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जेएनयू विवाद: गृहमंत्री ने कहा, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे

संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी की सजा के खिलाफ कथित तौर पर जेएनयू में आयोजित एक कार्यक्रम के सिलसिले में देशद्रोह के आरोप में कन्हैया को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार किया था।
Author नई दिल्ली | February 14, 2016 15:22 pm
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो)

नई दिल्ली, 13 फरवरी। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) विवाद के बीच केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि किसी निर्दोष को परेशान नहीं किया जाएगा और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। गृहमंत्री ने शनिवार को यह बयान तब दिया जब कुछ ही घंटे पहले वामपंथी पार्टियों और जद (एकी) के नेताओं ने उनसे मुलाकात की। वाम और जद (एकी) नेताओं ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी सहित अन्य छात्रों पर की जा रही पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। उधर, भाजपा ने कहा है कि काग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और विपक्ष के दूसरे नेता लश्कर-ए-तैयबा की भाषा बोल रहे हैं। जेएनयू के आंदोलकारी छात्रों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी शनिवार को कैंपस पहुंचे। उन्होंने राजग सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

राजनाथ सिंह ने पत्रकारों से कहा, ‘छात्रों को परेशान करने का सवाल ही नहीं है। लेकिन दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।’ सिंह ने शुक्रवार को कहा था, ‘यदि कोई भारत-विरोधी नारे लगाता है, देश की एकता और अखंडता पर सवालिया निशान लगाता है तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’

संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी की सजा के खिलाफ कथित तौर पर जेएनयू में आयोजित एक कार्यक्रम के सिलसिले में देशद्रोह के आरोप में कन्हैया को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार किया था। कन्हैया भाकपा की छात्र शाखा आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआइएसएफ) के सदस्य हैं।

भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी राजा और जद (एकी) महासचिव केसी त्यागी के साथ गृहमंत्री से मुलाकात के बाद माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, ‘हमने गृह मंत्री से मुलाकात कर उन्हें जेएनयू के मौजूदा माहौल से अवगत कराया। दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम के सिलसिले में 20 छात्रों की एक सूची जारी की है। इसमें डी राजा की बेटी का भी नाम है। लेकिन हमारा सवाल है कि क्या उन्हें वीडियो में नारेबाजी करते देखा गया?’ येचुरी ने कहा, ‘वे वहां इसलिए मौजूद थे क्योंकि वे छात्र संघ या संगठनों के सदस्य थे लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे उसमें शामिल थे। हमने मांग की है कि कन्हैया को रिहा किया जाए और गृहमंत्री ने हमें भरोसा दिलाया है कि किसी निर्दोष छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।’ येचुरी ने आरोप लगाया कि जेएनयू के नए कुलपति मोदी सरकार के निर्देशों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने दमनात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस को परिसर के भीतर जाने की इजाजत दी।

वहीं दिल्ली प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अजय माकन और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा के साथ राहुल ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत की और मुक्त आवाज के प्रतिनिधित्व के लिए विश्वविद्यालय की तारीफ की। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा राष्ट्रविरोधी लोग वो हैं, जो इस संस्थान में छात्रों की आवाज दबा रहे हैं। जेएनयू में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई और हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित शोधार्थी रोहित वेमुला को आत्महत्या के लिए मजबूर करने की परिस्थितियों के बीच समानता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सवाल है कि छात्रों को वैसा कहने की क्यों इजाजत नहीं दी जाती जिसमें वो विश्वास रखते हैं। वेमुला की आत्महत्या का हवाला देते हुए और सरकार, खासकर इस मुद्दे पर मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा, ‘एक युवा अपनी राय रखता है और सरकार कहती है कि वह राष्ट्र विरोधी है। बाद में मंत्री पलट जाती हैं कहती हैं कि आप दलित नहीं हैं।’

राहुल और अन्य विपक्षी नेताओं ने जेएनयू छात्र संघ की ओर से आयोजित एक बैठक में भी हिस्सा लिया और छात्र संघ के अध्यक्ष की तत्काल और बिना शर्त रिहाई, परिसर में पुलिस राज खत्म करने और जेएनयू के छात्रों को चुन-चुनकर निशाना बनाना बंद करने की मांग की।

राहुल को आरएसएस की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों ने काले झंडे दिखाए। इस पर उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों ने मुझे काले झंडे दिखाए, मुझे गर्व है इस देश पर कि उन्हें काले झंडे दिखाने का अधिकार है।’

इस बीच, दिल्ली पुलिस के आयुक्त बीएस बस्सी ने कहा कि पुलिस कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्ध है। पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि किसी निर्दोष को परेशान नहीं होना पड़े। पुलिस बिना दबाव के काम करेगी। उधर, भाजपा के राट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा, ‘राहुल गांधी और उनके दोस्त लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी हाफिज सईद की भाषा बोल रहे हैं, जिसने जेएनयू में भारत विरोधी कार्यक्रम के समर्थन में ट्वीट किया है। यह हमारे शहीदों और सशस्त्र बलों का अपमान है, जो सीमा पर अपने प्राणों का बलिदान करते हैं, इससे राष्ट्र विरोधी ताकतों का मनोबल बढ़ेगा।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस वह राजनीतिक कारण से शहीदों का अपमान न करे।

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष की गिरफ्तारी पर राहुल ने कहा था, ‘मोदी सरकार और एबीवीपी जेएनयू जैसे संस्थान पर सिर्फ इसलिए धौंस जमा रहे हैं क्योंकि यह उनके मुताबिक नहीं चल रहा। यह पूरी तरह से निंदनीय है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा था, ‘भारत विरोधी भावना स्वीकार्य होने का कोई सवाल ही नहीं है जबकि असहमति और चर्चा का अधिकार लोकतंत्र का आवश्यक तत्व है।’

अमरीकी आतंकी डेविड हेडली के बयानों के संदर्भ में भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने जेएनयू मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ शामिल होने के लिए जद (एकी) की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जद (एकी) ने इशरत को बिहार की बेटी बताया था।

वहीं दूसरी ओर संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी दिए जाने के खिलाफ जेएनयू कैंपस में हुए कार्यक्रम को लेकर चल रहे विवाद के जेएनयू के छात्र रह चुके पूर्व सैन्यकर्मियों ने अपनी डिग्री लौटाने की धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि ऐसे संस्थान के साथ उन्हें अपने को जोड़ना मुश्किल लगता है जो राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का अड्डा बन गया है। 54वें एनडीए पाठ्यक्रम के पूर्व सैन्यकर्मियों ने जेएनयू के कुलपति जगदीश कुमार को एक खत लिखकर अपनी भावना से अवगत कराया है।

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