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फसल बीमा की हकीकत

आकंड़े बता रहे हैं कि किसानों ने फसल नुकसान संबंधी जो दावा किया उसका निपटारा ढंग से नहीं किया गया। कई जगहों पर निपटारे के लिए किसान आज भी धक्के खा रहे हैं।
Author August 14, 2017 05:22 am
किसानों की कर्मभूमि रहा पंजाब आज उनकी मरनभूमि बन रहा है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की पोल खुलने लगी है। किसानों के बैंक खातों से जबर्दस्ती प्रीमियम काटे जाने के बाद भी किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला। उधर बीमा कंपनियां अब फिर प्रीमियम बढ़ाने की मांग कर रही हैं। जबकि एक साल में ही बीमा कंपनियों ने इस योजना के तहत हजारों करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया। आकंड़े बता रहे हैं कि किसानों ने फसल नुकसान संबंधी जो दावा किया उसका निपटारा ढंग से नहीं किया गया। कई जगहों पर निपटारे के लिए किसान आज भी धक्के खा रहे हैं। जबकि कई जगहों पर बीमा कंपनियों ने सरकारी अधिकारियों से मिल कर किसानों के दावों को खारिज कर दिया। पहले की बीमा योजनाओं को खत्म कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई। इस योजना से निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियां मालामाल हो रही हैं। किसानों, राज्यों और केंद्र सरकार ने मिलकर इस फसल बीमा योजना के तहत लगभग 16 हजार करोड़ रुपए का प्रीमियम भुगतान खरीफ फसल के लिए किया। लेकिन उसके एवज में किसानों को फसल नुकसान के दावे के तौर पर महज लगभग 3600 करोड़ रु. का भुगतान किया गया। यह भुगतान किसानों द्वारा किए गए दावों से लगभग पैंतीस प्रतिशत कम था। किसानों ने फसल नुकसान के दावे के तौर पर 5600 करोड़ का दावा किया था।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पैनल में शामिल 11 बीमा कंपनियों को किसानों की तरफ से 2685 करोड़ रुपए के प्रीमियम का भुगतान किया गया। बाकी की राशि का वहन केंद्र और राज्यों की सरकारों किया। किसानों के प्रीमियम भुगतान के आकंड़ों के आधार पर मंत्रालय ने तर्क दिया कि किसानों ने जितना प्रीमियम का भुगतान किया उससे अस्सी प्रतिशत दावे ज्यादा आए। लेकिन दिलचस्प बात है कि यह तर्क देते हुए मंत्रालय भूल रहा है कि जो राशि राज्य सरकारों और केंद्र सरकार ने बीमा कंपनियों को अपने हिस्से से दी, वह पैसा भी जनता का ही है। यह अलग बात है कि मंत्रालय यह दावा कर रहा है कि दावों की राशि 13 हजार करोड़ रुपए तक जा सकती है। लेकिन वर्तमान में सच्चाई यही है कि किसानों को कुल दावों का 65 प्रतिशत ही मिला है। ऐसे में विपक्ष के आरोप में दम दिखता है कि फसल बीमा योजना के जरिए बीमा कंपनियों ने कम से कम दस हजार करोड़ रुपए कमाए।
फसल की उचित कीमत देने की किसानों की मांग का सामना करने से सरकार कतरा रही है। नाराज किसान कभी प्याज सड़कों पर फेंक देते है, तो कभी टमाटर। आलू की कीमत न मिले तो किसान सड़कों पर आलू भी फेंक रहे हैं। दूसरी तरफ फसलों के बीमा के नाम पर बीमा कंपनियां एक ही साल में हजारों करोड़ रुपए का मुनाफा कमा गर्इं। फसलों को बचाने के लिए किसान उनका बीमा करवा रहे हैं। दूसरी तरफ किसान इन्हीं ंफसलों की उचित कीमत न मिलने के कारण अपने ऊपर चढ़े कर्ज को नहीं चुका पा रहे हैं। ऐसे में फसलों के साथ-साथ किसानों की भी जान जा रही है। सरकार के लिए अब उचित यही होगा कि फसल बीमा के साथ-साथ किसानों के लिए जीवन बीमा की भी योजना लेकर आए, ताकि खुदकशी करने वाले किसानों के परिवारों के लिए भी निजी बीमा कंपनियों की कुछ जिम्मेवारी तय की जाए।

अगर फसल बीमा योजना की राज्यवार हालत देखें तो पता चलेगा कि बीमा कंपनियों ने फसल के नाम पर भारी मुनाफा कमाया है। इसमें वे राज्य भी शामिल हैं जहां हाल ही में किसानों ने जोरदार आंदोलन किया है। मध्यप्रदेश जैसे राज्य में, जहां से किसानों की खुदकुशी की लगातार खबरें आ रही हैं, वहां बीमा कंपनियों ने जमकर मुनाफा कमाया। संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश में खरीफ मौसम के लिए 2800 करोड़ रुपए का प्रीमियम भरा गया था। इसमें अकेले किसानों ने ही 400 करोड़ रुपए का प्रीमियम का भुगतान किया था। लेकिन किसानों की फसल खराब हुई तो उन्हें क्या मिला, यह देखना जरूरी है। किसानों ने लगभग 600 करोड़ रुपए का दावा (क्लेम) किया। लेकिन राज्य के लगभग 1 लाख 14 हजार किसानों को महज 51 करोड़ रुपए का दावा-भुगतान किया गया। एक किसान को दावे के तौर पर औसतन सिर्फ साढ़े चार हजार रुपए मिले।
किसानों की खुदकुशी के मामले में महाराष्ट्र अव्वल रहा है। यहां भी बीमा कंपनियों ने जमकर मुनाफा काटा। यहां पर हाल ही में किसान आंदोलन काफी तेज हो गया था। फसलों की गिरती कीमतों के कारण कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ा था। इस राज्य में लगभग 27 लाख किसानों का बीमा करवाया गया था। बीमा कंपनियों को सरकार और किसानों ने मिलकर 3933 करोड़ रुपये प्रीमियम के तौर पर भुगतान किया। लेकिन किसानों को दावे के तौर पर मात्र 1803 करोड़ रुपए ही मिले। अगर महाराष्ट्र के आंकड़े देखें तो कंपनियों को कुल मिली प्रीमियम राशि में से महज 46 प्रतिशत राशि खर्च करने से काम चल गया। यही कुछ हाल एक अन्य भाजपा-शासित राज्य राजस्थान का भी था, जहां 1959 करोड़ रुपए का प्रीमियम बीमा कंपनियों को मिला और बीमा कंपनियों ने 292 करोड़ का दावा-भुगतान किसानों को किया। बीमा कंपनियों ने राजस्थान में मजे से 1667 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।

आखिर मंदी के दौर में निजी क्षेत्र को इतना मुनाफा किस धंधे में होगा? यह दीगर बात है कि जिन किसानों के नाम पर बीमा कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं वे कर्ज के बोझ तले हैं, उनके खातों से जबर्दस्ती बीमा की रकम काटी जा रही है, वे खुदकुशी करने को बाध्य हैं। बिहार जैसे राज्य में तो फसल से संबंधित एक-दो दावा ही बीमा कंपनियों ने स्वीकार किया। यहां पर लगभग 300 करोड़ रुपये के दावे किए गए थे। बीमा कंपनियों ने इस गरीब राज्य से भी 1122 करोड़ रुपए प्रीमियम की कमाई की। यहां के गरीब किसानों ने अपनी जेब से प्रीमियम के तौर पर 130 करोड़ रुपए भरे थे।आकंड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ किसानों को न के बराबर है। कृषि राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने संसद में यह जरूर कहा था कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों और कृषियोग्य भूमि के कवरेज में अच्छी वृद्धि हुई है। अगर सरकारी आंकड़ों पर भरोसा करें तो 2016-17 में खरीफ फसल के लिए किसानों की 3.7 करोड़ हेक्टेयर भूमि का फसल बीमा किया गया। लेकिन सरकार यह बताने में विफल है कि आखिर इस संख्यावृद्धि और कृषियोग्य भूमि के कवरेज के विस्तार से किसे लाभ मिला। आखिर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का इतना ज्यादा लाभ बीमा कंपनियों को कैसे मिल गया और किसानों के दावों का निपटारा सही तरीके से क्यों नहीं हुआ?

दरअसल, फसल बीमा योजना के तहत कवर किए जाने वाले किसानों की संख्या बढ़ाने और कृषियोग्य भूमि को ज्यादा से ज्यादा बीमा कवर में लाने का सीधा खेल बीमा कंपनियों के मुनाफे से जुड़ा है। जितने ज्यादा किसान और जितनी ज्यादा कृषियोग्य भूमि बीमा कवर में आएंगे उतना ही ज्यादा लाभ बीमा कंपनियों को प्रीमियम के तौर पर मिलेगा। इतने भारी लाभ के बावजूद बीमा कंपनियों को संतोष नहीं है। अब बीमा कंपनियां यह तर्क दे रही हैं कि जितना प्रीमियम नए साल में आएगा उससे दो सौ प्रतिशत ज्यादा दावे किसानों की तरफ से आ सकते हैं, इसलिए फसल बीमा योजना का प्रीमियम बढ़ाया जाना जरूरी है।

 

 

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  1. R
    RAMKRISHAN
    Aug 15, 2017 at 4:23 am
    प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना तो बीमा कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए ही शुरू की गयी थी l योजना का नाम प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना और अब केंद्रीय सरकार कह रही है के यह तो राज्य सरकारों को देखना है . चलो कोई बात नहीं जिनके लिए प्रधान मंत्री जी काम कर रहें हैं उनको तो फायदा हो रहा है .किसान तो भगवान को दोष देकर २-४ दिन रो कर चुप हो जायेगा
    (2)(0)
    Reply
    सबरंग