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AAP विधायकों ने चुनाव आयोग को नहीं दिया जवाब

चुनाव आयोग की ओर से दिए गए 17 अक्तूबर के अल्टीमेटम के बावजूद संसदीय सचिव बनाए गए आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने जवाब दाखिल नहीं किया।
Author नई दिल्ली | October 18, 2016 00:45 am
आप विधायक नितिन त्यागी

चुनाव आयोग की ओर से दिए गए 17 अक्तूबर के अल्टीमेटम के बावजूद संसदीय सचिव बनाए गए आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों ने जवाब दाखिल नहीं किया। इन विधायकों ने आयोग से जवाब देने की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है। कुछ विधायकों ने दावा किया कि उनके वकील शहर में उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए जवाब देने में असमर्थ हैं। वहीं याचिकाकर्ता प्रशांत पटेल के मुताबिक कुछ विधायकों ने बेतुके कारण बताकर जवाब दाखिल नहीं किए।
चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते संसदीय सचिव बनाए गए आप के विधायकों से कहा था कि जवाब न मिलने की दशा में माना जाएगा कि उन्हें मामले में कुछ नहीं कहना है। इसके बाद आयोग उन्हें आगे संदर्भ में लिए बिना उचित कार्रवाई करेगा। याचिकाकर्ता प्रशांत पटेल ने कहा, ‘हमारी सूचना के मुताबिक 21 विधायकों की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष संसदीय सचिव नियुक्त जाने से संबंधित लाभ के पद मामले में कोई जवाब नहीं भेजा गया है। विधायकों ने यह कहकर चार हफ्ते का समय मांगा है कि उनके वकील शहर से बाहर हैं।’ प्रशांत पटेल के मुताबिक कुछ विधायकों ने बेतुका कारण बताया है कि संबंधित दस्तावेजों वाला पेन ड्राइव खराब हो गया है।


आप विधायक मदनलाल और नितिन त्यागी ने कहा कि उनके वकील उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उन्होंने समय मांगा है। लक्ष्मीनगर से विधायक नितिन त्यागी ने कहा, ‘मेरा वकील पारिवारिक दौरे पर यूरोप गया है, वह 27 अक्तूबर तक आएगा, इसलिए चुनाव आयोग से उसके बाद की तारीख मांगी है।’ कस्तूरबा नगर से विधायक मदनलाल ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार कुछ विधायकों ने जवाब दे दिए हैं। चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते जारी निर्देश में याचिकाकर्ता प्रशांत पटेल को प्रतिवादियों के जवाब के संदर्भ में 21 अक्तूबर तक जवाब देने का समय दिया था। प्रशांत पटेल ने कहा, ‘अब आयोग को निर्णय लेना है, मैं आयोग के सहयोग के लिए हूं। यदि मुझे जवाब मिलता तो प्रत्युत्तर देता, दिल्ली सरकार के जवाब का प्रत्युत्तर सात अक्तूबर को दे चुका हूं।’

केजरीवाल सरकार की ओर से संसदीय सचिव नियुक्त किए गए 21 आप विधायकों के मामले में चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते सख्त रुख अपनाते हुए अल्टीमेटम जारी किया था। आप विधायकों ने सात अक्तूबर को पत्र लिखकर जवाब दाखिल करने की तारीख को आगे बढ़ाने का आग्रह किया था और दिल्ली सरकार की ओर से आयोग को दिए गए दस्तावेजों की ठोस प्रति भी मांगी थी। आयोग ने इसके जवाब में 17 अक्तूबर का अल्टीमेटम दिया था। दस्तावेजों की ठोस प्रति मांगे जाने पर आयोग ने कहा कि दस्तावेजों की सॉफ्ट प्रति पहले ही उन्हें दी जा चुकी है और ठोस प्रति देने के लिए आयोग बाध्य नहीं है।

प्रशांत पटेल की याचिका के आधार पर आम आदमी पार्टी के इन 21 विधायकों पर पिछले एक साल से विधानसभा की सदस्यता रद्द होने की तलवार लटक रही है। याचिका में कहा गया था कि संसदीय सचिव का पद लाभ का पद है, ऐसे में क्यों न इनकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से शुरू से आरोप लगाया जाता रहा है कि विधायकों की कोशिश मामले को देर कर लंबित रखने की है।

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