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सतह पर स्वीकारोक्ति

अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान को यह भी चेतावनी दी कि अगर वह सईद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता तो उसे दी जाने वाली इमदाद में कटौती कर दी जाएगी।
Author May 16, 2017 05:29 am
जमात-उद-दावा प्रमुख हाफिज सईद (ANI Photo)

पाकिस्तान सरकार ने एक बार फिर लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद और उसके चार सहयोगियों को जिहाद के नाम पर आतंक फैलाने का गुनहगार करार दिया है। शनिवार को न्यायिक समीक्षा बोर्ड के सामने पाक सरकार के गृह मंत्रालय ने साफ किया कि सईद और उसके साथियों को इसलिए नजरबंद किया गया है कि वे आतंकी कार्रवाइयों में लिप्त रहे हैं। पाक सरकार ने पिछले महीने पंजाब हाईकोर्ट में भी यही बात कही थी। गौरतलब है कि सईद ने अपनी नजरबंदी के खिलाफ अपील कर रखी है, जिस पर सुनवाई के लिए पाक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एजाज अफजल खान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय बोर्ड का गठन किया गया है। सईद को 2008 में भी गिरफ्तार किया गया था। तब मुंबई में हुए आतंकी हमले में सईद का सीधा हाथ था। इस संबंध में तमाम सबूत भारत ने पाकिस्तान के अलावा संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका को भी सौंपे थे। मुंबई हमले में 166 लोग मारे गए। शुरू में पाकिस्तान सरकार यह कह कर सईद का बचाव करती रही कि उसकी गतिविधियां राहत-कार्य और मजहबी प्रचार-प्रसार तक सीमित हैं। लेकिन पिछले दिनों जब अमेरिकी प्रशासन ने हाफिज सईद को आतंकियों की सूची में डाला और उसके सिर पर एक करोड़ रुपए के ईनाम का एलान किया तो पाकिस्तान सरकार सकते में आ गई। अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान को यह भी चेतावनी दी कि अगर वह सईद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता तो उसे दी जाने वाली इमदाद में कटौती कर दी जाएगी। यह एक तरह से भारत की कूटनीतिक जीत थी।

इसके बाद पाकिस्तान सरकार ने पिछली जनवरी में हाफिज सईद और उसके चार सहयोगियों को नजरबंद कर दिया। शनिवार को न्यायिक समीक्षा बोर्ड के समक्ष सईद ने खुद अपनी दलील रखी, हालांकि उसका वकील उसके साथ था। उसने कहा कि पाक सरकार ने उसे इसलिए नजरबंद कर रखा है कि वह कश्मीरियों की आवाज बुलंद करता रहा है। उसने यह भी कहा कि पाक सरकार उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं दे पाई है। हालांकि सईद को लेकर तमाम ऐसे सबूत हैं, जिनसे साबित हुआ है कि वह आतंकी साजिशों में शामिल रहा है। बल्कि उसे उन साजिशों का सूत्रधार करना ज्यादा सही होगा। और भी गंभीर मसला यह है कि पाकिस्तान की सेना और आईएसआई के साथ लश्कर-ए-तैयबा के तार जुड़े होने के तथ्य कई बार सामने आ चुके हैं। पाक सेना के सैनिक ही लश्कर के आतंकियों को न केवल प्रशिक्षण देते हैं, बल्कि भारत की सीमा में उन्हें घुसपैठ कराने के लिए कई बार ‘कवर-फायर’ भी करते हैं।
पाकिस्तान सरकार ने फिलहाल अपनी दलीलों में हाफिज को आतंकी माना है। लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र और अमेरिकी सरकार के दबाव में सईद को नजरबंद तो कर रखा है, पर उसकी वास्तविक मंशा क्या है, यह आगे की सुनवाई में ही सामने आ पाएगा। भारत के लिए जरूरी है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव को यथासंभव बरकरार रखे। क्योंकि यह एक ऐसा अवसर है जब अपराधी को उसके अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है। साथ ही, भारत को उसके प्रत्यर्पण की भी मांग करनी चाहिए।

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