December 10, 2016

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प्रदूषण ने तोड़ा 17 सालों का रिकॉर्ड

दिवाली पर पटाखों के जहरीले धुएं ने दिल्ली में वायु प्रदूषण के 17 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पटाखों में जले रसायन काफी घातक प्रभाव छोड़ गए हैं।

दिवाली पर पटाखों के जहरीले धुएं ने दिल्ली में वायु प्रदूषण के 17 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पटाखों में जले रसायन काफी घातक प्रभाव छोड़ गए हैं। ऐसे में अब जरूरी हो गया है कि सरकार इसे गंभीरता से लेते हुए इमरजेंसी तौर पर इसके लिए जरूरी परामर्श जारी करे। बच्चों व बुजुर्गों को यथासंभव घरों में ही रखा जाए। बाहर बिना मास्क के निकलने से बचें। विज्ञान व पर्यावरण केंद्र (सीएसई) सहित कई अन्य संस्थाओं व स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अपने अध्ययन व आकलन देते हुए सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है।
दिवाली के बाद राजधानी में इतना धुआं, धूल व कुहासा छाया रहा कि दिन में भी गाड़ियों की हेडलाइट जलानी पड़ी। विज्ञान व पर्यावरण केंद्र ने दिल्ली मौसम विभाग के रपट के हवाले से कहा है कि दो नवंबर की रपट बताती है कि स्मॉग (धूल व धुआं मिला कुहरा) ने बीते 17 बरस के रेकार्ड तोड़ दिए हैं। सीएसई की कार्यकारी निदेशक (शोध) अनुमिता राय चौधरी ने कहा है कि अब हालात ऐसे हैं कि सरकार को तुरंत हालिया व दूरगामी परामर्श जारी करने के साथ त्वरित व स्थाई उपाय करने की दरकार है। हृदय व सांस की दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों के अलावा बच्चों को बचाने के लिए इमरजेंसी स्तर पर तुरंत उपाय करने की दरकार है। साथ ही सरकार को ऐसा निर्देश भी जारी करना चाहिए कि लोग ज्यादा बाहर न निकलें, घरों में ही रहे। धुएं की जगह पर व्यायाम न करें।


उन्होंने कहा कि दिवाली के दिन से भी ज्यादा प्रदूषण दिवाली के बाद देखा गया। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए राय चौधरी ने कहा कि दिवाली की रात के सूक्ष्म धूल कणों की तुलना में दो नवंबर की रात को छोटे धूल कणों (2.5पीएम) की मात्रा 62.7 फीसद अधिक थी। यह सामान्य से करीब साढ़े नौ गुणा अधिक रहा। इसी तरह से दिवाली के बाद की रात (एक नवंबर को) को रात 12 से सुबह छह बजे तक इसक ी मात्रा 548 माक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। इसके अगले दिन सूक्ष्म धूल कणों की मात्रा 696 माइक्रोग्राम और दोपहर के बाद यह बढ़ कर 800 से 900 माइक्र ोग्राम प्रतिघन मीटर रहा। सफर के आंकड़े बताते हैं कि पीएम 2.5 का स्तर घातक है जो अगले तीन दिनों तक यों ही बना रहने वाला हैं।

यहां तक कि दृश्यता का स्तर भी सबसे खराब रहा। इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर दो नवंबर को दृश्यता 300 से 400 मीटर रही जो 17 सालों में सबसे कम रही। सुबह 11 बजे से दोपहर बाद करीब ढाई बजे तक दृश्यता क ा स्तर बेहद खराब रहा। मौसम विज्ञानियों ने कहा है कि कुछ मौसमी कारकों व दिवाली के प्रदूषण ने मिल कर घातक मिश्रण बना दिया जिससे हालत ऐसे हो गए जो पहले कभी नहीं थे। प्रदूषण के स्तर का तापमान से सीधा संबंध है। तापमान घटने से इसके प्रदूषण के निचले वायुमंडल में जमा रहने की संभावना बढ़ जाती है और वही हुआ।

हार्ट केयर फाउंडेशन ने जारी आकलन में बताया कि दिवाली के पटाखों के अलावा पेट्रोल व गैस से निकलने वाले प्रदूषक बेंंजीन की मात्रा पर कोई बात ही नहीं हो रही है। जबकि बेंजीन न केवल पेट्रोलियम पदार्थ के जलने से निकलते हैं बल्कि पेट्रोल पंप पर हवा के साथ उड़ते हैं। फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉक्टर केके अग्रवाल ने बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ किए आकलन के मुताबिक आनंद विहार में बेंजीन की मात्रा 44.3 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर,पंजाबी बाग में 2.2, आरकेपुरम में 17, एअरपोर्ट पर 12.68 व सिविल लाइंस में 23.14 माइकोग्राम प्रति घनमीटर रही।

 

बेंजीन गर्भ में पल रहे बच्चों तक को घातक बीमारियों से घेर लेता है। यह कंैसर पैदा करने वाला प्रदूषक है। इससे भ्रूण के तंत्रिका तंत्र के विकास पर बुरा असर पड़ता है। वाहनों के चलने से तो यह प्रदूषण होता ही है, र्इंधन भरते समय उड़ कर यह हवा में घुल जाता है। फिर हवा से सांस के जरिए सीधे खून में घुल जाता है और घातक व स्थाई असर डालता है। जबकि इसे प्रदूषण के राष्ट्रीय इंडेक्स में शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सभी पेट्रोल पंपों पर बेंजीन के उत्सर्जन को रोकने के लिए कड़े उपाय किए जाएं। बेंजीन की मात्रा तय करने के मानक तय किए जाएं। ब्लू एअर के दक्षिण-पश्चिम एशियाई क्षेत्र के निदेशक गिरीश बापत ने कहा कि सेहत को लेकर त्वरित उपाय करने का समय आ गया है।

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First Published on November 4, 2016 12:55 am

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