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राजनीति

राजनीतिः यह खौफ कहां से आता है

कई मामलों में यह सामने आ चुका है कि महिलाओं को डायन बता कर मारने के पीछे प्रतिशोध की सोच और जायदाद पर कब्जा...

मानक समय की उलझनें

बीजू जनता दल (बीजेडी) के सांसद भतृहरि महताब ने लोकसभा में मुद्दा उठाया कि देश के पूर्वी और पश्चिमी छोर के समय में लगभग...

हिमालय नीति की जरूरत

अमेरिका में तो पर्वतीय विकास पर काम करने के लिए अलग से एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान है। इसी क्रम में हिमालय के लिए एक अलग...

जनसंख्या नियंत्रण का तकाजा

देश की आबादी आजादी के बाद चार गुना बढ़ गई। दरअसल, देश में परिवार कल्याण कार्यक्रमों को लागू करने वाली सरकारी एजेंसियां गंभीर नहीं...

स्त्री के श्रम का अवमूल्यन क्यों

महिलाओं के घरेलू अवैतनिक कार्य के साथ एक कठोर सच्चाई यह जुड़ी हुई है कि आर्थिक गणनाओं में ही नहीं, भावात्मक रूप में भी...

तीरंदाजः राजनीति की कोठरी

हर तरह की राजनीतिक व्यवस्था में शरीक नेतृत्व किसी न किसी हद तक दागदार होता है। पर अच्छी राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था वह है,...

बाखबरः टैंक प्रेम लाना

बिहार के ‘मोर्चा उखाड़’ को लेकर हर चैनल प्रसन्न लाइन देता था कि यह घर वापसी है... यह घर वापसी है। हिंदी चैनल घर...

वक्त की नब्जः भ्रष्टाचार की दीमक

ऐसा होने से न सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ा है, राजनीतिक दल भी कमजोर हो गए हैं, क्योंकि असली राजनेताओं के बदले इनके सदस्य बन...

कॉलेज शिक्षकों की पदोन्नति के लिए अनिवार्य नहीं रहेगा शोध

महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों को पदोन्नति के लिए शोध की अनिवार्यता खत्म की जाएगी। इसके लिए आधार शैक्षणिक प्रदर्शन संकेतक...

दुनिया मेरे आगेः बस्ते के बोझ से दबी शिक्षा

आज छोटे-छोटे बच्चे होमवर्क के खौफ में जीते हैं। जबकि यशपाल समिति की सलाह थी कि प्राइमरी कक्षाओं में बच्चों को गृहकार्य सिर्फ इतना...

बेबाक बोलः संपूर्ण भ्रांति- अबकी बार बिहार

2014 के लोकसभा चुनावों के बाद जब नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के एक नए ब्रांड के रूप में उभरे तो मोदीवाद के अश्वमेध घोड़े...

हरित क्रांति के नाम पर

मार्च-अप्रैल में इकतालीस दिनों तक प्रदर्शन करने के बाद तमिलनाडु के किसान एक बार फिर जंतर-मंतर पर जुट गए हैं।

बच्चों की मासूमियत छीनते कार्यक्रम

बच्चों के ऐसे कार्यक्रमों से बाहर होने पर अभिभावक भी जम कर आंसू बहाते नजर आते हैं। कई बार उनके प्रदर्शन के लिए मिले...

रेलयात्रा कैसे होगी मंगलमय

साफ-सफाई में कमियों से इतर जो बात रेलयात्रियों को सबसे ज्यादा परेशान करती है, वह यह है कि महंगी कीमत चुकाने के बाद भी...

प्रणब मुखर्जी नहीं, उनके चश्मे की सिक्योरिटी को मुस्तैद किए गए थे 10 लंगूर

नवंबर 2014 में प्रणव दा की सिक्योरिटी में 10 लंगूर लगाए गए थे। इसलिए नहीं कि वह तब राष्ट्रपति थे, बल्कि उनका चश्मा सुरक्षित...

पाइप पीने के शौकीन हैं पोल्टू दा, जानिए कैसे लगा इसका चस्का

देश के राष्ट्रपति के तौर पर तो सब ने उन्हें देखा और पढ़ा, लेकिन उनकी निजी जिंदगी के बारे में कम लोग ही जानते...

सोशल मीडिया का बेजा इस्तेमाल

कुछ समय से सोशल मीडिया पर डाले जाने वाले फेक न्यूज (झूठे समाचार या सूचनाएं), हेट स्पीच (नफरत फैलाने वाली बातें), फेक फोटो (जाली...

नकली नोटों से कब मिलेगी निजात

आंकड़ों के मुताबिक नकली मुद्रा रिपोर्टों की संख्या वर्ष 2007-08 में महज 8,580 थी, जो 2008-09 में बढ़ कर 35,730 और वर्ष 2014-15 में...

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