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NGT ने दिया देश में दलदली जमीन का पता लगाने का निर्देश

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने केंद्रीय दलदली भूमि नियामक प्राधिकरण (सीडब्लूआरए) को निर्देश दिया है कि वह देशभर में दलदली जमीन की पहचानने और उन्हें अधिसूचित करने के लिए हर महीने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बैठक करे।
Author नई दिल्ली | July 25, 2016 00:58 am
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने केंद्रीय दलदली भूमि नियामक प्राधिकरण (सीडब्लूआरए) को निर्देश दिया है कि वह देशभर में दलदली जमीन की पहचानने और उन्हें अधिसूचित करने के लिए हर महीने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बैठक करे।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने पर्यावरण और वन मंत्रालय को भी निर्देश दिया कि वह एक हलफनामा पेश करते हुए बताए कि अब तक सीडब्लूआरए की बैठक कितनी बार हुई है। पीठ ने कहा कि पर्यावरण और वन मंत्रालय को एक हलफनामा दायर करना चाहिए।

इसमें यह बताया जाए कि अब तक सीडब्लूआरए ने कितनी बार और किन तिथियों पर बैठक की है। इसके साथ ही बैठक का विवरण (मिनट्स) भी दिया जाना चाहिए। हम केंद्रीय दलदली भूमि नियामक प्राधिकरण को हर माह बैठक करने का और देश भर के सभी राज्यों में दलदली जमीन की पहचान और अधिसूचना का मुद्दा उठाने का निर्देश देते हैं।

पीठ ने सभी राज्यों से यह भी कहा कि वे एक हलफनामा पेश कर बताएं कि दलदली जमीन की अधिसूचना का काम पूरा हुआ है या नहीं। वे यह भी बताएं कि कितनी दलदली जमीन की पहचान की गई है। इनमें से कितनी दलदली जमीन संरक्षित या कितनी गैर-संरक्षित क्षेत्रों के तहत आती हैं। यह विवरण प्रत्येक दलदली भूमि के आकार के अनुरूप बताया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा, ‘हलफनामे में यह भी बताया जाए कि राज्य परियोजना की अधिसूचना और हर राज्य में दलदली जमीन को अधिसूचित करने के काम को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाना चाहता है। यदि इस संदर्भ में कोई कदम नहीं उठाए गए हैं तो इसकी वजह का उल्लेख भी हलफनामे में करना होगा।’ न्यायाधिकरण ने इस मामले में अनुपस्थिति के चलते अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड को नोटिस भी जारी किए। न्यायाधिकरण ने इन राज्यों को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में उनकी ओर से कोई पेश नहीं हुआ तो वह इन राज्यों के खिलाफ बाध्यकारी आदेश जारी करने के लिए मजबूर होगा। अब इस मामले की सुनवाई 31 अगस्त को होगी।

न्यायाधिकरण का यह आदेश पर्यावरणविद आनंद आर्य और पुष्प जैन की याचिकाओं पर आया है। इन याचिकाओं में अनुरोध किया गया था कि सरकार दलदली भूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम 2010 के अनुरूप राज्यों के भीतर सभी दलदली जमीन की पहचान के निर्देश दे। दलदली भूमि एक ऐसी जमीन होती है, जो पानी से बेहद संतृप्त होती है। इस पर यह पानी स्थायी तौर पर भी रह सकता है और अस्थायी तौर पर भी। इसकी एक अलग पारिस्थितिकी होती है।

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