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कांग्रेस के बागी विधायकों को लेकर सोनी व रावत में ठनी

कांग्रेस के पूर्व बागी विधायकों को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस की केंद्रीय प्रभारी अंबिका सोनी और मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं।
अंबिका सोनी और हरीश रावत की आपस में तकरार

कांग्रेस के पूर्व बागी विधायकों को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस की केंद्रीय प्रभारी अंबिका सोनी और मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। अपने देहरादून दौरे के दौरान अंबिका सोनी ने कांग्रेस के सभी दस पूर्व बागी विधायकों के प्रति लचीला रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी में बागी पूर्व विधायकों के लिए ससम्मान घर वापसी के सभी विकल्प खुले हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं, पार्टी के पदाधिकारियों, विधायकों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के साथ देर रात तक अंबिका सोनी ने मैराथन बैठकें की। अंबिका सोनी उत्तराखंड दौरे के वक्त इस उधेड़बुन में रही कि पार्टी के दस विधायकों ने बगावत कर भाजपा का दामन थामा था, उससे पार्टी को उत्तराखंड में जो भारी राजनीतिक नुकसान हुआ, उसकी भरपाई कैसे की जाए। इसके लिए बुधवार को सुबह से देर रात तक अंबिका सोनी रोड मैप बनाने में जुटी रहीं। सोनी ने पार्टी के आम कार्यकर्ता से लेकर पार्टी के खास नेताओं तक से 2017 के विधानसभा चुनाव को लेकर गहन चर्चा की। सोनी पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में पार्टी के छोटे नेता से लेकर बडेÞ नेता तक को पार्टी की एकजुटता और गुटबाजी दूर करने के लिए कड़ा संदेश देकर गर्इं।

 

उन्होंने दो-टूक लहजे में कहा कि संगठन और सरकार को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुटता के साथ विधानसभा चुनाव में जुटना होगा। सोनी ने सख्त लहजे में कहा कि वे दोबारा उत्तराखंड के दौरे पर आएंगी तो उन्हें यदि सरकार और संगठन के खिलाफ किसी भी पार्टी के बडेÞ से बडेÞ या छोटे से छोटे नेता का बयान सुनने या पढ़ने को मिला तो पार्टी हाईकमान कड़ी कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएगा। सोनी ने जब पार्टी छोड़ कर भाजपा में गए कांग्रेस के दस बागी विधायकों को फिर से पार्टी में शामिल करने का न्योता दिया तो उत्तराखंड कांगे्रस के सभी नेता चकित रह गए। दरअसल यह बयान सोनी ने पार्टी हाईकमान की रणनीति के तहत दिया। यदि पार्टी हाईकमान भाजपा में शामिल हुए पूर्व बागी कांग्रेसी विधायकों में से कुछ पूर्व विधायकों की पार्टी में चुनाव के मौके पर वापसी करने में कामयाब रहता है तो इससे भाजपा को उत्तराखंड बाकी पेज 8 पर उङ्मल्ल३्र४ी ३ङ्म स्रँी 8
में करारा झटका लगेगा। सोनी के बयान से सबसे ज्यादा हैरत मुख्यमंत्री हरीश रावत को हुई।

सोनी के बागी विधायकों के प्रति लचीला रुख अपनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बागी कांग्रेसी विधायकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए दो-टूक शब्दों में कहा कि बागियों के नेता विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत दगाबाज हैं। इन दोनों नेताओं ने ऐसे समय में कांग्रेस पार्टी और उनका साथ छोड़ा जब उनकी बहुत सख्त जरूरत थी। हरीश रावत ने कहा कि मेरे से यह गलती हुई कि मैंने विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत का साथ दिया। मैंने बहुगुणा को मुख्यमंत्री के रूप में स्वीकार किया और पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान किया। बहुगुणा दो बार लोकसभा का चुनाव हार गए थे। उत्तरकाशी और टिहरी जिलों में उनका कोई जनाधार नहीं था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए मैं बहुुगुणा को सूबे की जनता के बीच ले गया। पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं से मैंने उनकी जयकार लगवाई। परंतु बहुगुणा दगाबाज निकले। पहले बहुगुणा ने सांप्रदायिक ताकतों से हाथ मिला कर उत्तराखंड में कांग्रेस को तोड़ा। फिर बाद में उनकी बहन रीता बहुगुणा जोशी उत्तर प्रदेश में कांगे्रस का साथ छोड़कर भाजपा में चली गई। इन दोनों बहन-भाइयों को पार्टी हाईकमान ने राजनीति में नई पहचान दी। इन दोनों बहन-भाइयों ने सोनिया जी और राहुल जी की पीठ पर छूरा घोंप दिया।

कांग्रेस के दूसरे बागी नेता हरक सिंह रावत पर निशाना साधते हुए हरीश रावत ने कहा कि वे कई सालों से भाजपा में जाने की फिराक में लगे हुए थे। कई साल पहले जब भाजपा ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाल दिया था, तब वे दिशाहीन होकर राजनीतिक चौराहे पर खड़े थे। तब वे हरक सिंह रावत को कांग्रेस में लाए, उन्हें विधायकी का टिकट दिया और चुनाव जितवाया और नारायण दत्त तिवारी सरकार में मंत्री बनवाया और उन्हें नई पहचान दी। आज वही हरक सिंह रावत बुरे वक्तमें पार्टी का दामन छोड़ बैठे। इन दोनों नेताओं की फितरत नहीं बदली। बागी कांग्रेसी विधायकों को लेकर अंबिका सोनी और हरीश रावत के बयानों में जमीन आसमान का अंतर है। इससे साफ जाहिर होता है कि बागी कांग्रेसी पूर्व विधायकों को लेकर अंबिका सोनी और हरीश रावत की सोच अलग-अलग है। उधर अंबिका सोनी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्तकरते हुए पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि कांग्रेस ने जब दरवाजे खोले थे, तभी तो वे बाहर निकले। उन्होंने कहा कि अब कांंग्रेस वापसी का सवाल ही पैदा नहीं होता। बहुगुणा ने कहा कि पार्टी हाईकमान समय रहते उनकी पीड़ा समझ लेता और हरीश रावत पर वक्त रहते पार्टी हाईकमान अंकुश लगा देता तो यह हालात पैदा ही न होते। बहुगुणा ने कहा कि वे भाजपा में रह कर बहुत खुश हैं।

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