December 06, 2016

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कश्मीरी पंडितों ने ठुकराया हिज्बुल का ऑफर, घाटी वापस आने के लिए रखीं शर्तें

आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर जाकिर राशिद भट्ट की ओर से कश्मीरी पंडितों से घाटी में लौटने के लिए कहे जाने के एक दिन बाद समुदाय के प्रतिनिधियों ने उसकी इस अपील को खारिज कर दिया ...

Author जम्मू | October 21, 2016 03:26 am
Ganderbal : A group of Kashmiri Pandits performs prayers at the mountainous North East Harmukh Range, 14500 ft above sea level at the conclusion of Annual Harmukh Ganga (Gangbal) Yatra 2016 organised by Harmukh Ganga Gangbal Trust along with All Parties Migrants Coordination Committee (APMCC) in Ganderbal district of Jammu and Kashmir on Monday. PTI Photo (PTI9_12_2016_000089B)

आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर जाकिर राशिद भट्ट की ओर से कश्मीरी पंडितों से घाटी में लौटने के लिए कहे जाने के एक दिन बाद समुदाय के प्रतिनिधियों ने उसकी इस अपील को खारिज कर दिया और कहा कि वे अपने हिसाब से समय का चुनाव करके कश्मीर लौटेंगे। ‘कश्मीरी पंडित कांफ्रेंस’ (केपीसी) के प्रमुख कुंदन कश्मीरी ने कहा, ‘‘हम उसकी पेशकश को सिरे से खारिज करते हैं क्योंकि कश्मीर का ऐतिहासिक रूप से ताल्लुक कश्मीरी पंडितों से है तथा वे अलगाववादियों और आतंकवादियों अथवा सीमा पार बैठे उनके आकाओं द्वारा तय एजेंडे पर नहीं लौंटेंगे।’ उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडित समुदाय अपनी शर्तों और हालात तथा अपने द्वारा चुने गए समय के हिसाब से घाटी लौटेगा। कुंदन कश्मीरी ने कहा कि हिज्बुल कमांडर एक तरफ दुनिया को यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि पाकिस्तान समर्थक आतंकी समूह धर्मनिरपेक्ष हैं तथा दूसरी तरफ वह अलगाववादियों और पथराव करने वालों को एक मौका देने का प्रयास कर रहा है कि वे लौटने वाले पंडितों पर फिर हमले कर सकें।

गौरतलब है कि आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन ने 1990 में आतंकवाद की शुरूआत पर घाटी से विस्थापित होने को मजबूर हुए कश्मीरी पंडितों को सुरक्षा का आश्वासन देते हुए उन्हें अपने घरों में वापस लौटने के लिए कहा है। संगठन ने कहा कि वह सिख युवकों का एक अलग समूह बनाने की योजना बना रहा है। इस संगठन का स्वयंभू कमांडर जाकिर रशीद भट उर्फ ‘मूसा’ ने मंगलवार को जारी एक वीडियो में कहा, ‘हम कश्मीरी पंडितों से अपने अपने घरों में वापस लौटने का आग्रह करते हैं। हम उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हैं।’ गौरतलब है कि आतंकवाद के पैर पसारने पर आतंकवादी संगठनों द्वारा कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाए जाने के बाद हजारों कश्मीर पंडित घाटी छोड़ने के लिए मजबूर हुए थे और तभी से वे जम्मू तथा देश के अन्य भागों में रह रहे हैं। मारे जा चुके आतंकवादी बुरहान वानी के ‘उत्तराधिकारी’ ने कहा, ‘उन्हें उन पंडितों को देखना चाहिए जो कभी कश्मीर छोड़कर नहीं गए। उन्हें परेशान या उनकी हत्या किसने की?’

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First Published on October 21, 2016 3:25 am

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