June 26, 2017

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आधार के औचित्य पर सवाल

महज एक संख्या कैसे हमारी जिंदगी पर असर डाल सकती है, आधार कार्ड ने यह साबित कर दिया है।

देश में एक अरब लोगों के आधार कार्ड बन चुके हैं।

महज एक संख्या कैसे हमारी जिंदगी पर असर डाल सकती है, आधार कार्ड ने यह साबित कर दिया है। देश के नागरिक के तौर पर लोगों के पास इससे पहले भी कई पहचान पत्र हैं, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट आदि, लेकिन कभी इनमें से किसी का आम लोगों के जीवन पर इतना दबदबा नहीं रहा। इधर कुछ वर्षों से लोग पसोपेश में हैं कि वे आधार संख्या को आखिर जरूरी क्यों मानें, पर सरकार ने धीरे-धीरे तमाम फर्जी पहचानों को खत्म करने के उद्देश्य से इसे तकरीबन हर चीज में अनिवार्य कर दिया है। सरकार की मानें तो आधार संख्या हमारी जिंदगी में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है, पर इधर जिस तरह इसमें दर्ज करोड़ों लोगों की निजी जानकारियां लीक हुई हैं, सवाल उठ रहा है कि कहीं सरकार बदलाव का यह काम हमारी निजता में खलल डालने की कीमत पर तो नहीं कर रही है।  आज स्थिति यह है कि देश भर में चलाई जा रही बारह सौ जनकल्याण योजनाओं में पांच सौ से ज्यादा में आधार की जरूरत पड़ने लगी है। इसे मिड-डे मील, मोबाइल फोन, बैंक खाते, टैक्स फाइलिंग, स्कॉलरशिप, पेंशन, राशन, स्कूल एडमिशन और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों समेत कई और चीजों से जोड़ने की कोशिश चल रही है। पिछले दिनों नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के खाताधारकों से भी अपनी आधार संख्या जोड़ने को कहा गया। माना जाता है कि देश की नब्बे फीसद आबादी पिछले आठ वर्षों में आधार कार्ड के लिए अपनी अंगुलियों के निशान और आंखों की पुतलियों की छाप सरकार को मुहैया करा चुकी है। इसके बदले इन लोगों को बारह अंकों की विशिष्ट संख्या दी गई है, जिससे जुड़ी निजी जानकारियां देश के बायोमीट्रिक डाटा केंद्रों में बेहद सुरक्षित रखी गई हैं। यह देखते हुए कि अभी देश में सिर्फ साढ़े छह करोड़ लोगों के पास पासपोर्ट है और बीस करोड़ लोग ही ड्राइविंग लाइसेंसधारी हैं, आधार के रूप में एक अरब लोगों के पास अपनी पुख्ता पहचान होना एक राहत भरी बात है।

सरकारी दायरे से बाहर बैंक और कई प्राइवेट कंपनियां भी अपने उपभोक्ताओं के सत्यापन के लिए आधार का इस्तेमाल करने लगी हैं। दावा है कि इस वक्त देश में तेईस करोड़ लोगों से ज्यादा को आधार संख्या के जरिए जनकल्याण योजनाओं का फायदा मिल रहा है, लेकिन इस जानकारी पर जगा हमारा सारा उत्साह तब ठंडा पड़ गया, जब हाल में पता चला कि करीब साढ़े तेरह करोड़ लोगों के आधार नंबर और पेंशन पाने और मनरेगा में काम करने वाले दस करोड़ लोगों के बैंक खातों की जानकारी आॅनलाइन लीक हो चुकी है। यानी जितने लोग आधार के लाभार्थी बताए जा रहे हैं, करीब उतने ही लोगों की निजी जानकारियों पर डाका पड़ चुका है। सेंटर फॉर इंटरनेट ऐंड सोसायटी द्वारा जारी रिपोर्ट पर सरकार ने सफाई दी कि ये जानकारियां यूएआईडीए (आधार जारी करने वाले संगठन) से लीक नहीं हुर्इं, इसलिए ज्यादा खतरा नहीं है। पर यह तर्क कइयों के गले नहीं उतर रहा। 22 अप्रैल को जब झारखंड से खबर आई कि राज्य सरकार की लापरवाही से प्रदेश के चौदह लाख से अधिक लोगों का आधार डाटा सार्वजनिक हो गया, जिनमें मशहूर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी और उनका परिवार भी शामिल है, तो उनकी पत्नी साक्षी धोनी ने इस पर सवाल उठाया। तब केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आश्वस्त किया कि आइंदा ऐसा नहीं होगा। झारखंड सरकार ने वेबसाइट से आधार नंबर इनक्रिप्ट (कूटभाषा में) कर दिया। लेकिन इसके पंद्रह दिनों के भीतर करोड़ों आधार नंबर धारकों की जानकारियों की लीकेज से साफ हो गया कि सुरक्षा के दावे कितने कमजोर हैं।

सवाल है कि इस लीक का जिम्मेदार कौन है और अब इसकी गारंटी क्या है कि आइंदा ऐसा नहीं होगा। इसके अलावा, क्या ऐसी लीकेज के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को दंडित किया जाएगा, क्योंकि आधार कानून-2016 के मुताबिक आधार से जुड़ी कोई भी जानकारी- जैसे नाम, जन्म तिथि, पता आदि सार्वजनिक करना अपराध है। ध्यान रहे कि लीक हुई ये जानकारियां आॅनलाइन सर्च करने पर आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं और जो जैसे चाहे इन जानकारियों का इस्तेमाल कर सकता है। ऐसे में जब सरकार आधार कार्ड को हर चीज से जोड़ने पर आमादा है, सवाल है कि क्या उसे इसकी जिम्मेदारी नहीं लेनी चाहिए कि चाहे जो हो जाए, आधार कार्ड की निजी जानकारी सिर्फ उसके धारक तक सीमित रहेगी। अगर वह ऐसा नहीं कर सकती, तो आधार कार्ड का औचित्य साबित करना मुश्किल होगा। अदालतें लगातार इसके क्रियान्वयन से जुड़ी विसंगतियों को देखते हुए इसकी अनिवार्यता को कठघरे में खड़ा कर रही हैं। उनका निर्देश है कि इसकी वजह से किसी व्यक्ति को सरकारी लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता, पर सरकार किसी न किसी बहाने इसे हर चीज से जोड़ने पर उतारू है। उसकी दलील है कि आधार के क्रियान्वयन से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और सरकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा। मगर क्रियान्वयन की दिक्कतों, बायोमैट्रिक डाटा की सुरक्षा और जनता की निजता के मौलिक अधिकारों की रक्षा किए बगैर आखिर कैसे लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है? क्या यह कम बड़ा अपराध है कि किसी खामी के चलते व्यक्ति के आधार कार्ड पर दर्ज निजी जानकारी लीक हो जाए और गलत हाथों में पड़ जाए!

केंद्र सरकार ने 2009 में आधार कार्ड बनाने की परियोजना शुरू की थी। अब तक एक सौ तेरह करोड़ लोगों का आधार कार्ड बनाया जा चुका है। इनमें से बहुत सारे लोगों की निजी जानकारियां लीक होकर उनका बेजा फायदा उठाने वालों तक पहुंच चुकी हैं। आखिर सरकार हर नागरिक की जानकारी जुटा कर ऐसे डाटाबेस में क्यों डाल देना चाहती है, जिससे पता चले कि उसने कब और कहां कितने की खरीदारी की, कब रेल-बस-फ्लाइट की टिकट बुक कराई, उसका मोबाइल कब कहां था और असल में वह उस वक्त कहां था- जब सरकार उसकी जानकारी लेना चाहती थी। आधार कानून के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति, संस्था, एजेंसी किसी नागरिक के आधार कार्ड की जानकारी मांगे तो बायोमैट्रिक्स (यानी उंगलियों, अंगूठे और पुतलियों की छाप) के अलावा अन्य जानकारियां पैसा लेकर दे सकती है। लेकिन लीकेज में तो करोड़ों लोगों की बायोमैट्रिक्स पहचानें भी यहां से वहां चली गई हैं।
वैसे आधार जैसी चीजें अमेरिका में भी हैं, वहां नागरिकों को पेंशन की सुविधा के लिए ‘सोशल सिक्योरिटी नंबर’ दिया जाता है और फिर उसे अन्य सुविधाओं से जोड़ा जाता है। पर अमेरिकी कानून सुनिश्चित करता है कि उस नंबर को कौन मांग सकता है और उसका क्या उपयोग होगा। मगर आधार कार्ड में सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।

आज जिस तरह बैंक खाता खोलने से लेकर बैंकिंग का सारा कामकाज घर बैठे कराने के लिए उपभोक्ताओं को इंटरनेट से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं और उससे सुविधा के साथ-साथ कई मुसीबतें भी पैदा हुई हैं। कभी नेट बैंकिंग के पासवर्ड और एटीएम के पिन चुरा कर ग्राहकों के खातों से पैसा गायब हो जाता है या बिना उनकी जानकारी के भारी-भरकम खरीदारी हो जाती है तो कभी एटीएम कार्ड की क्लोनिंग से रकम निकाल ली जाती है। उसी तरह आधार कार्ड भी मुसीबत का कार्ड बनता जा रहा है। चूंकि अभी साइबर हैकिंग से संबंधित अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क और कानूनों की कमी है, इसलिए लगता नहीं कि इन सूचनाओं को फिलहाल लीकेज से पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

 

 

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First Published on May 18, 2017 5:12 am

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