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श्रम संगठनों ने बगैर दावे वाले EPFO कोष के उपयोग के आदेश का किया विरोध

श्रम संगठनों ने बगैर दावे वाली कर्मचारी भविष्य निधि राशि का उपयोग वरिष्ठ नागरिकों की कल्याण योजनाओं पर करने के वित्त मंत्रालय के फैसले के विरोध में ईपीएफओ न्यासियों की मंगलवार की बैठक से व्यवधान खड़ा किया।
Author July 27, 2016 03:36 am
संगठन ने कहा- देखा गया है कि स्पष्ट आदेश होने के बावजूद जुलाई में 477 करोड़ रुपए की राशि चेक के जरिए जमा कराई गई।

श्रम संगठनों ने बगैर दावे वाली कर्मचारी भविष्य निधि राशि का उपयोग वरिष्ठ नागरिकों की कल्याण योजनाओं पर करने के वित्त मंत्रालय के फैसले के विरोध में ईपीएफओ न्यासियों की मंगलवार की बैठक से व्यवधान खड़ा किया। केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक की अध्यक्षता कर रहे श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने यह आश्वासन देते हुए उन्हें शांत करने की कोशिश की कि वह इस मामले को संबंधित मंत्रियों और यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भी ले जाएंगे। सीबीटी ईपीएफओ की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च समिति है। न्यासियों के बीच वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष से जुड़ी अधिसूचना पर पूरक एजेंडा बांटे जाने के तुरंत बाद श्रम संगठनों के सदस्यों ने सरकार के फैसले के विरोध में बैठक से बहिर्गमन किया।

अधिसूचना के मुताबिक, खातों को निष्क्रिय घोषित करने की तारीख से सात साल तक की अवधि मेें कोई दावे दारी नहीं आने पर ऐसे खातों में पड़ी राशि के आधार पर एक कोष (वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष)स्थापित किया जाएगा। दत्तात्रेय भी बीच में बैठक कक्ष से निकल कर श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों को शांत करने की कोशिश की और उनसे बैठक में शामिल होने का आग्रह किया। मंत्री के आश्वासन पर यूनियनों के प्रतिनिधि बैठक में फिर शामिल हो गए।

बहिर्गमन करने वाले यूनियन नेताओं ने श्रम मंत्री दत्तात्रेय से कहा कि सरकार की यह अधिसूचना कानून सम्मत नहीं है और यह सुप्रीम कोर्ट में नहीं टिकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का ईपीएफओ के बगैर दावे वाले कोष का उपयोग कल्याणकारी योजना के लिए करना उचित नहीं है क्योंकि यह राशि अंशदाताओं की है जो किसी भी समय इसका दावा कर सकते हैं।

श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मंत्री ने कहा कि वे सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाएं और मांग की कि सीबीटी इस समस्या का समाधान न होने की स्थिति में राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। प्रतिनिधि मंत्री के आश्वासन के बाद बैठक में फिर से शामिल हुए। आॅल इंडिया ट्रेड यूनियन कांगे्रस(एटक)के सचिव डीएल सचदेव ने कहा-हमने मंगलवार को केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में वित्त मंत्रालय से जारी उस अधिसूचना की प्रति वितरित किए जाने के बाद बैठक से बहिर्गमन किया जिसमें कहा गया है कि खातों को निष्क्रिय घोषित करने की तारीख से सात साल तक की अवधि में कोई दावे दारी नहीं आने पर ऐसे खातों में पड़ी राशि के आधार पर एक कोष स्थापित किया जाएगा।

ईपीएफओ के एक अन्य न्यासी और भारतीय मजदूर संघ के सदस्य पीजे बानासुरे ने कहा इस मुद्दे पर ईपीएफओ की वित्त लेखा परीक्षण और निवेश समिति(एफएआइसी)पर विचार किया जा रहा है। एफएआइसी ने कर्मचारी भविष्य निधि कोष की राशि का उपयोग किसी तरह के वरिष्ठ नागरिक कल्याण कोष के लिए करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ को इस संबंध में लिखे गए पत्र के बाद एफएआइसी ने इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी।

ईपीएफओ न्यासियों की बैठक आज मुख्य तौर पर चालू वित्त वर्ष में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ)के निवेश का अनुपात बढ़ाने के लिए किया गया था। ईपीएफओ ने पिछले साल अगस्त में शेयर बाजार में निवेश शुरू किया था। संस्था ईटीएफ में करीब 7,400 करोड़ का निवेश कर चुकी है।

पिछले साल श्रम मंत्रालय ने ईपीएफओ के निवेश योग्य जमा में से पांच फीसद का निवेश ईटीएफ में करने का फैसला किया था। ईपीएफओ को चालू वित्त वर्ष में निवेश योग्य जमा के तौर पर 1.3 लाख करोड़ रुपए मिले हैं। ईपीएफओ के चालू वित्त वर्ष में निवेश योग्य जमा राशि 1.35 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। विशेषज्ञ समूहों में इंडिया इंडेक्स सर्विसेज एंड प्राडक्ट्स, एसबीआई म्यूचुअल फंड मैनेजमेंट, एलआइसी, एशिया इंडेक्स और नैशनल इंस्टीच्यूट आफ सीक्योरिटीज मार्केट्स शामिल हैं।

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