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सरकार तलाशेगी ओड़ीशा-छत्तीसगढ़ के बीच पानी विवाद का हल

केंद्र ने ओड़ीशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी जल विवाद में मंगलवार को दोनों राज्यों को स्वीकार्य समाधान की संभावनाएं तलाशने का आश्वासन दिया।
Author नई दिल्ली | July 27, 2016 02:51 am

केंद्र ने ओड़ीशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी जल विवाद में मंगलवार को दोनों राज्यों को स्वीकार्य समाधान की संभावनाएं तलाशने का आश्वासन दिया। सरकार ने उनसे भविष्य में ऐसे मुद्दों से निपटने के लिए संयुक्त नियंत्रण बोर्ड गठित करने की अपील भी की। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर मांगे गए स्पष्टीकरणों का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे का समाधान निकालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने ओड़ीशा के सदस्यों को आश्वासन दिया कि इस मुद्दे का समाधान निकालने के मामले में ओड़ीशा के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

उमा ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे के समाधान के लिए दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की 29 जुलाई को एक बैठक बुलाई है। यदि जरूरत पड़ी तो दोनों राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों की बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार विभिन्न राज्यों के बीच नदी जल बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के बेहतर समाधान की दिशा में 1956 के संबंधित कानून में संशोधन के बारे में विभिन्न सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार करेगी।
इससे पहले विभिन्न दलों के सदस्यों के स्पष्टीकरण का जवाब देते हुए जल संसाधन राज्य मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कैलो बांध को छोड़ कर किसी और को मंजूरी नहीं दी गई है। यह मंजूरी भी 2009 में दी गई थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की महानदी पर बनने वाली चार बड़ी परियोजनाएं हैं। लेकिन इनमें से किसी को भी तकनीकी सलाहकार समिति की मंजूरी नहीं मिली है।

बालियान ने कहा कि दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों की एक अंतरराज्यीय बैठक 27 जून को केंद्रीय जल आयोग (सीडब्लूसी) में होनी थी। इसमें महानदी बेसिन में परियोजना से संबंधित अंतरराज्यीय मुद्दों पर चर्चा की जानी थी। पर ओड़ीशा सरकार के अनुरोध पर इस बैठक को स्थगित कर दिया गया। इसी मुद्दे पर विचार करने के लिए दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में 29 जुलाई को एक बैठक बुलाई गई है।

उन्होंने कहा कि हीराकुंड में गैर मानसूनी मौसम में पानी की आपूर्ति को लेकर यह समस्या पैदा हो रही है। जबकि मानसून के मौसम में दोनों राज्यों में से किसी को कोई समस्या नहीं है। दोनों पक्षों के एक साथ बैठक करने पर 29 जुलाई को दोनों पक्षों की समस्याओं का आकलन किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि 1983 में हुए समझौते के तहत यदि संयुक्त बोर्ड का गठन कर लिया जाता तो यह समस्या आज पैदा नहीं हुई होती। लेकिन अभी भी दोनों पक्ष इस बोर्ड का गठन करने की दिशा में काम कर सकते हैं।

लोकसभा में मंत्री के जवाब से पहले बीजद के भर्तृहरि माहताब ने स्पष्टीकरण मांगा कि महानदी ओड़ीशा की जीवनरेखा है। इस पर छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से बिना सूचना और सहमति के बैराज परियोजनाओं का निर्माण किए जाने से ओडिशा की 65 फीसद जनता प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि इन बैराजों का निर्माण 1983 में ओड़ीशा और तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार के बीच हुए समझौते का उल्लंघन है।
भाजपा के रमेश बैस ने कहा कि महानदी छत्तीसगढ़ से निकलती है। लेकिन उसे इसका पूरा फायदा नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इन परियोजनाओं को लेकर ओड़ीशा सरकार को कोई आपत्ति है तो 29 जुलाई को होने वाली बैठक में वह अपना पक्ष रख सकती है। भाजपा के ही अभिषेक सिंह ने कहा कि महानदी दोनों राज्यों को आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी जोड़ती है। लेकिन न केवल ओड़ीशा और छत्तीसगढ़ बल्कि अनेक राज्यों में जल विवाद चल रहे हैं।

उनके समाधान के लिए कोई एक सिद्धांत विकसित किया जाए। वहीं राज्यसभा में इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगते हुए बीजद के दिलीप तिर्की ने कहा कि छत्तीसगढ़ की परियोजनाओं के कारण ओड़ीशा में इस नदी के जल में एक तिहाई की कमी आई है। ओड़ीशा के 15 जिलों की दो तिहाई आबादी महानदी के जल पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ सरकार ने महानदी पर कोई भी परियोजना बनाने से पहले ओड़ीशा से संपर्क नहीं किया। निर्दलीय एवी सामी ने केंद्र को आगाह किया कि इस मुद्दे का शीघ्र समाधान निकाला जाए अन्यथा ओड़ीशा में जनांदोलन हो सकता है। भाकपा के डी राजा का कहना था कि देश में नदी जल विवाद का ऐसा हल निकाला जाना चाहिए जिससे नदी प्रवाह के निचले हिस्सों में रहने वाले राज्यों के हितों का पालन हो सके।

माकपा के तपन कुमार सेन ने जहां आरोप लगाया कि केंद्र सरकार यदि जल्दी हस्तक्षेप करती तो इस मामले में शीघ्र समाधान निकल सकता था। अन्नाद्रमुक के नवनीत कृष्णन ने सावाल किया कि क्या सरकार नदी जल विवाद संबंधी 1956 के कानून में संशोधन पर विचार कर रही है। बीजद के अनुभव मोहंती ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ की परियोजनाओं को मंजूरी देने के मामले में सीडब्लूसी ने नियमों का उल्लंघन किया। कांग्रेस के जयराम रमेश ने सरकार से पूछा कि क्या केंद्र ने छत्तीसगढ़ की चार परियोजनाओं से पड़ने वाले पर्यावरण प्रभाव का अध्ययन करवाया है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या इस मुद्दे के समाधान के लिए जल संसाधन मंत्री दोनों राज्यों के संबंधित मंत्रियों और प्रधानमंत्री दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की जरूरत पड़ने पर बैठक बुलाएंगे।

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