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जेपी ग्रुप के खरीदारों को मिलेगी राहत

उप्र सरकार की सख्ती और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (अधिभोग प्रमाण पत्र) की शर्तों में रियायत मिलने के कारण जेपी ग्रुप समेत करीब आधा दर्जन से ज्यादा परियोजनाओं को जल्द पजेशन की उम्मीद बंधी है..
Author नई दिल्ली | July 8, 2016 01:35 am
(Express Pic)

उप्र सरकार की सख्ती और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (अधिभोग प्रमाण पत्र) की शर्तों में रियायत मिलने के कारण जेपी ग्रुप समेत करीब आधा दर्जन से ज्यादा परियोजनाओं को जल्द पजेशन की उम्मीद बंधी है। प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक, जेपी ग्रुप को सेक्टर-128 में 4 टावरों को कंप्लीशन देने करने की प्रक्रिया जारी है। अगले एक-दो महीनों में कंप्लीशन जारी होने के बाद लंबे इंतजार के बाद खरीदारों को पजेशन मिल सकेगा। इसके अलावा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे और सेक्टर- 76, 77, 78 इलाके में भी तैयार बिल्डर फ्लैटों को भी कंप्लीशन मिलने की उम्मीद है। पिछले 8 महीनों में भी करीब तीन दर्जन से ज्यादा फ्लैट परियोजनाओं को प्राधिकरण कंप्लीशन जारी कर पजेशन का रास्ता खोल चुका है।

प्राधिकरण के नियोजन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कंप्लीशन सर्टिफिकेट की शर्तों को खरीदार हित में लचीला और आसान बनाया गया है। भवन नियमावली के अलावा पूरी परियोजना के बजाए हिस्सों में इसे जारी करने का फार्मूला तय किया गया है। बकाया धनराशि के भुगतान को लेकर भी बिल्डर को बड़ी राहत मिली है। जेपी के कुछ टावरों को इसी योजना के तहत कंप्लीशन जारी किया जा रहा है। एक लाख वर्ग मीटर से ज्यादा बड़ा भूखंड होने पर महज 15 फीसद निर्माण पूरा होने पर बिल्डर कंप्लीशन के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि कंप्लीशन सर्टिफिकेट का आवेदन करने से पहले बिल्डर को भवन नियमावली की शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा।

प्राधिकरण के वरिष्ठ वास्तुविद नियोजक ए मिश्रा ने बताया कि कंप्लीशन जारी करने से पहले निर्माण और सुविधाओं की जांच अधिकारियों की एक कमिटी करती है। ताला लगने योग्य फ्लैट में दरवाजे व खिड़कियों समेत फ्लोरिंग पूरी होनी चाहिए। बिजली कनेक्शन का सर्टिफिकेट और विद्युत आपूर्ति होनी जरूरी है। लिफ्ट के लिए दमकल विभाग और लगाने वाली कंपनी की एनओसी होना अनिवार्य है। लिफ्ट का चालू हालात में होना जरूरी है। पार्किंग और पार्क आदि की मौजूदगी होने पर मंजूर नक्शे के आधार बने टावर को कंप्लीशन जारी किया जा रहा है।

प्राधिकरण के मुख्य वास्तुविद नियोजक (सीएपी) एससी गौड़ ने बताया कि ओखला बर्ड सैंक्चुरी के ईको जोन को लेकर एनजीटी की रोक समेत विभिन्न कारणों से ज्यादातर बिल्डर परियोजनाओं में देरी हुई है। खरीदारों के हित में शर्तों को लचीला बनाया गया है। तय शर्तों को पूरा करने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर कंप्लीशन जारी किया जा रहा है।

आरटीआइ से लें जानकारी
कंप्लीशन सर्टिफिकेट बगैर जारी हुए पजेशन पत्र जारी करने वाले बिल्डरों की शिकायत प्राधिकरण के कॉल सेंटर पर दर्ज कराई जा सकती है। खरीदार प्राधिकरण के नियोजन विभाग में जाकर व्यक्तिगत रूप से कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी या नहीं जारी होने संबंधी जानकारी ले सकता है। आरटीआइ के जरिए भी इसे प्राप्त किया जा सकता है। बता दें कि खरीदारों का आरोप है कि बगैर कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिले भी कई बिल्डर कंपनी खरीदारों को पजेशन संबंधी पत्र जारी कर रही है।
एग्जिट योजना पर उत्साह नहीं
मंदी के कारण सालों पहले ज्यादा जमीन आबंटित करा चुके बिल्डरों के लिए प्राधिकरण ने एग्जिट योजना तैयार की है। अधिकारियों के मुताबिक, तेजी के दौर में ज्यादा जमीन आबंटित करा चुकी बिल्डर कंपनियां मौजूदा समय में मंदी के कारण परियोजना पूरी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन टावरों (कुछ हिस्से) का कंप्लीशन जारी कर खरीदारों को राहत मिल सकती है, जिनका निर्माण हो चुका है। प्राधिकरण के बकाया भुगतान की भरपाई के लिए बिल्डर कंपनी को बडेÞ भूखंड का कुछ हिस्सा प्राधिकरण को वापस लौटाने की सहूलियत दी है। अलबत्ता एग्जिट योजना में वापस होने वाली जमीन को आबंटन कीमत पर प्राधिकरण वापस लेगी। जानकारों के मुताबिक, आबंटन दर और मौजूदा बाजार भाव में कई गुना का अंतर होने के कारण बिल्डर कंपनियां इस योजना से उत्साहित नहीं हैं।

पूर्ण भुगतान से पहले फ्लैट दिखाने पर रोक गलत
अगर बिल्डर कंपनी पजेशन पत्र जारी कर खरीदार से बकाया रकम की मांग करती है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन यदि बिल्डर कंपनी लिखित या मौखिक रूप में बगैर भुगतान के पजेशन मिलने वाले फ्लैट को दिखाने से मना करती है, तो प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक यह गलत है। चूंकि बिल्डर कंपनी और खरीदार के बीच फ्लैट को लेकर हुए अनुबंध में प्राधिकरण का पजेशन से पहले दखल नहीं है। ऐसे में खरीदार को कोर्ट जाने राहत मिल सकती है।

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