December 10, 2016

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उम्मीदों के खरीदारों की बाट जोह रहा प्रगति मैदान

राजधानी के प्रगति मैदान में चल रहे भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में भी नोटबंदी का खासा असर दिखाई दे रहा है। मेला स्थल में इन दिनों पहले जहां करीब साठ से अस्सी हजार दर्शक होते थे, वहीं मेले में बीस हजार से ज्यादा दर्शन भी मौजूद नहीं हैं।

Author नई दिल्ली | November 18, 2016 01:10 am

राजधानी के प्रगति मैदान में चल रहे भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में भी नोटबंदी का खासा असर दिखाई दे रहा है। मेला स्थल में इन दिनों पहले जहां करीब साठ से अस्सी हजार दर्शक होते थे, वहीं मेले में बीस हजार से ज्यादा दर्शन भी मौजूद नहीं हैं। दर्शकों के कम आने से विभिन्न पेवेलियनों में दूरदराज से आए व्यापारी निराश हैं। व्यापार मेले का गुरुवार को तीसरा दिन है। मेला शुरू होने के बाद पांच दिन सिर्फ व्यापारी दर्शकों के लिए खुला है। शनिवार 19 नवंबर से ये आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। व्यापार मेले का प्रारूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई घोषणाओं में डिजिटल इंडिया का है। इसके अलावा इस व्यापार मेले के जरिए भारत के व्यापार को बढ़ाकर आर्थिक तरक्की का ओर जाना है। मेले के जरिए विभिन्न सरकारी विभागों के कई निगम काफी समय से मेले की तैयारियों में लगे हुए थे। मेले में 24 देशों की 280 कंपनियां भागीदारी कर रहीं हैं। इनके अलावा देसी भागीदारी में 27 राज्य, 4 केंद्र शासित प्रदेश, केंद्रीय सरकार के मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, निर्यात संवर्धन परिषदें, वस्तु बोर्ड, वित्तीय संस्थाएं, गैर सरकारी संगठन इत्यादि विभागों की भागीदारी है। मेले में प्रर्दशकों सहित ग्रामीण मंत्रालय से जुड़े करीब 800 कारीगर और शिल्पकार भाग ले रहें हैं।

मेले में कुल करीब सात हजार प्रर्दशक भाग ले रहें हैं। मेले के शुरू होने से पहले ही प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा कर दी। मेले के आयोजकों को लगा कि यदि इस बार उन्होंने मेले की टिकटों की बिक्री की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की, तो दर्शक टिकट ही नहीं ले पाएंगे। लिहाजा पहली बार मेला आयोजकों ने व्यापार मेले की आनलाइन बिक्री शुरू करने का फैसला लिया है। मेला आयोजकों को उम्मीद थी कि उनके इस फैसले से दर्शक मेले में आना शुरू कर देंगे। लेकिन नई करेंसी की दिक्कत के कारण दो दिनों में दर्शकों की तादात काफी कम रही। प्रगति मैदान में व्यापार मेले में हर साल एटीएम की दो मोबाइल वैन की भी व्यवस्था की जाती थी। लेकिन इस बार नोटबंदी के कारण आयोजकों ने स्टेट बैंक से बात करके यहां 14 मोबाइल एटीएम वाहनों की व्यवस्था की गई है।

मेले में नहीं हो रहा व्यापार
पंजाब पेवेलियन में महिलाओं के सूट बेचने वाले सुखविंदर तीन दिनों की बिक्री से काफी निराश हैं। उन्होंने बताया कि वे मेले में करीब आठ साल से कपड़े की बिक्री के लिए आ रहें हैं। लेकिन इस बार जैसी निराशा उन्हें पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि व्यापारी दर्शक भी उनके सामानों की ठीकठाक बिक्री से शुरुआत कर देते थे।
पंजाब के करीब हिमाचल के पेवेलियन की भी लगभग यही स्थिति है। यहां लद्दाख से आर्इं निशा पिछले कई सालों से गर्म कपड़े बेचने आतीं हैं उन्होंने बताया कि स्टॉलों पर खरीददार नहीं है गुरुवार को तीसरा दिन है लेकिन उनकी बिक्री न के बराबर है। उन्होंने कहा हो सकता है मेला जब आम लोगों के लिए खुले तब उनकी बिक्री में भी इजाफा हो।
प्रगति मैदान में झील क्षेत्र पर हैंगर नंबर 27 पर सौंदर्य प्रसाधन सामग्री का सामान बेचने वाली एक कंपनी की सेल्सगर्ल रजनी ने कहा कि लोग पुराने नोटों पर सामान बेचने का आग्रह करते हैं। लेकिन उनकी कंपनी ने उन्हें नए नोट लेने या आनलाइन पेमेंट की अनुमति दी है।

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First Published on November 18, 2016 12:47 am

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