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केरल के इस गांव में है दुनिया का पहला ई-टॉयलेट जो अवशेष से पैदा करता है बिजली और खाद

इस अनोखे मॉडल के जरिए टॉयलेट से पैदा होने वाले अवशेष के प्रयोग को लेकर क्रांतिकारी बदलाव आ सकते हैं।

एक और जहां देश में शौचालय और स्वच्छता को लेकर कई अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं केरल के एक गांव में दुनिया का पहला ई-टॉयलेट (e-toilet) बनाया गया है। इस अनोखे मॉडल के जरिए टॉयलेट से पैदा होने वाले अवशेष के प्रयोग को लेकर क्रांतिकारी बदलाव आ सकते हैं।

तिरुवनंतपुरम जिले में स्थित पुल्लूविला नाम के गांव में दुनिया का पहला ई-टॉयलेट है , जो टॉयलेट के अवशेष से खाद और बिजली तो पैदा करता ही है, साथ ही पीने योग्य पानी भी बनाता है। इस क्रांतीकारी मॉडल को बनाने का काम किया है यहां की स्थानीय संस्था ईराम साइंटिफिक सॉल्यूशन और मलिंदा गेट्स फाउंडेशन ग्रांट ने।

इस ई-टॉयलेट में इलेक्ट्रॉनिक, मकैनिकल और वेब-मोबाइल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल टॉयलेट की इंट्री, यूज, सफाई और रिमोट मोनिटरिंग के लिए किया गया है। यहां बॉक्स में रखी एक मशीन (NEWGen) के जरिए पानी को रीसाइकल और ऊर्जा उत्पादन का काम किया जाता है, इस तरह कचरे को भी प्रॉफिट में बदला जा रहा है।

ईराम कंपनी के सीईओ अनवर सादथ ने बताया, ” टॉयलेट से आने वाले गंदे पानी को रिसाइकल किया जाता है, जिसके इस्तेमाल फिर से फ्लशिंग के रूप में होता है। वहीं सॉलिड कचरे को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम बनाई जाती है, जिससे खाद पैदा होता है। अवशेष से निकलने वाली गैस को मिथेन में बदला जाता है और उसके इस्तेमाल आग के रूप में होता है।”

इस ई-टॉयलेट में और भी कई सुविधाए हैं। सिक्का डालने पर इसके गेट खुलता है और खुद ही लाइट जल जाती है। यह टॉयलेट इस्तेमाल कर रहे व्यक्ति को ऑडियो के जरिए जरूरी निर्देश भी देता है। 3 मिनट के इस्तेमाल के बाद यह खुद ही 1.5 लीटर पानी फ्लश करता है और ज्यादा देर होने पर 4.5 लीटर पानी का प्रयोग करता है।

 

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