनिवार्य नहीं होगा। पदोन्नति के लिए एक सामुदायिक गतिविधि या छात्र गतिविधि करनी होगी। हालांकि विश्वविद्यालय शिक्षकों की पदोन्नति के लिए शोध पहले की तरह ही अनिवार्य रहेगा। एपीआइ में यह बदलाव सरकार लाने वाली है और इसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। मंत्री ने कहा कि हम इससे शोध को मजाक बनने से रोकना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम छात्र फीडबैक को भी जल्द शुरू करने जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में तो तदर्थ शिक्षकों का कमाल हो गया। बाकी विश्वविद्यालयों में 10 से 15 फीसद तदर्थ शिक्षक होते हैं और डीयू को तो तदर्थ शिक्षक ही चला रहे हैं। ऐसे में हमने इसे बंद करने का फैसला किया है और स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है। हमने तय किया है कि एक साल के अंदर शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस दौरान जावड़ेकर ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द लागू करने की भी घोषणा की। जावड़ेकर ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का छह फीसद शिक्षा पर खर्च करने की मांग पर कहा कि सारी जीडीपी सरकार के खजाने में नहीं होती है। जहां तक शिक्षा पर कुल खर्च की बात है तो सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार कुल मिलाकर बजट का 20 से 25 फीसद शिक्षा पर खर्च करती हैं। छह फीसद के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए इसमें निजी निवेश को भी शामिल करना होगा।
इस संगोष्ठी में 22 राज्यों से आए अलग-अलग विषयों के 400 से अधिक प्रोफेसर हिस्सा ले रहे हैं। यहां शिक्षकों के दायित्व, पेशेगत आचार संहिता, नैक और एनआइआरएफ ग्रेडिंग सिस्टम, उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता, राज्य अनुदान पोषित संस्थानों के अनुदान में कमी और शिक्षकों की जवाबदेही आदि विषयों पर चर्चा होगी।

शोध को मजाक बनाने से रोकना चाहते हैं
अच्छा पढ़ाना कॉलेज शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी। इसलिए कॉलेज के शिक्षकों से पदोन्नति के लिए शोध की अनिवार्यता खत्म की जाएगी। यह उनकी पसंद के ऊपर निर्भर रहेगा कि वे शोध करना चाहते हैं या नहीं, लेकिन अनिवार्य नहीं होगा। हम इससे शोध को मजाक बनने से रोकना चाहते हैं।

शोध की जगह होगी सामुदायिक गतिविधि
पदोन्नति के लिए सामुदायिक गतिविधि या छात्र गतिविधि करनी होगी। हालांकि विश्वविद्यालय शिक्षकों की पदोन्नति के लिए शोध पहले की तरह ही अनिवार्य रहेगा। एपीआइ में यह बदलाव सरकार लाने वाली है और इसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। हम छात्र फीडबैक भी शुरू करने जा रहे हैं।

बेहतर गुणवत्ता वाले कॉलेजों को मिलेगी स्वायत्तता
जावड़ेकर ने कहा कि जो कॉलेज गुणवत्ता में ऊपर जाएंगे उन्हें काम करने की स्वायत्तता मिलेगी। कम गुणवत्ता वाले कॉलेजों को आधी और उससे कम वाले कॉलेजों को बिल्कुल स्वायत्तता नहीं मिलेगी। उन्होंने आइआइएम बिल का उदाहरण भी दिया। स्वायत्तता मिलने के बाद केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान में कोई कमी नहीं होगी। हम यूजीसी और एआइसीटीई को अधिक स्वायत्तता देना चाहते हैं और इस ओर कार्य जारी है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.