May 24, 2017

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जलवायु परिवर्तन की वृद्धि को सीमित करने के लिए दोहरा रुख अपनाने की जरूरत: प्रणव

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने जलवायु परिवर्तन के खतरे के ‘वास्तविक’ होने और इससे भारत को खतरा होने का जिक्र करते हुए गुरुवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन को सीमित करने के दोहरे रुख को अपनाने की जरूरत है।

Author नई दिल्ली | October 7, 2016 03:30 am

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने जलवायु परिवर्तन के खतरे के ‘वास्तविक’ होने और इससे भारत को खतरा होने का जिक्र करते हुए गुरुवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन को सीमित करने के दोहरे रुख को अपनाने की जरूरत है। इसके साथ-साथ देश के भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधनों की मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी। यह राष्ट्रपति ने विश्व सतत विकास सम्मेलन 2016 के उद्घाटन के दौरान कही। इसका आयोजन एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) ने ‘ 2015 से आगे : लोग, ग्रह और प्रगति’ विषय पर किया था।
उन्होंने जिक्र किया कि भारत ने हाल ही में ऐतिहासिक पेरिस समझौते का अनुमोदन किया है। उन्होंने आशा जताई कि देश का कदम अन्य देशों को इसका अनुकरण करने और समझौते का अनुमोदन करने के लिए प्रोत्साहित करेगा ताकि यह लागू हो सके। इससे जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। राष्ट्रपति ने कहा, ‘भारत ने ऐतिहासिक पेरिस समझौते का अनुमोदन किया है जिस पर 21वीं कांफ्रेंस आॅफ पार्टीज (सीओपी) में सहमति बनी थी। गणराज्य (भारत) का राष्ट्रपति होने के नाते चार दिन पहले मुझे इस समझौते को मंजूरी देने का विशेषाधिकार प्राप्त हुआ।

मुझे गर्व है कि हमारा अनुमोदन मोरक्को में होने वाले सीओपी 22 से पहले हुआ है और आशा है कि यह अन्य देशों को इसका अनुकरण करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।’ मुखर्जी ने कहा कि यदि वैश्विक उत्सर्जन के 55 फीसद हिस्से के लिए जिम्मेदार देशों द्वारा कानूनन जरूरी अनुमोदन हासिल कर लिया जाता है तो यह अगले सम्मेलन से पहले पेरिस जलवायु समझौते को लागू होने में सक्षम बना देगा, जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ हमारे संघर्ष के लिए बड़ा प्रोत्साहन होगा।

मुखर्जी ने कहा कि पेरिस जलवायु समझौता और सतत विकास लक्ष्य को 2015 में हासिल किया जाना इस कोशिश में दो अहम कदम हैं। उन्होंने जिक्र किया कि सभी राष्ट्रों को साझा भविष्य के लिए साथ-साथ काम करने की जरूरत है। उन्होंने पेरिस समझौते के समक्ष भारत द्वारा सौंपी गई जलवायु कार्रवाई योजना के महत्वाकांक्षी होने का जिक्र करते हुए कहा कि यदि कई मोर्चों पर कदम तेज किए गए तो लक्ष्य को हासिल करना आसान होगा। उन्होंने कहा कि हमें जलवायु परिवर्तन की वृद्धि को सीमित करने के लिए दोतरफा रुख अपनाने की जरूरत है। इसके साथ ही अपनी भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। हमें एक ऐसे समाज के निर्माण का लक्ष्य रखना चाहिए जो समृद्ध हो न कि बर्बाद करने वाला। उन्होंने कहा कि हमारे समाज को उपभोग में संयम रखना अवश्य सीखना होगा।

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First Published on October 7, 2016 3:30 am

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