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सोशल मीडिया के अंदरूनी खतरे

सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट्स को कुछ असामाजिक तत्त्वों व नकारात्मक सोच रखने वालों ने अफवाह फैलाने, दहशत फैलाने, ठगी, धोखाधड़ी आदि का माध्यम भी बना लिया है।
Author April 17, 2017 01:07 am
सोशल मीडिया।

बाकी विश्व के साथ-साथ भारत में भी कंप्यूटर-इंटरनेट क्रांति का युग चल रहा है। और इस युग में इंटरनेट के माध्यम से सोशल मीडिया आम लोगों की आवाज बुलंद करने में सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसमें कोई शक नहीं कि इसी सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे विश्व में दशकों से बिछड़े करोड़ों लोग एक-दूसरे की सफलतापूर्वक तलाश कर उनसे संपर्क कर चुके हैं। दूरदराज के ऐसे समाचार, जिनका जल्दी अपने जिला मुख्यालय तक पहुंच पाना संभव नहीं हो पाता था, वे अब आनन-फानन में पूरे विश्व में किसी भी कोने में पहुंचाए जा सकते हैं। निश्चित रूप से इंटरनेट व इसके माध्यम से चलने वाली सोशल नेटवर्किंग साइट्स पूरी दुनिया के लिए ज्ञान तथा सुविधा का अब तक का सबसे बड़ा माध्यम साबित हो रही हंै। पर तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट्स को कुछ असामाजिक तत्त्वों व नकारात्मक सोच रखने वालों ने अफवाह फैलाने, दहशत फैलाने, ठगी, धोखाधड़ी आदि का माध्यम भी बना लिया है। आज जहां गूगल, फेसबुक, वाट्सएप, टवीटर, इंस्टाग्राम जैसे कई और नेटवर्क पूरी दुनिया को एक-दूसरे से पलक झपकते ही जोड़ने की क्षमता रखते हैं वहीं इन्हीं के माध्यम से असामाजिक तत्त्व फर्जी आइडी बना कर इस आभासी संसार में लोगों से अलग-अलग पहचान के साथ मित्रता गांठ कर कभी उनके जीवन से खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं, कभी शादी-विवाह का झांसा देकर दुराचार करने की खबरें इसी माध्यम की बदौलत सुनाई देती हैं। कभी अपहरण की घटनाएं इन्हीं वेबसाइट्स के द्वारा होती देखी जाती हैं। कभी किसी को लालच के जाल में फंसा कर उससे पैसे ऐंठ लिये जाते हैं तो कभी-कभी किसी का पूरा बैंक एकाउंट ही खाली कर दिया जाता है।

पिछले दिनों भारत में एक नई कंपनी पेटीएम के नाम से बाजार में उतरी। इस कंपनी को शुरुआती दौर में ही कुछ शरारती तत्त्वों ने चूना लगा दिया। और पेटीएम के ही पैसे उड़ा ले गए। दूसरी ओर, कुछ ठगों द्वारा भी पेटीएम का इस्तेमाल कर लोगों को अपने झांसे में लेकर उनसे इसी माध्यम से अपने पेटीएम एकाउंट में पैसे डलवाए जाने की भी खबरें हैं। गोया जनता की सुविधा तथा नगद लेन-देन से बचने के लिए बनाई गई इस एप को भी ठगों ने अपनी मर्जी के अनुसार अपने फायदे का माध्यम बना डाला।पर सोशल मीडिया अथवा इंटरनेट की दूसरी कई सामाजिक वेबसाइट्स के माध्यम से होने वाली किसी भी प्रकार की ठगी, धोखा या अपहरण, फिरौती या जालसाजी जैसी घटनाएं तो फिर भी किसी हद तक कोई एक व्यक्ति या परिवार सहन कर सकता है। मगर बड़े अफसोस की बात है कि यह माध्यम अब हमारे देश में सांप्रदायिकता फैलाने, दंगे-फसाद करवाने, जातिवाद को हवा देने तथा समाज के अनेकता में एकता रखने वाले उस ताने-बाने को तोड़ने में लगा है जो हमारे देश की सदियों पुरानी पहचान रहा है। देश में कई राज्यों में ऐसे दंगे-फसाद हो चुके हैं जिसमें इसी सोशल मीडिया की सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। कभी मुसलमानों पर देश के किसी भाग में होने वाले अत्याचारों को कश्मीर में सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित कर वहां के लोगों में उत्तेजना पैदा करने की कोशिश की जाती है।

बाबरी मस्जिद विध्वंस का वीडियो कश्मीर में खूब चलाया व दिखाया जाता है। इसी प्रकार पाकिस्तान व बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर होने वाले जुल्म का वीडियो भारत में प्रसारित कर यहां सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश की जाती है। कभी गोकशी की किसी दूसरे देश का वीडियो या चित्र भारत में प्रसारित कर गोभक्तों में गुस्सा पैदा करने की कोशिश की जाती है तो कभी मस्जिदों, दरगाहों या सिख समुदाय से जुड़ी कोई उत्तेजना पैदा करने वाली फोटो शेयर कर आम जनता को बरगलाने का प्रयास किया जाता है।हमारे देश की जनता कितनी सीधी व भोली-भाली है यह बताने या समझाने की जरूरत नहीं है। हमारे देश की एक-दूसरे पर भरोसा करने वाली जनता को आज से नहीं सदियों से लूटने वाले लोग सांप-नेवले की लड़ाई दिखा कर भीड़ इकट्ठा कर उनके हाथों कभी कोई तेल बेच जाते हैं तो कभी जादू-टोना। सांडे के तेल बेचने के नाम पर लोगों का झुंड लगा दिखाई देता है। बंदर-भालू, सांप, आदि के नाम पर भीड़ इकट्ठा कर मदारी द्वारा लोगों को सामान बेचना यहां के चतुर लोगों की पुरानी कला है। ऐसे में यदि राजनीतिक लोग जनता को बरगला कर या कोई सब्जबाग दिखा कर सत्ता में आ जाएं तो अधिक आश्चर्य नहीं किया जाना चाहिए।

ये बातें इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए काफी हैं कि हमारे देश की अधिकांश जनता आमतौर पर बिना किसी सत्यापन के अथवा बिना किसी प्रमाण के लोगों की बातों पर विश्वास कर लेती है, और उस कहावत को चरितार्थ करती दिखाई देती है कि ‘कौवा कान ले गया तो अपना कान देखने के बजाय कौवे के पीछे भाग जाती है’। जाहिर है, हमारे देश की जनता के इसी साधारण व सरल स्वभाव का लाभ शरारती तथा असामाजिक तत्त्व उठाते हैं जिन्हें दंगे-फसाद, खूंरेजी, सांप्रदायिकता तथा जातिवाद की दुर्भावना फैलने से लाभ हासिल होता है। या वे किसी के मोहरे बन कर ऐसा गंदा खेल खेलते हैं।आजकल हमारे देश में इसी सोशल मीडिया का प्रयोग राजनीतिक या वैचारिक मतभेद रखने वाले लोगों के विरुद्ध जबर्दस्त तरीके से किया जा रहा है। एक पक्ष के पैरोकार अपने पक्ष की आलोचना या उसके विरुद्ध किसी प्रकार का कोई तर्क-वितर्क सुनने को तैयार नहीं हैं। परिणामस्वरूप कोई भी व्यक्ति यदि अपनी विचारधारा या अपने पक्ष की कोई बात रखता है या दूसरे की आलोचना करता है तो उसे इसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से ही भद््दी-भद््दी गालियां दी जाती हैं तथा डराने-धमकाने व अपमानित करने की कोशिश की जाती है। सोशल मीडिया के इसी हमले का शिकार भारत के शहीद कैप्टन मंदीप सिंह की बेटी गुरमेहर कौर से लेकर पत्रकार साक्षी जोशी तक हो चुकी हैं। साक्षी जोशी ने तो अपने विरुद्ध की गई एक अभद्र व अश्लील टिप्पणी के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई तथा नोएडा पुलिस ने गुजरात के नवसारी से उस शोहदे को गिरफ्तार भी कर लिया जिसने साक्षी जोशी को गंदी गालियां दी थीं। पर यह भी हकीकत है कि प्रत्येक लड़की साक्षी जोशी जैसा साहस दिखाते हुए पुलिस में एफआइआर नहीं दर्ज करा पाती और न ही ऐसी प्रत्येक एफआइआर पर पुलिस इस प्रकार तत्काल कार्रवाई करती है जैसा कि साक्षी के मामले में उसने किया।

ऐसे में हम भारतवासियों को खासतौर पर बड़ी गंभीरता से सोशल मीडिया के विषय पर यह सोचने की जरूरत है कि हम इस माध्यम पर कितना विश्वास करें और कितना न करें? अभी पिछले ही दिनों इसी माध्यम से दो खबरें खूब वायरल हुर्इं। एक खबर फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना की मृत्यु की थी, तो दूसरी खबर राजधानी ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने की, जिसे सचित्र प्रसारित किया गया। पर ये दोनों ही समाचार झूठे थे। कुछ विशेषज्ञ तो यहां तक मानते हैं कि झूठ तथा अफवाह के पीछे बिना किसी तसदीक व सत्यापन के विश्वास कर लेने वाले लोगों के लिए यह माध्यम बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इस माध्यम में केवल दंगा-फसाद व अराजकता फैलाने की ही नहीं बल्कि इसमें गृहयुद्ध छिड़वा देने तक की क्षमता है। जाहिर है, हमें सोशल मीडिया के ऐसे खतरों से सावधान रहना पड़ेगा।

 

 

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