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राजस्थान और हरियाणा में होगी ‘सरस्वती नदी’ की तलाश

राजस्थान और हरियाणा में विलुप्त मानी जाने वाली सरस्वती नदी के अस्तित्व, उसके बहाव मार्ग, आकार, विलुप्त होने के कारणों और नदी को पुनर्जीवित करने की पहल की जा रही है।
Author नई दिल्ली | October 18, 2016 03:37 am

राजस्थान और हरियाणा में विलुप्त मानी जाने वाली सरस्वती नदी के अस्तित्व, उसके बहाव मार्ग, आकार, विलुप्त होने के कारणों और नदी को पुनर्जीवित करने की पहल की जा रही है। कुछ ही दिन पहले उत्तर-पश्चिम भारत के जीवाश्व चैनल पर विशेषज्ञ समिति की समीक्षा और मूल्यांकन की रिपोर्ट जारी की गई। इस समिति का नेतृत्व भूवैज्ञानिक प्रो. केएस वालदिया कर रहे थे। यह रिपोर्ट राजस्थान, हरियाणा और पंजाब सहित उत्तर-पश्चिम भारत में जमीन की संरचना के अध्ययन पर आधारित है। इस अध्ययन में अतीत में हुए भूगर्भीय परिवर्तन का भी ख्याल रखा गया है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि यह रिपोर्ट इस धारणा की पुष्टि करती है कि सरस्वती नदी हिमालय के आदिबदरी से निकल कर कच्छ के रन से होती हुई अरब सागर में जाकर मिल जाती थी। एक समय यह उत्तर और पश्चिम के भारतीय प्रांतों की जीवन रेखा थी। इसके किनारे पर ही महाभारत से लेकर हड़प्पा जैसी संस्कृतियों का विकास हुआ था। राजस्थान सरकार ने सरस्वती नदी की खोज के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए चार साल का एक खाका तैयार किया था। केंद्र सरकार का इसके लिए करीब 70 करोड़ रुपए वित्तीय मदद देने का प्रस्ताव था, जिसे मंजूरी मिल गई। हरियाणा सरकार भी अपने यहां इस कार्य को आगे बढ़ा रही है।


राजस्थान सरकार के भूजल विभाग ने सरस्वती नदी के जीवाश्म नेटवर्क के पुनर्जीवन और उत्तर पश्चिम राजस्थान में भूजल संसाधनों की खोज के लिए अध्ययन कराने का विचार किया है। इस विषय पर एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी गई है। इस उद्देश्य के लिए 2015-16 से 2018-19 तक की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके लिए केंद्र सरकार से 68.67 करोड़ रुपए का वित्तीय अनुदान मांगा गया था।
राजस्थान की भूजल मंत्री किरण माहेवरी ने बताया कि सरस्वती नदी की खोज और इसके पुनर्जीवन के बारे में हमने एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र सरकार को भेज दी है। केंद्र से इसके लिए 70 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद मांगी गई थी, जिसकी मंजूरी मिल गई है। वहीं हरियाणा सरकार ने आदीबदरी हेरिटेज बोर्ड का गठन किया है। इसके तहत सरस्वती नदी के संभावित रास्तों पर नई नहर बनाने की योजना है। हरियाणा में इस सिलसिले में खुदाई घग्गर खाकरा नदी के इलाके में की जा रही है। माना जाता है कि कभी इस इलाके से सरस्वती नदी गुजरती थी।
सरस्वती नदी की प्रस्तावित खोज से जुड़ी रिपोर्ट में कहा गया है कि यह काम राजस्थान के पांच जिलों में किया जाएगा। इसकी लंबाई 543.36 किलोमीटर है। इसका मकसद पीने के पानी, सामाजिक आर्थिक विकास और समाज के अन्य उद्देश्यों विशेष तौर पर भारत पाकिस्तान सीमा पर तैनात भारतीय सेना के लिए के लिए भूजल संसाधनों की तलाश करना है। इसके तहत जीवाश्म के आधार पर नदी के जल स्रोत को पुनर्जीवित करने की संभावना तलाशी जाएगी।
प्रस्तावित खोज कार्य में वैदिक काल की नदी सरस्वती के बहाव मार्ग और उसके अस्तित्व से जुड़े आयामों को स्थापित करने का काम किया जाएगा। इसके तहत खुदाई करके भूगर्भीय तत्वों की आयु निर्धारित की जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि खोज का दायरा हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बारमेड़ जिले तक होगा।

प्रस्तावित परियोजना के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलाजी, रूड़की, आइसोटोफ तकनीकी का उपयोग करते हुए भूजल की आयु निर्धारित करेगी। अमदाबाद स्थित फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी रेडियो कार्बन डेटिंग तकनीकी के जरिए भूगर्भीय तत्वों और खुदाई में निकले तत्वों की उम्र के बारे में सूचना प्रदान करेगी। रिजनल रिमोट सेंसिंग सेंटर जोधपुर जीआइएस आधारित सरस्वती सूचना प्रणाली तैयार करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, सरस्वती नदी के मार्ग पर 80 स्थानों पर खुदाई का काम किया जाएगा, जो करीब सात किलोमीटर के दायरे पर होगा। प्रस्तावित खुदाई का क्षेत्र जीआइएस डाटाबेस और सेटेलाइट चित्रों के आधार पर तय किया गया है। इसके तहत 40 पर्यवेक्षण कुंओं का निर्माण किया जाएगा ताकि भूजल निगरानी नेटवर्क को मजबूत बनाया जा सके।
इससे पहले राजस्थान सरकार के भूजल विभाग ने राजीव गांधी राष्ट्रीय पेयजल मिशन के तहत 1994 से 2002 के बीच सरस्वती नदी जीवाश्म अध्ययन कराया था। इसमें अमदाबाद स्थित स्पेश एप्लीकेशन सेंटर, फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी, मुंबई स्थित भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर, जोधपुर स्थित रिजनल रिमोट सेंसिंग सर्विस सेंटर जैसी एजंसियों ने हिस्सा लिया था।

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