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राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष बनाने के लिए वित्त मंत्रालय से बातचीत: प्रभु

राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष बनाने के लिए रेल मंत्रालय वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा कर रहा है और इसके लिए रेलवे ने 1.19 लाख करोड़ रुपए का एक प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा है।
Author August 4, 2016 02:17 am

राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष बनाने के लिए रेल मंत्रालय वित्त मंत्रालय के साथ चर्चा कर रहा है और इसके लिए रेलवे ने 1.19 लाख करोड़ रुपए का एक प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा है। इसके साथ ही मानव रहित रेलवे क्रासिंग को समाप्त करने के काम को प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बुधवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों के सवालों के जवाब में बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा कोष बनाने के लिए वित्त मंत्री के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने साथ ही सदस्यों को यह भी आश्वासन दिया कि ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए पटरियों के नवीकरण कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है।

देश में 31 मार्च 2015 को देश में कुल रेल पटरियों की लंबाई 117996 किलोमीटर होने की जानकारी देते हुए रेल मंत्री ने कहा कि पटरियों का नवीकरण एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि 119183 करोड़ रुपए की लागत से एक राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष बनाने का प्रस्ताव है जो सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए होगा और अगले पांच साल में इसे चालू किया जाएगा। इस संबंध में एक प्रस्ताव विचार के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा गया है।

प्रभु ने बताया कि इस कोष के तहत 44979 करोड़ रुपए सिविल इंजीनियरिंग संपदा के निर्माण पर खर्च किया जाएगा जिसमें पटरियों का नवीकरण, पुलों की मरम्मत आदि शामिल हैं। उन्होंने मानव रहित रेलवे क्रासिंग को ट्रेन हादसों का सबसे बड़ा कारण मानते हुए कहा कि ऐसे फाटकों को समाप्त करना रेलवे की प्राथमिकता में शामिल है। प्रभु ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशानुसार यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि ऐसे फाटकों को रेल ओवर ब्रिज या अंडर ब्रिज में बदल दिया जाए।

एक सवाल के जवाब में प्रभु ने कहा कि देश में भारतीय रेल के 28607 फाटक हैं जिसमें से 9340 बिना चौकीदार वाले हैं। कुंडा विश्वेश्वर रेड्डी को प्रभु ने बताया कि एक अप्रैल 2016 की स्थिति के अनुसार देश में 19267 फाटको पर चौकीदार तैनात हैं जबकि 9340 समपार बिना चौकीदार वाले हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलों में ऐसे बहुत कम स्थान हैं, जहां रेलपथ के दोनों ओर सड़के तो हैं परन्तु इन स्थानों पर कोई समपार या ग्रेड सेपरेटर नहीं हैं।

रेल मंत्री ने कहा कि मौजूद नीति के अनुसार संरक्षा को ध्यान में रखते हुए मौजूदा लाइन पर कोई नया समपार नहीं दिया गया है। बहरहाल, राज्य सरकार, स्थानीय प्राधिकारियों के अनुरोध पर रेलवे निक्षेप शर्तों पर उन स्थानों पर ऊपरी पुल और निचने पुलों के निर्माण कार्य को मंजूरी देती है, जहां पर समपार नहीं है। यह तकनीकी दृष्टि से व्यवहार्यता को ध्यान में रखते हुए की जाती है जिसका खर्च राज्य सरकार वहन करने को तैयार हो।

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