December 11, 2016

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बंद कर दिए गए बड़े पुराने नोट से अर्थव्यवस्था की पारदर्शिता हो रही थी प्रभावित: रविशंकर प्रसाद

पांच सौ और 1000 रुपए के बड़े नोटों का चलन बंद करने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा कालेधन के खिलाफ लड़ाई में उठाए गए कदमों का अगला स्वभाविक कदम करार देते हुए एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने आज कहा...

Author नई दिल्ली | November 18, 2016 23:42 pm

पांच सौ और 1000 रुपए के बड़े नोटों का चलन बंद करने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा कालेधन के खिलाफ लड़ाई में उठाए गए कदमों का अगला स्वभाविक कदम करार देते हुए एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने आज कहा कि चलन से बंद कर दिए गए ये नोट भारतीय अर्थव्यवस्था की पारदर्शिता को प्रभावित कर रहे थे। केंंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यहां सीबीआई की मेजबानी में आयोजित भ्रष्टाचार निरोधक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम परिवर्तनकारी पासा पलटने वाला कदम है।

उन्होंने कहा, ‘500 और 1000 रुपए के पुराने नोटों का चलन बंद करने के हमारी सरकार के वर्तमान फैसले पर बहस हो रही है लेकिन, हमारी सरकार ने इन सालों में जो तरीका अपनाया है, उसपर यदि आप गौर करेंगे तो आप पाएंगे कि यह इस सवाल के सिलसिले में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा की गयी पहलों का अगला स्वभाविक कदम है ……500 और 1000 रुपए को हटाने का यह फैसला क्यों…… यह बड़ा सरल जवाब है।’

उन्होंने कहा, ‘भारत की जीडीपी का 15 प्रतिशत नकद है जो अन्य देशों के विपरीत बहुत ही ज्यादा है। उस 15 फीसदी में से 85-86 फीसदी 500 और 1000 रुपए के नोटों में है। हम नहीं कहते है कि हर भारतीय भ्रष्ट है, बिल्कुल नहीं। यह नहीं कहते हैं कि हर नकद गलत है। लेकिन एक कठोर तथ्य यह है कि 500 और 1000 रच्च्पये नोटों की इतनी बड़ी संख्या अर्थव्यवस्था की शुचिता, उपयुक्तता और पारदर्शिता को प्रभावित कर रही है। प्रसाद ने कहा कि सरकार ने कालेधन पर विशेष जांच दल, कर संधियों पर फिर से बातचीत करना, बेनामी लेन-देन कानून , एकबारगी कालाधन अनुपालन सुविधा जैसे कदम उठाए हैं।

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First Published on November 18, 2016 11:41 pm

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