December 02, 2016

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नोटबंदी के मुद्दे को लेकर मचा हंगामा, मोदी पर जमकर बरस रहा विपक्ष

प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने तथा इस फैसले से उत्पन्न हालात के चलते देश भर में जान गंवाने वाले 70 से अधिक लोगों को 10 ... 10 लाख रूपये का मुआवजा दिए जाने की मांग करते हुए हंगामा किया जिसके कारण राज्यसभा की बैठक आज एक बार के स्थगन के बाद ग्यारह बज कर करीब 35 मिनट पर दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

Author नई दिल्ली | November 22, 2016 13:26 pm

नोटबंदी के मुद्दे पर आज राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने तथा इस फैसले से उत्पन्न हालात के चलते देश भर में जान गंवाने वाले 70 से अधिक लोगों को 10 … 10 लाख रूपये का मुआवजा दिए जाने की मांग करते हुए हंगामा किया जिसके कारण राज्यसभा की बैठक आज एक बार के स्थगन के बाद ग्यारह बज कर करीब 35 मिनट पर दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
हंगामे के कारण उच्च सदन में आज भी शून्यकाल नहीं हो पाया। बैठक शुरू होने पर उप सभापति पी जे कुरियन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके तत्काल बाद जदयू के शरद यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भले ही नोटबंदी का फैसला देश के हित में लिया है लेकिन नोटबंदी के कारण उत्पन्न हालात के चलते देश भर में 70 से अधिक लोगों की जान चली गई है। सरकार की ओर से इन लोगों के परिजन को 10…10 लाख रूपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।

बसपा की मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री के फैसले से देश में आर्थिक आपातकाल की स्थिति बन गई है। देश की 90 फीसदी जनता बैंकों के आगे कतार में है। इन लोगों की तकलीफ देखना चाहिए और नोटबंदी के कारण उत्पन्न हालात के चलते अपनी जान गंवाने वाले 70 से अधिक लोगों के परिजन को मुआवजा दिया जाना चाहिए। सपा के नरेश अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री को सदन में आ कर हमारी बात तो सुनना चाहिए। चर्चा से पहले उन्हें सदन में बुलाया जाना चाहिए। इसी बीच संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि आसन को तत्काल नोटबंदी पर जारी चर्चा को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से यह भी कहा कि आपको हमारा पक्ष पहले सुनना होगा और फिर आप अपनी बात रखें। ‘‘यह नहीं होना चाहिए कि आप अपनी बात कहें और हमारी बात सुने बिना सदन से चले जाएं।’’

जब बैठक पुन: शुरू हुई तब सपा के नरेश अग्रवाल ने कहा ‘‘प्रधानमंत्री सदन में नहीं आएंगे, चर्चा नहीं सुनेंगे, जवाब नहीं देंगे, ऐसे में चर्चा कैसे शुरू की जा सकती है ?’’उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उप सभापति पी जे कुरियन ने कहा कि वह चर्चा में सबको बोलने का मौका देंगे। सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा ‘‘हम चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन प्रधानमंत्री सदन में जब आएंगे, चर्चा तब ही होगी।’ माकपा के सीताराम येचुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री को सदन में आ कर हमारा पक्ष सुनना चाहिए और चर्चा का जवाब देना चाहिए क्योंकि नोटबंदी का फैसला उनका ही है। नकवी ने विपक्षी सदस्यों पर बहाने करने और हर दिन नयी कहानी गढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा ‘‘आप चर्चा चाहते ही नहीं।’

इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के सदस्य प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने की मांग करते हुए आसन के समक्ष आ गए। उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर ‘‘आर्थिक आपातकाल’’ लिखा हुआ था। उनकी मांग का समर्थन करते हुए कांग्रेस और बसपा सदस्य भी आसन के सामने आ गए जबकि जदयू, सपा, वाम दलों के सदस्यों ने अपने स्थानों से ही प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने की मांग की। ्रदमुक और अन्ना्रदमुक के सदस्य अपने स्थानों पर खड़े रहे। भाजपा सदस्य आसन के समक्ष नहीं आए लेकिन अपनी जगह से आगे आ कर चर्चा की मांग करने लगे।
कुरियन ने कहा कि वह विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद का नियम 267 के तहत चर्चा के लिए दिया गया नोटिस स्वीकार करते हैं।
उन्होंने सदस्यों से अपने स्थानों पर जाने की अपील करते हुए कहा कि दोनों ही पक्ष चर्चा नहीं चाहते और सदन को बाधित कर रहे हैं। हंगामा थमते न देख उन्होंने 11 बज कर करीब 10 मिनट पर बैठक साढ़े ग्यारह बजे तक स्थगित कर दी।

भाजपा सदस्य इस पर विरोध जताते हुए अपने स्थानों से आगे आ गए। इस पर कुरियन ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के सदस्य क्यों व्यवधान डाल रहे हैं। सदन में मौजूद संसदीय कार्य राज्य मंत्री से उन्होंने पूछा ‘‘आपके लोग क्यों सदन में बाधा डाल रहे हैं। आपकी क्या शिकायत है ?’ नकवी ने कहा ‘‘यह सदस्य चाहते हैं कि नोटबंदी पर जो चर्चा शुरू की गई है उसे आगे बढ़ाया जाए। जो सदस्य बोलना चाहते हैं उन्हें मौका दिया जाए और जो नहीं बोलना चाहते उनके नाम निकाल दिए जाएं। हमारी शिकायत कुछ नहीं है। 16 नवंबर को संसद सत्र शुरू होने पर इस सदन में विपक्ष की मांग पर ही चर्चा शुरू हुई थी। विपक्ष के पास न तर्क है न तथ्य है। इसीलिए वह सदन नहीं चलने दे रहा है।’

आजाद ने कहा ‘‘प्रधानमंत्री बाहर बोलते हैं पर सदन में नहीं आते। उनके फैसले से उत्पन्न हालात की वजह से 70 से अधिक लोगों की जान गई है। विपक्ष चर्चा चाहता है लेकिन प्रधानमंत्री सदन में नहीं हैं। वह आएं तो हम तत्काल चर्चा शुरू कर देंगे। हम चाहते हैं कि वह हमारी बात सुनें। वह लोगों की तकलीफ क्यों नहीं सुनना चाहते।’ इस पर कुरियन ने कहा कि यह मुद्दा वित्त मंत्रालय से संबंधित है। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान सदस्य प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने की मांग उठा सकते हैं। इस पर विपक्षी सदस्यों ने ‘‘नहीं’’ कहा। तब कुरियन ने कहा ‘‘फिर मैं क्या कर सकता हूं। मैं प्रधानमंत्री को कैसे बुलाउंगा। ’

उनके यह कहने पर तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और बसपा सदस्य आसन के सामने आ कर प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे जबकि जदयू, सपा, वाम दलों के सदस्यों ने अपने स्थानों से ही प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने की मांग दोहराई। ्रदमुक और अन्ना्रदमुक के सदस्य अपने स्थानों पर खड़े रहे।

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First Published on November 22, 2016 1:26 pm

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