December 05, 2016

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छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव व बस्तर के आइजी को मानवाधिकार आयोग ने नोटिस भेजा

दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद व जेएनयू की नंदिनी सुंदर और कुछ अन्य शिक्षकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए जाने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक को तलब किया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद व जेएनयू की नंदिनी सुंदर और कुछ अन्य शिक्षकों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए जाने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव और बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक को तलब किया है। मानवाधिकार वादियों के खिलाफ दमन की कार्रवाई की बाबत मीडिया की खबरों का खुद संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया। आरोप है कि बस्तर पुलिस ने नंदिनी सुंदर व अर्चना प्रसाद को गिरफ्तारी की धमकी दी थी। एक आदिवासी सामनाथ बघेल की सुकमा जिले में चार नवंबर को माओवादियों के हाथों हुई हत्या के आरोप में दिल्ली के मानवाधिकारवादियों को अभियुक्त बनाया गया है। पुलिस के मुताबिक बघेल अपने इलाके में माओवादियों की गतिविधियों का अप्रैल से ही विरोध कर रहा था। आरोप है कि मई में इन प्रोफेसरों ने बस्तर का दौरा कर बघेल को माओवादियों का विरोध नहीं करने की सलाह दी थी। बघेल की हत्या छह महीने बाद होने के बावजूद मानवाधिकारवादियों को उससे जोड़ना तार्किक नहीं है।

मीडिया की खबर में बताया गया था कि पुलिस ने बघेल की पत्नी की तरफ से मनमाफिक एफआइआर दर्ज कराई और उसमें सुंदर व अर्चना आदि को सबक सिखाने के लिए अभियुक्त बना दिया। आयोग ने इस प्रकरण में नंदिनी सुंदर द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका का भी संज्ञान लिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बस्तर पुलिस आदिवासियों के घर जला कर उन पर जुल्म कर रही है। उन्हें माओवादी बता कर उनका उत्पीडन किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआइ जांच का आदेश दिया था। जांच में बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक कल्लूरी को आदिवासियों के घर जलाने का दोषी पाया गया था।

नंदिनी सुंदर ने इससे पहले 2007 में सलवा जुडुम के दौरान भी आदिवासियों पर किए गए पुलिस अत्याचारों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। मानवाधिकार आयोग से भी आदिवासी महिलाओं के साथ सुरक्षा बलों के हाथों बलात्कार, हत्या व दूसरे अपराधों की शिकायत की थी। चूंकि ये नवाधिकारवादी गरीब आदिवासियों पर होने वाले पुलिस अत्याचारों का विरोध करते रहे हैं लिहाजा पुलिस ने इन्हें सबक सिखाने के लिए हत्या के झूठे आरोप में फंसा दिया। आयोग ने हैरानी जताई कि चार नवंबर को एक निजी टीवी चैनल के साथ बातचीत में बघेल की पत्नी ने बताया था कि उसने अपने पति की हत्या में नंदिनी सुंदर या किसी भी अन्य को नामजद नहीं किया था।

माओवादियों ने उन पर हमला तब किया जब वे सो रहे थे। नंदिनी सुंदर वैसे भी पिछले पांच महीने से उस इलाके में नहीं गईं। आयोग ने छत्तीसगढ़ पुलिस के पिछले एक साल के रवैए पर हैरानी जताई है और मुख्य सचिव व पुलिस आईजी को 30 नवंबर को अपने सामने पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही आईजी पर लगे आरोपों के मद्देनजर बघेल की हत्या की जांच का काम स्वतंत्र जांच एजंसी सीबीआइ आदि को नहीं दिए जाने की वजह भी पूछी है।

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First Published on November 18, 2016 1:49 am

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