December 08, 2016

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आपदा जोखिम प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ाई जाए: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा जोखिम कटौती के प्रयासों के नवीकरण की 10 सूत्री कार्यसूची रेखांकित करते हुए गुरुवार को महिला वालंटियरों की शिरकत को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा जोखिम कटौती के प्रयासों के नवीकरण की 10 सूत्री कार्यसूची रेखांकित करते हुए गुरुवार को महिला वालंटियरों की शिरकत को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही सभी तरह की आपदाओं से निबटने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया में वृहद सामंजस्य लाने का आह्वान भी किया। मोदी ने यहां ‘आपदा जोखिम कटौती पर एशियाई मंत्रीस्तरीय सम्मेलन’ (एएमसीडीआरआर) का उद्घाटन करते हुए गरीब परिवारों से लेकर छोटे और मध्यम उपक्रमों व बहुराष्ट्रीय निगमों से लेकर राष्ट्र राज्यों तक सभी के लिए जोखिम कवरेज के लिए काम करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी विकास सेक्टरों को आपदा जोखिम प्रबंधन के उसूलों को आत्मसात करना चाहिए और महिलाओं की शिरकत व नेतृत्व को बढ़ावा देना चाहिए क्योंकि वे किसी आपदा में सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। आबादी के अनुपात में महिलाएं आपदाओं से बहुत ज्यादा प्रभावित होती हैं। उनके पास अनूठी ताकत और अंतर्दृष्टि होती है। हमें आपदा से प्रभावित महिलाओं की विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अवश्य ही बड़ी संख्या में महिला वालंटियरों को प्रशिक्षित करना चाहिए। उन्होंने कहा-हमें पुनर्निर्माण को समर्थन देने वाली महिला इंजीनियरों, राजमिस्त्रियों और भवन-निर्माण कारीगरों और आजीविका बहाली के लिए महिला स्व-सहायता समूहों की जरूरत है। वैश्विक स्तर पर जोखिम आकलन, आपदा जोखिम प्रबंधन प्रयासों की प्रभाव-क्षमता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग और सोशल मीडिया व मोबाइल प्रौद्योगिकी से मिले अवसरों के उपयोग पर जोर दिया जाना चाहिए।

 

मोदी ने स्थानीय क्षमता और पहल को आगे बढ़ाने, आपदाओं पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया में वृहद सामंजस्य लाने और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि किसी आपदा से सीख लेने का मौका नहीं गंवाया जाए। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर सुनामी पूर्वसूचना प्रणाली सक्रिय हो गई है और अपने आॅस्ट्रेलियाई व इंडोनेशियाई समकक्षों के साथ भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र के लिए क्षेत्रीय सुनामी बुलेटिन जारी करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि चक्रवातों की पूर्व सूचना प्रणाली में सुधार को लेकर भी यही स्थिति है। भारत में यदि हम 1999 और 2013 के चक्रवातों के प्रभाव की तुलना करें तो हम अब तक की गई प्रगति को देख सकते हैं। इससे चक्रवातों के कारण होने वाली मौतों में पर्याप्त कमी आई है। इसे एक उत्कृष्ट वैश्विक कार्य माना जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आपदा के जोखिम में कमी की जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन को बढ़ावा देने और सतत विकास में एक अहम भूमिका है। इसलिए यह सम्मेलन प्रासंगिक हो गया है और उचित समय पर हो रहा है।

इस तीन दिवसीय सम्मेलन में एशिया और प्रशांत क्षेत्र के 61 देशों के 1100 प्रतिनिधि व 2900 घरेलू प्रतिनिधि शिरकत कर रहे हैं। यह बैठक एशियाई क्षेत्र में आपदा जोखिम को कम करने के लिए सेंदई मसविदे को लागू करने का मार्ग प्रशस्त करेगी और इसकी प्रगति का निरीक्षण करने के लिए एक पूरी प्रक्रिया भी तय करेगी। मोदी ने कहा कि पिछले दो दशकों में, विश्व खासतौर पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कई बदलाव हुए हैं और उनमें से अधिकतर सकारात्मक हैं।
उन्होंने कहा- हमारे क्षेत्र में कई देशों ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं का रूपांतरण किया है और वे वैश्विक आर्थिक विकास के इंजन बन गए हैं। हमारे करोड़ों लोग गरीबी से बाहर लाए जा चुके हैं। एशिया-प्रशांत क्षेत्र एक से ज्यादा तरीकों से वैश्विक नेतृत्वकर्ता रहा है। लेकिन हमें इस प्रगति को हमेशा के लिए तय नहीं मानना चाहिए। इसमें चुनौतियां भी हैं। पिछले 20 साल में 850 हजार लोग एशिया-प्रशांत में आपदाओं में मारे गए हैं। आपदाओं के कारण होने वाली मौतों की संख्या के मामले में विश्व के शीर्ष 10 देशों में से सात देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हैं।


मोदी ने 2001 में गुजरात में आए भूकम्प से जुड़ा अपना निजी अनुभव भी साझा किया और कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने भूकम्प के बाद उबरने में सहयोग देने के लिए लोगों के साथ मिलकर काम किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के समक्ष मौजूद बड़ी चुनौतियां तेज शहरीकरण है और शायद एक दशक के भीतर ही क्षेत्र में गांवों की तुलना में शहर में रहने वालों की संख्या ज्यादा होगी। उन्होंने कहा कि शहरीकरण के कारण छोटे इलाकों में लोगों, संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों की संख्या अत्यधिक बढ़ जाने से आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौतियां पैदा हो जाएंगी। इनमें से अधिकतर इलाके आपदा के लिहाज से संवेदनशील इलाकों में हैं। यदि हम नियोजन व क्रियान्वयन दोनों के संदर्भ में इस वृद्धि का प्रबंधन नहीं करते हैं तो आपदाओं के कारण आर्थिक व मानवीय नुकसानों का खतरा पहले से कहीं ज्यादा हो जाएगा।

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First Published on November 4, 2016 3:14 am

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