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DCW की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल पर FIR

बलात्कार पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के कारण दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल मुश्किल में फंस गई हैं।
Author नई दिल्ली | July 27, 2016 00:54 am

बलात्कार पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के कारण दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल मुश्किल में फंस गई हैं। मालीवाल के खिलाफ दिल्ली के बुराड़ी थाने में धारा 228 (ए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारी ने मामला दर्ज करने की पुष्टि करते हुए कहा है कि बलात्कार मामले में आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुका है। बच्ची की पहचान सार्वजनिक करना कानून सम्मत नहीं है।

मामले में स्वाती मालीवाल का कहना है कि मैंने 14 साल की लड़की को सुरक्षा दिलाने में दिल्ली पुलिस की नाकामी पर सवाल उठाए थे, और आगे भी ऐसे सवाल उठाती रहूंगी। मालीवाल ने कहा कि उन्होंने पीड़िता का नाम सार्वजनिक नहीं किया बल्कि निजी अस्पतालों में पर्याप्त मेडिकल सुविधा मुहैया कराने की मांग की। पुलिस ने दिल्ली महिला आयोग के नोटिस के बाद ही आरोपी को गिरफ्तार किया। मंगलवार को अपने बयान में स्वाति मालीवाल ने सवाल किया कि बलात्कार पीड़िता को ही अपनी पहचान क्यों छुपानी चाहिए? इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘मैंने निर्भया के लिए लाठी खाई है। मेरा हल पल और कोई निर्भया न हो ये सुनिश्चित करने में लगता है। मैं आंदोलनकारी हूं। किसी एफआइआर से नहीं डरती’।

आरोप है कि पिछले साल दिसंबर में 14 साल की एक लड़की को बुराड़ी इलाके से उसके पड़ोसी युवक ने अगवा किया। फिर उसके साथ महीने भर तक एक घर में बंधक बनाकर बलात्कार किया जाता रहा। जब किसी तरह उनके चंगुल से छूट कर लड़की ने इंसाफ की लड़ाई शुरू की तो आरोप है कि फिर से उन्हीं दरिंदों ने उसे धोखे से जहरीला पदार्थ पिला दिया और उसकी जान ले ली। आरोपी की पहचान पड़ोस में रहने वाले शिवशंकर शर्मा नाम के लड़के के रूप में हुई। आरोप है कि उसने अपनी रिश्तेदार महिला और दोस्तों के साथ मिल कर किशोरी को अगवा कर लिया था। इस मामले में लड़की ने भी बयान बदला था। पीड़िता को दूसरी बार तब बंधक बनाया गया था जब आरोपी के खिलाफ अदालत में सुनवाई होनी थी।

इस मामले में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने उत्तरी जिले के पुलिस उपायुक्त को नोटिस भेजकर बुराड़ी थाने के एसएचओ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। आरोप है कि इस चिट्ठी में मालीवाल ने बच्ची का नाम भी लिखा था और यह भी आरोप है कि बाद में मालीवाल ने खुद इस चिट्ठी को वाट्सऐप पर अपलोड कर दिया था। मालीवाल ने ट्विटर पर भी इस घटना का उल्लेख करते हुए लिखा था कि दिल्ली को और कितनी ‘निर्भया’ की जरूरत है। हम अगली ‘निर्भया’ के मरने का इंतजार कर रहे हैं।

इस मामले को लेकर इनके खिलाफ आइपीसी की धारा 228 (ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है और यह धारा गैर जमानती है। दिल्ली महिला आयोग के हस्तक्षेप के बाद जुलाई के पहले हफ्ते में लड़की को शालीमार बाग के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लड़की के अंदरूनी अंगों ने बिल्कुल काम करना बंद कर दिया था। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

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