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बेबाक बोलः कल और आज- आप की कथनी-करनी

अगर यही हाल रहा तो भारत के राजनीतिक इतिहास में केजरीवाल साहब का नाम भी ‘एक चुनाव का करामाती (वन इलेक्शन वंडर)’ श्रेणी में ही चला जाएगा।
दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल)

जिस शहर में दो साल पहले आम आदमी पार्टी को एकतरफा जीत मिली थी, वहीं अप्रैल 2017 में उसके उम्मीदवार को महज दस हजार वोट मिले। दो साल पहले ‘आप’ की जीत ऐतिहासिक थी तो उपचुनाव में सत्ताधारी पार्टी की जमानत जब्ती को भी ऐतिहासिक ही माना जा सकता है। पिछली बार राजौरी गार्डन से जीते ‘आप’ उम्मीदवार जरनैल सिंह की खासियत सिर्फ पी चिंदबरम पर जूता उछालना थी। कांग्रेस से क्रुद्ध जनता ने आपको चुन तो लिया लेकिन जूता उछालने के बाद आपने क्या किया? अरविंद केजरीवाल के जुमलों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई उन्हें जनता के बीच बेसाख कर रही है। अगर यही हाल रहा तो भारत के राजनीतिक इतिहास में केजरीवाल साहब का नाम भी ‘एक चुनाव का करामाती (वन इलेक्शन वंडर)’ श्रेणी में ही चला जाएगा। आम आदमी पार्टी के कल और आज पर इस बार का बेबाक बोल।

साल 2011, जगह रामलीला मैदान। भारत के नक्शे के साथ भारत माता के जयकारे, वंदे मातरम् की धुन। पानी की रेहड़ी वाले बिना पैसे लिए लोगों को पानी पिला रहे थे, आइसक्रीम वाले कल क्या खाएंगे इसकी परवाह छोड़ मां-बाप के साथ आए मुझे चाहिए स्वराज की टोपी पहने बच्चों को आइस्क्रीम खिला रहे थे। आखिर क्यों? इन आम लोगों को उम्मीद थी कि मंच पर खड़ा यह आदमी जिस बहादुरी से कांग्रेस के भ्रष्टाचार पर सवाल उठा रहा है, अंबानी से हिसाब मांग रहा है, अगर हमारी अगुआई करेगा तो हमें इंसाफ मिलेगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ ईमानदारी की बातें जितनी बार केजरीवाल के मंचों से बोली गर्इं लोगों को उनमें कांग्रेस और भाजपा के इतर एक विकल्प दिखा जो आम आदमी की बात करेगा।
आम लोगों ने ऐसा भरोसा किया कि 2012 में आम आदमी पार्टी का गठन भी हो गया और 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में यह 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनी, पर चली महज 49 दिन। दूसरा मौका दिल्ली की जनता ने 2015 में ‘आप’ को दिया 70 में से 67 सीटें देकर। प्रचंड बहुमत से आप की सरकार बनी। गाजियाबाद के कौशांबी से निकलने वाली वैगनआर में बैठे मुख्यमंत्री नए समय की कहानी रच रहे थे। सैंडल, मफलर की पहचान वाला मुख्यमंत्री, खांसता हुआ बच्चों के सिर की कसम खाता एक आम इंसान। बदलाव की उम्मीद का चेहरा बन गया।

साल 2017 में शुंगलू समिति की रिपोर्ट आती है। इस रिपोर्ट के आने के पहले ही बहुत से सपने टूट चुके थे। जिस आम इंसान ने अपनी वैगनआर केजरीवाल को दी वह इंसान और वैगनआर दोनों केजरीवाल से दूर हो गए। स्वराज और लोकपाल को रट्टू तोते की तरह रटने वाली आम आदमी पार्टी सिर्फ एक व्यक्ति अरिवंद केजरीवाल पर केंद्रित हो गई। शांति भूषण, योगेंद्र यादव जैसे चेहरे बाहर कर दिए क्योंकि इन्होंने केजरीवाल पर सवाल उठाए। अपने ऊपर ऊंगली उठाने वाले हर व्यक्ति को बेईमान घोषित कर दिया गया। दिल्ली सचिवालय से लेकर सरकार की हर पहुंच से मीडिया को दूर कर दिया गया। गली-मोहल्लों से लेकर अखबारों तक अभूतपूर्व विज्ञापनों का दौर चला। अंग्रेजी की एक मशहूर कहावत का लब्बोलुआब यह है कि ईमानदारी तो सिर्फ अवसर न मिलने भर का मामला है। जब आपके पास सरकारी खजाना नहीं था, हाथों में बंगले की चाबी नहीं थी, तबादलों और तैनातियों के अधिकार नहीं थे, तब आप ईमानदारी की माला जप भ्रष्टाचार के खिलाफ आहूति दे रहे थे। रामलीला मैदान में जिस लाल बत्ती, बंगले पर सबसे ज्यादा कटाक्ष होते थे विधानसभा पहुंचते ही उसे पाने की जंग शुरू कर दी गई।

ईमानदारी के साथ ही आपने नैतिकता और शुचिता का जो मंत्रोच्चार किया था, उसकी प्रतिध्वनि अभी भी गूंज रही है जो आपके कर्मों से कहीं भी मेल नहीं खाती है। सत्ता में आते ही आपके आधे से ज्यादा विधायकों पर मामले दर्ज हो गए। कुछ मंत्रियों पर तो यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप भी लगे। लेकिन, आपने पार्टी के स्तर पर किसी पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। कानून के गहरे शिकंजे में फंस जाने के कारण आपको संदीप कुमार के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी। भारतीय कानून आपके नेता के जिस कृत्य को अपराध मान रहा था, ‘आप’ के प्रवक्ता उस काम को महात्मा गांधी के साथ जोड़ने में जुट गए। कभी एक सांस में धाराप्रवाह सभी खबरों को एक साथ बोल देने वाले आशुतोष जैसे बिना रुके गांधी और संदीप कुमार को एक खांचे में रख रह थे, वह नैतिकता का नया पाठ रच रहा था।

आपकी नैतिकता के पाठ से तो भगत सिंह की आत्मा भी रो पड़ी होगी। बसंती पगड़ी, भगत सिंह जैसी दाढ़ी रख भगत सिंह की समाधि पर जाने वाले भगवंत मान टीवी चैनलों पर तो बस क्रांति ही ला दिया करते थे। लेकिन आरोप है कि संसद भवन में शराब के नशे में आते हैं और अपने मोबाइल कैमरे में संसद भवन की सुरक्षा का हाल रिकार्ड कर साझा करते हैं। पंजाब में ‘आप’ नशे को मुद्दा बनाती है और ‘आप’ की सार्वजनिक सभा में लड़खड़ा कर झूमते हुए मान ने लोगों को जो संदेश दिया, लोगों ने उसे वोटों में बदल दिया। खोट ‘आप’ में आई और ‘आप’ ने ईवीएम पर हल्ला बोल दिया।

मोहल्ला क्लीनिक के साथ स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी के जुड़ने पर तो हंगामा बरपा ही लेकिन शुंगलू समिति ने इस नियुक्ति पर अवैध होने का ठप्पा लगा दिया। सितंबर 2016 में तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग द्वारा केजरीवाल सरकार के फैसलों की समीक्षा के लिए गठित शुंगलू समिति ने सरकार के 440 फैसलों से जुड़ी फाइलें खंगाली। केजरीवाल के रिश्तेदार निकुंज अग्रवाल और रोशन शंकर जैसी नियुक्तियों पर सवाल उठे। आरोप है कि सरकार की सालगिरह पर अरविंद केजरीवाल ने अपने आवास पर दो दिनों में 80 मेहमानों को भोजन कराने में 11,04,357 रुपए खर्च किए जो अपने आप में सरकारी मेहमाननवाजी का रेकार्ड है। जब आपको भी ऐसे ही कीर्तिमान स्थापित करने थे तो अंबानी की मान-हानि करने की क्या जरूरत थी।

शुंगलू समिति ने आरोप लगाए हैं कि दूसरी बार सत्ता में आने के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने संविधान और अन्य कानूनों में वर्णित दिल्ली सरकार की विधायी शक्तियों को नजरअंदाज किया। इसके साथ ही ‘आप’ नेताओं को आबंटित आवास पर सवाल उठाते हुए कहा कि 226 राउज एवेन्यू स्थित बंगले को पार्टी दफ्तर के लिए आबंटित कर दिया गया। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल और विधायक अखिलेश त्रिपाठी को भी गलत तरीके से टाइप पांच बंगला आबंटित कर दिया गया।
कांग्रेस और भाजपा के आम जनता विरोधी फैसलों पर चीखने वाले ‘आप’ के अगुआ ने दिल्ली की जनता के पैसे का इस्तेमाल पंजाब और गोवा में पार्टी के प्रचार के लिए किया। दिल्ली के 29 करोड़ रुपए दूसरे राज्यों में दिए विज्ञापन के कारण नियंत्रण व महालेखा परीक्षक (सीएजी) भी आप सरकार को कठघरे में रख चुकी है और उपराज्यपाल बैजल ने कहा कि ये पैसे आम आदमी पार्टी से वसूले जाएं।

पिछले दो सालों से प्रचंड गर्मी बीतते ही दिल्ली के लोग मच्छर की मौत मरने लगते हैं, राजधानी आइसीयू में तब्दील हो जाती है। अदालती फटकार के बाद दिल्ली सरकार कुछ धुएं छोड़ने का काम करती है। प्रदूषण का स्तर ऐसे चरम पर पहुंचा कि दिल्ली में सांस लेना ही जानलेवा हो गया। आप के कार्यकाल में ज्यादा समय तक दिल्ली कचरे का ढेर बनी रही। और, दिल्ली को इस हाल में छोड़ आप का पूरा अमला पंजाब और गोवा को सपने दिखाने चला गया। रेहड़ी-पटरी वाले, आॅटोरिक्शा वाले अपनी दिन भर की कमाई छोड़ जिनका साथ देने के लिए रामलीला मैदान पहुंचते थे आज उनकी सत्ता और सुविधाओं की भूख की लीला देख विकल्प पर से तो भरोसा खो ही चुके हैं। अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के बदले रूप ने भारतीय परिदृश्य में विकल्प की राजनीति को ही खारिज कर दिया है। आप सिर्फ मौका नहीं मिलने तक ही विकल्प थे। सत्ता और खजाना मिलते ही आप में और अन्य परंपरागत दलों में कोई अंतर न रहा।

शुंगलू समिति की रिपोर्ट आने के बाद अण्णा हजारे ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने सपना तोड़ दिया। यह सपना सिर्फ अण्णा का ही नहीं टूटा है बल्कि जंतर मंतर पर बैठने वाले उस चाय बनाने वाले का भी टूटा है जो 2013 में अपने खोमचे के पास रखी झाड़ू को बड़ी उम्मीद से देखता था, दुकान खोलते वक्त बोहनी के पहले अपने नकदबक्से के साथ झाड़ू को भी प्रणाम करने लगा था। आज 2017 में उसे अहसास हो गया कि यह झाड़ू सिर्फ उसकी दुकान के हिस्से की सफाई के काम ही आनी है, उसकी जिंदगी नहीं बदलने वाली। दूसरों की जिंदगी बदलने का भरोसा दिलाने वाले जब खुद इतनी जल्दी बदल जाएं तो वह समाज और सपनों के लिए बहुत खतरनाक होता है।

राजनीतिक दलों को चंदे देने के कानून और सूचना का अधिकार कानून में बदलाव के कदम उठ चुके हैं और सड़कों पर किसी तरह का प्रदर्शन नहीं है। भाजपा के झंडाबरदार तो मोदी के जयकारे के साथ उन्हें लोकपाल मानते हैं लेकिन अरविंद केजरीवाल तो जनलोकपाल को कब का भूल चुके हैं। वहीं ऐन निगम चुनावों के वक्त शुंगलू समिति की रिपोर्ट सामने लाने पर भी सवाल उठे। इन सवालों की परिधि में ‘तू भी चोर और मैं भी चोर’ वाले खेल के साथ भ्रष्टाचार के मुद्दे और ईमानदारी के जयकारे दफन कर दिए गए हैं। पहरेदारी करने का दावा करनेवाले सेंधमारी में जुट चुके हैं और जनता उसी ठहरी हुई नाउम्मीदी के दौर में है कि सब एक जैसे हैं।

गोवा और पंजाब में खर्च हुए विज्ञापन के पैसों की आम आदमी पार्टी से वसूली हो पाएगी या नहीं यह तो वक्त की बात है लेकिन जनता ने भरोसा तोड़ने की वसूली कर ली है। राजौरी गार्डन के जनता से किए वादों को भुला जरनैल सिंह को पंजाब भेज दिया गया था। इस सीट से प्रचंड जीत दिलाने वाली जनता ने ‘आप’ के उम्मीदवार को तीसरे नंबर पर धकेल दिया। कल जनता ने ‘आप’ को कांग्रेस और भाजपा का विकल्प बनाया था, आज उसी जनता का इशारा है कि निगम चुनावों में आमने-सामने कांग्रेस और भाजपा होगी क्योंकि ‘आप’ ने विकल्प की जमानत जब्त करा दी है।

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  1. A
    Anurag
    Apr 15, 2017 at 9:50 am
    Utterly biased!
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग