January 19, 2017

ताज़ा खबर

 

Dussehra 2016: मुस्लिम परिवार ने जीवित रखी हिंदुओं के त्योहार की यह परंपरा

देश के मुस्लिम बहुल प्रांत जम्मू कश्मीर के हिन्दू बहुल जम्मू क्षेत्र में विजय दशमी की तैयारियां उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम परिवार के बिना पूरी नहीं होतीं जो पिछले 35 साल से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाने का काम कर रहा है ।

Author जम्मू | October 11, 2016 12:14 pm
An Indian artist prepares effigies of the ten-headed demon god Ravana in preparation for the upcoming Dessehra festival in New Delhi, India, Tuesday, Oct. 20, 2015. Dussehra, also known as Vijayadashami, commemorates the victory of the Hindu god Rama over Ravana, an evil ruler who had abducted Rama’s wife, Sita Devi. Rama killed Ravana to free Sita. The burning of effigies of Ravana, signifying the victory of good over evil, bring the festivities to a close. (AP Photo/Manish Swarup)

देश के मुस्लिम बहुल प्रांत जम्मू कश्मीर के हिन्दू बहुल जम्मू क्षेत्र में विजय दशमी की तैयारियां उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम परिवार के बिना पूरी नहीं होतीं जो पिछले 35 साल से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाने का काम कर रहा है । आज शाम इन पुतलों के दहन के साथ ही मेरठ जिले के इस मुस्लिम परिवार की मेहनत भी फलीभूत हो जाएगी। पुतला बनाने वाले 40 कलाकारों की टीम के मुखिया मोहम्मद गयासुद्दीन ने कहा, ‘‘जब हमारे द्वारा बनाए गए पुतलों का दहन होता है तो हमें ऐसा महसूस होता है जैसे हमें पुरस्कार मिल गया हो क्योंकि हम राक्षसों के इन पुतलों को विजय दशमी पर दहन के लिए ही बनाते हैं । उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसे एकमात्र कलाकार हैं जो अपने उत्पाद का दहन चाहते हैं ।

गयासुद्दीन ने कहा कि बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा देश में सांप्रदायिक सौहार्द तथा भाईचारे का भी उदाहरण है । उन्होंने कहा, ‘‘लोग जानते हैं कि मैं मुसलमान हूं और वे खुली बांहों से मेरा स्वागत करते हैं क्योंकि उन्हें मेरी कला पसंद है । दशहरा पर्व सांप्रदायिक सौहार्द तथा भाईचारे का प्रतीक है ।’

कलाकारों के मुखिया ने कहा, ‘‘हमारे द्वारा बनाए जाने वाले पुतले समूचे जम्मू क्षेत्र में कई दशहरा मैदानों में इस्तेमाल किए जाते हैं । लोग राजौरी, पुंछ, डोडा और किश्तवाड़ जैसे दूरस्थ क्षेत्रों से भी पुतलों का आॅर्डर देने आते हैं ।’ गयासुद्दीन अपने समूचे परिवार और 40 कलाकारों के समूह के साथ पुतला बनाने के लिए एक महीने पहले जम्मू पहुंच जाते हैं । उन्होंने कहा कि वह जम्मू क्षेत्र में लोगों से मिलने वाले प्रेम और स्नेह से प्रभावित हैं । जम्मू क्षेत्र में कई दशहरा समितियां गयासुद्दीन के पहुंचने का इंतजार करती हैं, ताकि वे पुतलों का आॅर्डर दे सकें ।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on October 11, 2016 12:13 pm

सबरंग