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जम्मू कश्मीर से भी ज्यादा लोग मारे जा रहे नक्सल ग्रस्त छत्तीसगढ़ में

सुप्रीम कोर्ट को शुक्रवार को बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन आइएस और नाइजीरिया के आतंकवादी संगठन बोको हराम की हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों के बाद भारत आतंकवाद और उग्रवाद के कारण होने वाली मौतों के मामले में तीसरे पायदान पर है।
Author नई दिल्ली | October 29, 2016 00:34 am

सुप्रीम कोर्ट को शुक्रवार को बताया गया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन आइएस और नाइजीरिया के आतंकवादी संगठन बोको हराम की हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों के बाद भारत आतंकवाद और उग्रवाद के कारण होने वाली मौतों के मामले में तीसरे पायदान पर है। छत्तीसगढ़ सरकार ने न्यायालय में यह दावा भी किया कि आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर से ज्यादा लोग नक्सल प्रभावित इस राज्य में मारे जा रहे हैं और क्षेत्र में वाम चरमपंथी कार्यकर्ताओं की संलिप्तता आग में घी डालने का काम कर रही है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल के पीठ को बताया कि आज जम्मू कश्मीर से ज्यादा सुरक्षाकर्मी छत्तीसगढ़ में तैनात हैं। इन इलाकों में नक्सल हिंसा में कई पुलिसकर्मी मारे जा रहे हैं। हम नक्सल समस्या पर नियंत्रण के लिए कदम उठा रहे हैं। हम वहां आधारभूत संरचना से जुड़े कई काम कर रहे हैं। हम एक अलग दौर से गुजर रहे हैं। मेहता ने कहा कि आतंकवाद से प्रभावित और आतंकवाद से जुड़ी मौतों से प्रभावित होेने के मामले में आइएस और बोको हराम का दंश झेलने वाले इलाकों के बाद भारत दुनिया में तीसरे पायदान पर है। उन्होंने अदालत से अपील की कि वह नंदिनी सुंदर जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं को इलाके से बाहर रखने के लिए निर्देश पारित करे। उन्होंने आरोप लगाया कि सुंदर जैसे कार्यकर्ता ‘चाहते हैं कि ये आग हमेशा जलती रहे।’ इस पर न्यायालय ने कहा कि यह समाधान नहीं हो सकता। वे (कार्यकर्ता) चाहेंगे कि आप (सरकार) इलाके से बाहर रहें।

छत्तीसगढ़ सरकार के स्थायी वकील अतुल झा के साथ पेश हुए मेहता ने कहा कि हम इलाके से बाहर नहीं जा सकते। यह एक राज्य है और सरकार को लोगों की देखभाल करनी होगी। लोगों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। इस पर मेहता ने कहा कि आग जलते रहने देना समाधान नहीं है। एक सीडी है जिसमें उन्हें ‘लाल सलाम’ के नारे और सरकार के खिलाफ नारे लगाते देखा जा सकता है। इससे समस्या बनी रहेगी। हर कोई शांति चाहता है। जब पीठ ने छत्तीसगढ़ सरकार से राजनीतिक कार्यकर्ता मनीष कुंजम की सुरक्षा के बारे में पूछा तो मेहता ने कहा कि उन्हें पहले ही सुरक्षा मुहैया कराई जा चुकी है। मेहता ने कहा कि कुंजम ने पहले कहा था कि उन्हें राइफलों से लैस गार्डों की जरूरत नहीं है, बल्कि छोटे हथियारों वाले गार्ड होने चाहिए। लेकिन अब वे फिर राइफल वाले गार्ड चाहते हैं। हम वह मुहैया करा सकते हैं। अगर वे केंद्रीय बलों वाली सुरक्षा चाहते हैं तो वह भी मुहैया कराई जा सकती है। हम याचिकाकर्ता नंदिनी सुंदर को भी केंद्रीय सुरक्षा मुहैया करा सकते हैं। वरिष्ठ वकील अशोक देसाई ने सुंदर को सुरक्षा मुहैया कराने की पेशकश खारिज कर दी और सुंदर की तरफ से पेश हुए वकीलों ने आरोप लगाया कि वे सुरक्षा के नाम पर उन पर नजर रखना चाहते हैं। यह सरकार का बर्ताव होता है। इस पर मेहता ने कहा कि यदि ऐसी बात है तो वह पेशकश वापस लेते हैं।

मेहता की दलीलों पर देसाई ने आरोप लगाया कि हाल ही में वर्दीधारी पुलिसकर्मियों ने याचिकाकर्ता व अन्य कार्यकर्ताओं के पुतले जलाए। इस पर मेहता ने कहा कि पुतले जलाने के मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल और एएसजी से कहा कि वे 11 नवंबर को होने वाली मामले की अगली सुनवाई के दौरान समस्या से निपटने के नए समाधान के साथ आएं।

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