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तीन साल में उलटा लटका दिया लोकतंत्र को: सुरजेवाला

नरेंद्र मोदी का विजय अभियान कांग्रेस-मुक्त भारत के नारे के साथ शुरू हुआ था।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला आरोप लगाते हैं कि पिछले तीन सालों में मोदी सरकार उन्हीं नीतियों को सार्वजनिक प्रचार-प्रसार का हिस्सा बना पाई है जो कांग्रेस की देन थीं।

नरेंद्र मोदी का विजय अभियान कांग्रेस-मुक्त भारत के नारे के साथ शुरू हुआ था। अब जब उनकी सरकार के तीन साल हो चुके हैं तो कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला आरोप लगाते हैं कि पिछले तीन सालों में मोदी सरकार उन्हीं नीतियों को सार्वजनिक प्रचार-प्रसार का हिस्सा बना पाई है जो कांग्रेस की देन थीं। सुरजेवाला कहते हैं कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो आधार परियोजना उनके लिए बस कोसने भर की चीज थी। लेकिन मौजूदा वक्त में वे सबसे ज्यादा ऊर्जा इसी में झोंक रहे हैं।

सुरजेवाला का कहना है कि पिछले तीन सालों में इस सरकार ने जो सबसे ज्यादा चिंताजनक हालात पैदा किए हैं वह है निजता पर हमला और सरकार से जनता की दूरी। कांग्रेसी नेता का कहना है कि कभी संसद परिसर को मनरेगा को कांग्रेस का स्मारक कहने वाली मोदी सरकार इसे खत्म करने का साहस नहीं जुटा पाई लेकिन इसे आगे मजबूत भी नहीं कर पाई। लेकिन मोदी सरकार कांग्रेस की एक क्रांतिकारी देन को दफ्न करने की तैयारी में है और वह है सूचना का अधिकार (आरटीआइ)। कांग्रेस-काल में जनता को मिले इस अधिकार ने जनतंत्र के हाथ कितने मजबूत किए यह सब किताबों में दर्ज हो चुका है। लेकिन मोदी सरकार इसे कमजोर करने पर तुली है क्योंकि इससे जनता को सरकार के बारे में सूचना हासिल होती है। सरकार से सूचना हासिल करने के इस वैधानिक अधिकार को कमजोर करने की पूरी तैयारी हो चुकी है। कांग्रेसियों को तोड़ कर भाजपाई बनाने में जुटी मोदी सरकार को सूचना के अधिकार कानून से इतना डर क्यों लग रहा है, यह तो वही बताएगी। मोदी लोकतांत्रिक राज्य की परिभाषा को पूरी तरह पलट चुके हैं। मोदी-काल में जनता राज्य के लिए है राज्य जनता के लिए नहीं। आप जनता के खातों पर पहरा लगा देते हैं। जनता क्या खाए-पीए – यह फरमान ऊपर से आने लगे। खान-पान के कारण हत्या होने लगे तो समझ में आना चाहिए कि लोकतंत्र उलटा लटकाया जा चुका है।

कांग्रेस-मुक्त भारत के नारे पर सुरेजवाला कहते हैं कि नरेंद्र मोदी कांग्रेस-युक्त भाजपा का निर्माण कर रहे हैं। भाजपा भगोड़ों से भरी पार्टी बन गई है। भगा कर लाए हुए लोगों के बल पर सत्ता पाई जा सकती है, राष्टÑ की संरचना नहीं की जा सकती। सवाल है कि क्या प्रजातंत्र में भगोड़ों के बल पर सत्ता हासिल कर लेना ही आखिरी लक्ष्य है या फिर आमूल-चूल बदलाव? परिवर्तन और जवाबदेही के मुद्दे पर कांग्रेस को हरा कर मोदीजी को इतना बड़ा बहुमत मिला था, उन्हें इस बात का निर्णय करना पड़ेगा, वरना जनता ने आज कांग्रेस को नकारा है तो भाजपा को नकारने में भी देर नहीं लगाएगी।

भाजपा पर निशाना साधते हुए सुरजेवाला कहते हैं कि जब राजनीति में सिद्धांत खत्म हो जाएंगे, तटस्थता खत्म हो जाएगी, दायित्व का आभास और जनता के प्रति जवाबदेही मात्र सत्ता की लोलुपता बन जाएगी, जब दलों की प्रतिबद्धता और नीतियों के प्रति कर्तव्यपरायणता को कपड़ों की तरह बदलने लग जाएंगे, तो फिर आपने राजनीति के मूल्य त्याग दिए हैं। अब आप बस सत्तालोलुप हैं। सत्ता के चुंबक से खिंच कर जो कांग्रेसी भाजपा में चले गए उससे हम और मजबूत हुए हैं। अब हमारे पास वही बचे हैं जो असली हैं। असली लोगों के दम पर हम जल्द ही उतनी ही मजबूती से खड़े हो जाएंगे।

एक सवाल के जवाब में सुरजेवाला ने कहा कि पिछले तीन साल में भाजपा सरकार ने कई किसान विरोधी काम किए हैं। चाहे प्रधानमंत्री का न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ 50 फीसद मुनाफा देने का वादा तोड़ने की बात हो या फिर अपने कारोबारी मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए आयात शुल्क में कटौती का मसला हो। हाल ही में दिल्ली में तमिलनाडु के किसानों की पीड़ा पर केंद्र सरकार ने जितनी असहिष्णुता दिखाई वह निंदनीय है। सुरेजवाला ने सुरक्षा के मामले में भी मोदी सरकार को नाकाम बताते हुए कहा कि महज 2017 का यह खौफनाक आंकड़ा है कि माओवादी हिंसा में हमारे 72 सुरक्षा जवान शहीद हुए। पाकिस्तान की हरकतों पर हर कड़े जवाब का कांग्रेस समर्थन करती है। लेकिन एक लक्षित सैन्य हमला का आपने जिस गाजे-बाजे के साथ प्रदर्शन किया, चुनावी मुद्दा बनाया-वह सरकार की गरिमा पर सवाल उठाता है।

सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने सबसे ज्यादा सरहद और कश्मीर का ही राग अलापा था। सरहद पर जो रहा है वह हम सबके लिए घोर चिंता का विषय है। आप कश्मीर की हालत देख लीजिए। यूपीए ने अपने शासनकाल में पत्थरबाजों से लेकर चरमपंथियों तक को करारा जवाब दिया था, कश्मीर के लोगों का भरोसा हासिल किया था। आज कश्मीर के युवा पत्थर लेकर सड़कों पर है। कोई एक खास चेहरा इनकी रहनुमाई नहीं कर रहा है। और अगर इस रहनुमाई को कोई नाम देना चाहते हैं तो वह है असंतोष। यूपीए ने कश्मीर के लोगों में जो लोकतंत्र के लिए भरोसा पैदा किया था मोदी सरकार ने उसे असंतोष में बदल दिया।

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