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किडनी कांड में पकड़े गए चिकित्सकों पर जांच का शिकंजा

मुंबई पुलिस कथित किडनी प्रत्यारोपण रैकेट मामले में गिरफ्तार किए गए एलएच हीरानंदानी अस्पताल के सीईओ और चार चिकित्सकों के एजंटों और किडनी दानदाताओं के बीच धन के आदान-प्रदान में शामिल होने या नहीं होने समेत मामले के सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।
Author मुंबई | August 11, 2016 04:00 am

मुंबई पुलिस कथित किडनी प्रत्यारोपण रैकेट मामले में गिरफ्तार किए गए एलएच हीरानंदानी अस्पताल के सीईओ और चार चिकित्सकों के एजंटों और किडनी दानदाताओं के बीच धन के आदान-प्रदान में शामिल होने या नहीं होने समेत मामले के सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। बुधवार को पुलिस ने स्थानीय अदालत को यह जानकारी दी। इस बीच अदालत ने पांचों लोगों को शनिवार तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया।

अस्पताल के सीईओ सुजीत चटर्जी, चिकित्सकीय निदेशक अनुराग नाइक, मुकेश शेट्टी, मुकेश शाहा और प्रकाश शेट्टी को राज्य स्वास्थ्य सेवा विभाग के निदेशक की रिपोर्ट के आधार पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है। निदेशक ने जांच में उनका नाम लिया है। पुलिस ने अंधेरी में स्थानीय मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अश्विनी लोखंडे की अदालत को बताया कि गिरफ्तार किए गए चिकित्सक शहर के कई अन्य अस्पतालों से भी जुडेÞ हुए थे और वे इस बात की जांच करना चाहते हैं कि क्या यह रैकेट अन्य अस्पतालों में भी चल रहा था या नहीं।

पुलिस यह भी पता लगाना चाहती है कि कथित रैकेट में शामिल चिकित्सकों, एजंटों और दाताओं के बीच क्या धन का भी कोई आदान-प्रदान हुआ है या नहीं। पुलिस चिकित्सकों और रैकेट में शामिल पूर्व में गिरफ्तार किए गए लोगों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का भी अध्ययन कर रही है।
पुलिस प्रवक्ता डीसीपी अशोक दुधे ने कहा, राज्य स्वास्थ्य सेवा के निदेशक की रिपोर्ट पढ़ने के बाद हमने उन्हें गिरफ्तार किया। उन पर (चिकित्सकों पर) दस्तावेजों की जांच न करके लापरवाही करने और किडनी प्रत्यारोपण संबंधी प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने का आरोप है।
हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत को बताया कि दस्तावेजों की जांच करना चिकित्सकों का काम नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक पृथक आचार समिति प्रत्यारोपणों को मंजूरी देने से पहले दस्तावेजों को परखती है।

इस रैकेट का पता उस समय चला था जब पुलिस को सूचना मिली थी कि पवई स्थित हीरानंदानी अस्पताल में 14 जुलाई को एक किडनी प्रत्यारोपण आॅपरेशन होना था जहां किडनी दाता और प्राप्त करने वाले आपस में संबंधी नहीं थे। इसके बाद किडनी दानदाता, प्राप्तकर्ता और एजंटों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस को यह पता लगा था कि किडनी देने वाली महिला और किडनी प्राप्त करने वाले बृजकिशोर जायसवाल द्वारा जमा कराए गए दस्तावेजों के विपरीत महिला जायसवाल की असली पत्नी नहीं थी जिसके बाद जायसवाल का आॅपरेशन अंतिम क्षण में रोक दिया गया था। पुलिस के अनुसार, महिला ने स्वयं को जायसवाल की पत्नी केवल इसलिए बताया था कि वह धन प्राप्त करने के लिए उसे अपनी किडनी दे सके।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या किसी अन्य ने भी इस प्रकार का धोखा देकर किडनी प्राप्त की है और क्या अस्पताल प्राधिकारी भी इसमें शामिल हैं या नहीं।

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