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राजनीति

औद्योगिक जगत की त्रासदी

पिछले कुछ महीने से यूनान जिस आर्थिक संकट में घिरा रहा है, उसमें किसी को भी ‘ग्रीक ट्रेजेडी’ की झलक दिखाई दे सकती है।...

गांधी की फिक्र किसे है!

से वानिवृत्त न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर संसद द्वारा उनकी निंदा के प्रस्ताव को रद्द करने की प्रार्थना की...

अनुकरण की शिक्षा

बनवारी पिछली एक शताब्दी में अंगरेजी शिक्षा ने हमें जितना नियंत्रित किया है, उतना बीसवीं सदी के पूर्वार्ध तक चला ब्रिटिश राज भी नहीं...

हिंदू राष्ट्र गांव-दर-गांव

अपूर्वानंद क्या भारत में दो संवेदना-क्षेत्र बन चुके हैं: हिंदू संवेदना क्षेत्र और मुसलिम संवेदना क्षेत्र? यह नाटकीय वक्तव्य नहीं है, हकीकत बनने को...

आपातकाल और आज के सवाल

शिवदयाल आपातकाल के चालीस साल बाद आपातकाल का डर! उस दुस्वप्न के पुन: घटने का डर! कौन डरता है आपातकाल से? नई पीढ़ी? कतई...

बदलाव की राह पर बांग्लादेश

आरफ़ा ख़ानम शेरवानी हाल में हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे को कई मायनों में ऐतिहासिक बताया गया। जिस तरह भारत और बांग्लादेश...

अबलावाद को नया बढ़ावा

मृणाल पाण्डे गए हफ्ते रेडियो पर प्रसारित अपनी वार्ता में प्रधानमंत्री ने कुछ इस आशय की बात कही कि बेटियों, बहनों आदि की सुरक्षा...

छोटे छोटे आपातकाल

राकेश तिवारी मोदी सरकार ने पिछले एक वर्ष में अकादमिक और सांस्कृतिक संस्थानों में जिन लोगों को शीर्ष पदों पर बैठाया है उनमें से...

मैग्नाकार्टा का गुणगान किसलिए

बनवारी इस जून के मध्य में भारत के अंगरेजी अखबारों में ऐसे अनेक लेख छपे, जिनमें मैग्नाकार्टा का गुणगान किया गया था। मैग्नाकार्टा उस...

जार की जुबान हिटलर का भूत

शरद यादव माननीय अध्यक्ष महोदय, लोकसभा। महानुभाव, मैं जबलपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से लोकनायक जयप्रकाश के अनुयायी व जनता प्रत्याशी के रूप में लोकसभा...

असंतोष के परिसर

सुभाष गाताडे आइआइटी-मद्रास के प्रबंधन ने अंतत: छात्रों के समूह ‘आंबेडकर पेरियार स्टडी सर्कल’ की मान्यता बहाल कर दी। अब भले ही विवाद पर...

न्यूनतम सरकार अधिकतम शोषण

केसी त्यागी श्रमिकों के शोषण का लंबा इतिहास रहा है। इसके विरुद्ध श्रमिकों ने समय-समय पर आवाज उठाई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रम कानून बने।...

सियासी मैदान में योग

मणींद्र नाथ ठाकुर जिस जनतंत्र में इंसान की गिनती ही महत्त्वपूर्ण है वहां ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, संस्कृति सबकुछ चुनावी गणित का हिस्सा हो जाता...

यूरोप का भौगोलिक विस्तार

आज के विश्व को समझने के लिए उसके आर्थिक स्वरूप के पार झांकना आवश्यक है। सामान्यत: हमारी सारी बहस अमेरिका-यूरोप के आर्थिक वर्चस्व पर...

संस्कृति की वर्चस्ववादी समझ

भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआइआइ) के नए अध्यक्ष और उसकी सोसाइटी के चार भाजपाई-संघी सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में इस लेख के...

काला धन, कानून और राजनीति

रवि शंकर काले धन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाए गए अघोषित विदेशी आय और संपत्ति (नया कर) विधेयक को संसद के दोनों...

योजनाबद्ध विकास की विदाई

अरविंद मोहन संसद के बीते सत्र में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने एक नहीं, अनेक अवसरों पर यह शिकायत की कि...

प्रचार का गोरखधंधा

विनीत कुमार अपने बेहद लोकप्रिय उत्पाद मैगी के प्रतिबंधित किए जाने और चौतरफा हो रही बदनामी से उबरने के लिए नेस्ले कंपनी अब अमेरिका...

सबरंग