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राजनीति

बांध से ऊंचे सवाल

इसी प्रसंग में देश में निर्मित बांधों पर गौर करें तो पांच हजार दो सौ सैंतालीस बड़े बांधों में तीन सौ अरब घन मीटर...

गांधी की पराजय

जब उनके चहेते दिल्ली के संसद भवन से लेकर लाल किले तक आजादी का जश्न मना रहे थे, तब यह बूढ़ा ‘अर्द्धनग्न फकीर’ कोलकाता...

राजनीतिः औपनिवेशिक दंश झेलती जनजातियां

वर्ष 1871 में औपनिवेशिक भारत में ब्रिटिश सरकार ने भारत की कुछ खानाबदोश और अर्द्ध खानाबदोश जनजातियों को आपराधिक जनजाति अधिनियम (क्रिमिनल ट्राइबल एक्ट)...

बेबाक बोलः प्रचार महाजनो येन गत- अबकी बार प्रचार

प्रधानमंत्री जी बहुत-बहुत शुक्रिया। अपनी सरकार में मार्गदर्शक मंडल बनाने के लिए।

राजनीतिः आपसी सहयोग के रास्ते

दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और भारत सहित दक्षिण एशिया के तमाम देश इस परिधि में आते हैं।

कैसे बचेंगे ग्लेशियर

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से एशियाई ग्लेशियरों के सिकुड़ने का खतरा बढ़ गया है और अगर इन्हें बचाने की कोशिश नहीं हुई तो सदी...

महिला आरक्षण का गतिरोध

विभिन्न अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि महिलाएं पहले की अपेक्षा कहीं अधिक मुखर हुई हैं।

विकास के लिए चाहिए नैतिक आधार

गरीब और धनी देशों के बीच मूल अंतर एक ही दिखता है, और वह है अपने काम के प्रति मनोवृत्ति या दृष्टिकोण का।

सुरक्षित निवेश के सिमटते दायर

भारत जैसे विकासशील देश में अधिकांश लोग आज भी पारंपरिक जमा के हिमायती हैं। वे अपनी बचत बैंक और डाकघरों में रखना चाहते हैं।...

दूसरी नजर- उपभोक्ता, प्रतिस्पर्द्धा और अर्थशास्त्र

कुछ पेट्रोलियम उत्पादों खासकर केरोसिन और रसोई गैस पर सबसिडी देने से भी बचा नहीं जा सकता था, क्योंकि गरीबों पर उनकी कीमतों...

राजनीतिः गुणवत्त के नाम पर

राजस्थान सरकार ने विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) का रास्ता चुना है।

बेबाक बोलः जन की बात- राहुल राग

अभी राजस्थान से लेकर पंजाब और त्रिपुरा से लेकर दिल्ली विश्वविद्यालयों के युवा गढ़ों की दीवारों पर लिखी नई इबारत का विश्लेषण हो ही...

राजनीतिः अमेरिका और उत्तर कोरिया आमने-सामने

मिसाइल परीक्षणों के जवाब में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा सख्त प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद उत्तर कोरिया बाज नहीं आया।

घृणाभाषा बनाम रचनात्मक भाषा

फासिज्म की प्रतिक्रिया में ‘एंटी फासिज्म’ का भाव पैदा होता ही है और इसका सिर्फ वही संस्करण नहीं है जो इन दिनों अमेरिका में...

कर्जमाफी की दुश्वारियां

इटावा में अहेरीपुर के एक किसान को एक रुपए अस्सी पैसे की माफी मिली है, जबकि उसने अट्ठाईस हजार रुपए कर्ज लिए थे। मुकुटपुर...

बढ़ती कीमतों के तर्क

महंगी कार चला कर सब्जी मंडी जाने के बावजूद एक किलो टमाटर खरीदने के बाद सब्जी वाले से पचास ग्राम धनिया मुफ्त में जुटा...

हिमालय की पीर

हिमालयवासी भी एशिया का ऋतुचक्र तय करने वाले हिमालय के पारितंत्र के ही अभिन्न अंग हैं। इसलिए हिमालय और हिमालयवासियों की वेदना को अलग-अलग...

वक्त की नब्जः वे वादे वे ईरादे!

अधिकतर भारतवासी मोदी को एक काबिल, ईमानदार और अच्छा राजनेता मानते हैं। उनकी कुछ नीतियों पर जिनको शक है वे भी मानते हैं कि...

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