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दिल्ली मेरी दिल्लीः असहिष्णु आप

आम आदमी पार्टी क्या वाकई राजनीतिक रूप से परिपक्व हो गई है? अगर ऐसा है तो यह परिपक्वता आलोचनाओं के जवाब में और इनके ‘सेंस आॅफ ह्यूमर’ में दिखनी चाहिए।
Author July 25, 2016 03:35 am

आम आदमी पार्टी क्या वाकई राजनीतिक रूप से परिपक्व हो गई है? अगर ऐसा है तो यह परिपक्वता आलोचनाओं के जवाब में और इनके ‘सेंस आॅफ ह्यूमर’ में दिखनी चाहिए। लेकिन, कुछ एक वाकयों को देख ऐसा नहीं लगता। एक बार किसी पत्रकार ने आप वाट्सऐप ग्रुप की प्रोफाइल तस्वीर बदल कर अरविंद केजरीवाल की तस्वीर लगा दी जिसमें वे थोड़े गुस्से में दिख रहे थे। फिर क्या था, उस पत्रकार को ग्रुप से झटपट बेदखल कर दिया गया। इसके साथ ही पार्टी अपने ऊपर उठे सवालों को भी बर्दाश्त नहीं करती। सवाल कुछ भी पूछें, जवाब अपने एजंडे के तहत ही देना है। सवाल भगवंत मान पर किया गया और जवाब में रामलीला मैदान में आयोजित निगम की विशेष सभा में दलित काउंसलर की पिटाई और कार्रवाई का मामला सामने पेश किया गया। शायद, पार्टी को और भी सहिष्णु होने और दोतरफा संवाद को बढ़ाने की जरूरत है।
भूल गए गिनती
लगता है कि पिछले साल प्रचंड बहुमत से चुनाव जीत कर दिल्ली की सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (आप) की मूल बनावट में ही विवाद है। शायद ही कोई दिन ऐसा होता है जिस दिन कोई न कोई विवाद न होता हो। एक-एक करके आप के अनेक विधायकों पर मामले दर्ज होते जा रहे हैं। कुछ तो जेल भी पहुंच गए हैं। शुरू में तो लोग इसकी गिनती करते थे, अब तो संख्या इतनी हो गई कि लोगों ने गिनती करनी भी छोड़ दी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो इन्ही विवादों में अपने विधायकों को स्वतंत्रता सेनानी कहकर एक और विवाद पैदा कर दिया था। आम जन पता नहीं क्या मानें, लेकिन भारी तादाद में आप विधायकों पर कारवाई होने से आप पर भी उंगली तो उठने ही लगी है।
बदला जमाना
जंतर-मंतर पर धरने के लिए सब कुछ मिलता है। बस इसके लिए बटुआ खोलें। टेंट, कुर्सी, माइक से लेकर प्रदर्शन के लिए किराए की भीड़ तक। धरना स्थल पर स्थित नाश्ता और चाय की दुकानों ने बाकायदा एक रेट चार्ट तैयार कर रखा है। जो एक कुर्सी से लेकर एक-एक आदमी तक का बिल बनाते हैं। बस प्रदर्शन की तारीख बताइए और सब इंतजाम हो जाएगा। प्रदर्शनकारी को बस अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पहुंचना होता है। तो बदले जमाने में प्रदर्शनकारियों की भी ‘आउटसोर्सिंग’ शुरू है।
माफिया की माया
रेत माफिया तो रेत माफिया है, उसे भला किसकी परवाह! दिल्ली में रात के 11 बजे तक व्यावसायिक वाहनों का प्रवेश बंद है, लेकिन नौ बजे से ही दिल्ली-नोएडा-टोल रूट पर रेत माफिया के ट्रक दनादन दौड़ने लगते हैं। यमुना से खनन कर दिल्ली व आसपास पहुंचाने में जुटे रेत माफिया की नेटवर्किंग गौर करने लायक है। रेत से भरे तीन-चार ट्रक एक साथ यमुना से निकलते हैं और डीएनडी से दिल्ली के ठिकानों की ओर बढ़ते हैं। पानी टपकाते चलते हुए इन ट्रकों के आगे बाकायदा कारों में इनके व्यवसायी चलते हैं जिनके इशारे पर ये ट्रक रुकते और चलते हैं। नो-एंट्री इनके लिए कोई मायने नहीं रखती। इनके हाथ लंबे हैं। खतरनाक भी। याद रहे, इसी रेत माफिया के एक ट्रक ने दिल्ली पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त को रौंदने की तब कोशिश की थी जब उन्होंने जांच के दौरान उसे रोकने की कोशिश की थी। यह अलग बात है कि उनकी जान बच गई थी और ट्रक चालक को दबोच लिया गया था। लेकिन अफसर का भी तबादला हो गया था! थोड़ा और पीछे जाएं तो यूपी की तेजतर्रार आइएएस दुर्गा नागपाल का मसला भी इस कड़ी में याद आएगा।
कल और आज
दिल्ली पर लगातार 15 साल तक राज करके रेकार्ड बनाने वालीं पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को कांग्रेस नेतृत्व ने 78 साल की उम्र में उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया, लेकिन सालों तक दिल्ली में उनकी नजरे इनायत के लिए तरसने वाले नेताओं ने कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं जाहिर की। छोटे-मोटे पद मिलने पर पूरी दिल्ली को पोस्टरों से पाटने वाले कांग्रेस नेताओं ने कोई पोस्टर तक नहीं लगाया तो शीला जी के पूर्व सांसद पुत्र संदीप दीक्षित को बुरा लगा। उन्होंने अपने एक छुटभैये चेले को निर्देश दिया और शहर में, खासकर पूर्वी दिल्ली में सैकड़ों पोस्टर लगवा दिए जाएं। दीक्षित का संयोग भी ठीक नहीं लग रहा है। लखनऊ के पहले रोड शो में ही उनके ही पैर में मोच आ गई। इसके बावजूद वे पूरे उत्साह से उत्तर प्रदेश में सक्रिय हो गई हैं। एक समय वो था जब बेवजह उनके घर पर सैकड़ों नेता दिन निकलने से लेकर रात तक जमे रहते थे और अब उन्हें खोजना पड़ रहा है।
नाली में पानी
राष्ट्रीय हरित पंचाट के आदेश पर गिरते भूजल को बचाने के लिए बिल्डर परियोजनाओं में सीवर शोधन संयत्र (एसटीपी) के पानी का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया था। हकीकत यह है कि बिल्डर कंपनियां एसटीपी के पानी को लेने का केवल दिखावा कर रही हैं। जबकि वास्तविकता में इन टैंकरों से आने वाले एसपीटी के पानी को नाले-नालियों में बहाया जा रहा है। पर्यावरणविद विक्रांत तोगड़ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों को पत्र भेजकर भूजल और एसटीपी के पानी, दोनों की बर्बादी रोकने की मांग की है। बिल्डर कंपनियों पर दिखावे के लिए केवल एसटीपी टैंकर की पर्चियां रेकार्ड में रखने का भी आरोप लगाया है।
-बेदिल

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