June 26, 2017

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उड़नछू हो गई जूता फेंकने के बाद मिली जीत

राजौरी गार्डन विधानसभा उपचुनाव में पराजित होने के बावजूद कांग्रेस जश्न मना रही है।

Author April 15, 2017 03:45 am
भाजपा-अकाली दल उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा

राजौरी गार्डन विधानसभा उपचुनाव में पराजित होने के बावजूद कांग्रेस जश्न मना रही है। उसे आम आदमी पार्टी के हारने और उसके उम्मीदवार की जमानत जब्त होने की खुशी है। फरवरी 2015 के चुनाव में जिस राजौरी गार्डन सीट से आप के जनरैल सिंह ने भाजपा-अकाली दल उम्मीदवार मनजिंदर सिंह सिरसा को दस हजार से अधिक मतों से पराजित किया था, उसी सीट पर आप उम्मीदवार को करीब दस हजार वोट आए और सिरसा करीब 15 हजार वोट के अंतर से चुनाव जीत गए। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया हार का ठीकरा जनरैल सिंह के सिर फोड़ रहे हैं जबकि वे तो पार्टी की योजना से ही इस सीट से इस्तीफा देकर पंजाब चुनाव लड़ने गए थे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन इसलिए खुश हैं कि कांग्रेस के वोट में करीब 21 फीसद की बढ़ोतरी हुई है और कांग्रेस के वोट पर कब्जा करके दिल्ली में सरकार बनाने वाली आप आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर पहुंच गई है। उन्हें भरोसा है कि निगम चुनावों में कांग्रेस इससे बेहतर करेगी।

कहने के लिए राजौरी गार्डन सीट पंजाबी बहुल था। लेकिन 2006 के परिसीमन के बाद विष्णु गार्डन सीट का ज्यादातर इलाका राजौरी गार्डन में आने के बाद यह सीट सही मायने में दिल्ली की तस्वीर दिखाती है। एक तरफ दिल्ली का गांव, अनधिकृत कालोनी, अल्पसंख्यक मतदाता तो दूसरी तरफ सिख और पंजाबी मूल के मतदाता बड़ी संख्या में हैं। 2015 विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत मिलने के बाद से ही ‘आप’ का असर कम होने के संकेत मिलने शुरू हो गए थे। 2015 के दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव ‘आप’ ने पूरी तैयारी से लड़ी, लेकिन तीसरे नंबर पर आई। 2016 के निगमों के 13 सीटों के उपचुनाव में भी कांग्रेस ने वापसी की। पंजाब चुनाव में पार्टी के लिए गलत संकेत न जाए इस कोशिश में ‘आप’ ने 2016 के दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव न लड़ना तय किया। इतना ही नहीं आप के 21 विधायक जिन्हें गैकानूनी तरीके से संसदीय सचिव बनाया गया था, उनके मामले को ‘आप’ के नेता पंजाब चुनाव के लिए टालते रहे। लेकिन पंजाब चुनाव में आप की पराजय ने ‘आप’ को धराशायी कर दिया। यह राजौरी गार्डन के चुनाव नतीजों से पता चलता है। इस उपचुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर आप नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजौरी गार्डन में जमकर प्रचार किया था।

2006 के परिसीमन से पहले इस सीट से कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन विधायक रहे। परिसीमन के बाद पुराने विष्णु गार्डन सीट के ज्यादातर इलाके इस सीट से मिला दिए गए। उसके बाद यह सीट पंजाबी बहुल नहीं रही। विष्णु गार्डन से विधायक रहे दयानंद चंदेला भाजपा से बगावत करके राजौरी गार्डन से चुनाव लड़े और अकाली भाजपा उम्मीदवार अवतार सिंह हित को महज 84 वोट से हराने में कामयाब रहे। वे अपने इलाके से न केवल चुनाव जीतने में कामयाब होते हैं बल्कि अपने परिवार के सदस्यों को निगम पार्षद बनवा लेते हैं। गुर्जर बहुल ख्याला से लेकर अनधिकृत कालोनियों में असर के कारण उन्हें कई चुनावों में बढ़त मिलती रही है। उनके खिलाफ आपराधिक मामला होने के कारण कांग्रेस ने उनके बजाए उनकी बहू को ही पिछली बार टिकट दिया था। आप की आंधी में मीनाक्षी को 14 हजार ही वोट मिल पाए और वे तीसरे नंबर पर रहीं। इस उपचुनाव में चंदीला की पुत्रवधु मीनाक्षी चंदीला के उम्मीदवार रहते कांग्रेस के मत के औसत में 21 फीसद उछाल के साथ यह 33 फीसद हो गया।

जनरैल सिंह को महज 1984 के सिख विरोधी दंगों के आरोपियों को टिकट देने के चलते तब के केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम पर जूता फेंकने के ईनाम के तौर पर ‘आप’ ने राजौरी गार्डन से टिकट दिया। उन्होंने दस हजार वोटों के अंतर से भाजपा-अकाली गठबंधन के उम्मीदवार सिरसा को पराजित किया। उन्हें इस जनवरी में विधानसभा से इस्तीफा दिलवाकर पंजाब में चुनाव लड़वाया गया। कहा गया कि उन्हें पार्टी उपमुख्यमंत्री बनाएगी। ‘आप’ पंजाब में हारी और जनरैल सिंह भी हारे। यह हार ‘आप’ के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है।

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First Published on April 15, 2017 3:45 am

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