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चुनावी चिंता को लेकर वसुंधरा की सांसदों को नसीहत

राजस्थान में चुनावों में भले ही अभी दो साल से ज्यादा का समय हो पर भाजपा को चिंता सताने लग गई है।
सीएम वसुधंरा राजे

राजस्थान में चुनावों में भले ही अभी दो साल से ज्यादा का समय हो पर भाजपा को चिंता सताने लग गई है। प्रदेश में शासन का आधा कार्यकाल पूरा कर चुकी भाजपा अब अगले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तैयारी में लग गई है। प्रदेश के सांसदों की बैठक में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें अभी से चुनाव को ध्यान में रख कर अपने मुद्दे उठाने की सलाह दी है।

राज्य में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के दौरे के बाद मंत्रियों के समूह के दौरे के दौरान उभरी समस्याओं और पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी ने विधायकों के समूह बना कर उन्हें भी अलग-अलग इलाकों में दौड़ा दिया है। इन सबके दौरे में भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी और मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर जनता की नाखुशी के बाद भाजपा नेतृत्व सकते में आ गया है। इन सबके बाद यहां सांसदों की बैठक में भी चुनावों पर ही ज्यादा जोर दिया गया।

इस बैठक में भी सत्ता और संगठन के नेतृत्व का जोर विधानसभा और लोकसभा चुनावों को लेकर ही रहा। पार्टी अब इस कसरत में लग गई है कि किसी भी तरह से अगले चुनावों की रणनीति बनाई जाए। इसके लिए मौजूदा सांसद और विधायकों को ही जोर आजमाइश में लगा दिया गया है। इसके बावजूद पार्टी के आम कार्यकर्ता मान कर चल रहे है कि आधे से ज्यादा विधायकों और सांसदों को पार्टी दोबारा मैदान में नहीं उतारेगी। पार्टी ने सांसदों और विधायकों को ज्यादा से ज्यादा अपने इलाके और कार्यकर्ताओं पर पकड़ बनाने की नसीहत दी है।

सांसदों की बैठक में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने विधायकों और सांसदों के बीच बढ़ रही गुटबाजी पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सांसदों को अपने क्षेत्र के विधायकों के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करना चाहिए। विकास के लिए एक दूसरे का सहयोग और समर्पित टीम जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने सांसदों को प्रदेश के लंबित मुद्दों को हल करवाने पर जोर दिया। उन्होंने सांसदों को नसीहत दी कि अपने कोष का पैसा कार्यकर्ताओं की सलाह पर ही खर्च करें।

उन्हें संसद में सक्रिय रहने और अपने इलाके के ज्यादा से ज्यादा मुद्दे उठाने व जनता से सीधा जुड़ाव रखने और उससे निरंतर संवाद रखने को कहा गया। केंद्र की सभी योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ अपने इलाके की जनता को दिलवाने की कोशिश करने को भी कहा गया। इस बैठक में केंद्र में नए बने मंत्रियों का भी स्वागत किया गया। बैठक में दो नए केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी और पीपी चौधरी ही आए। दूसरे मंत्रियों ने अन्य कारणों से बैठक में गैरहाजिर रहने की अनुमति ले ली थी।

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