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आरोपी ने बलात्कार पीड़िता को दिए 10 लाख, अदालत ने मामला किया खारिज

एक असाधारण फैसले में बंबई हाई कोर्ट ने 30 साल के आरोपी की ओर से 23 साल की पीड़िता और अब सात महीने की गर्भवती महिला को 10 लाख रुपए देने के बाद बलात्कार का मामला निरस्त कर दिया।
Author मुंबई | July 28, 2016 01:42 am
मुंबई हाईकोर्ट

एक असाधारण फैसले में बंबई हाई कोर्ट ने 30 साल के आरोपी की ओर से 23 साल की पीड़िता और अब सात महीने की गर्भवती महिला को 10 लाख रुपए देने के बाद बलात्कार का मामला निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि महिला की रजामंदी से विशेष हालात में ऐसा किया जा रहा है।

न्यायमूर्ति अभय ओका की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हम विशेष हालात में शिकायत निरस्त कर रहे हैं क्योंकि पीड़िता ने इसकी रजामंदी दी है और आरोपी ने उसके भविष्य व अजन्मे बच्चे के लिए 10 लाख रुपए जमा कराए हैं। न्यायाधीशों ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा- रिकार्ड में खुलासा हुआ है कि दोनों के बीच आपसी रजामंदी से संबंध थे। पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी के दिए गए धन को 10 साल के लिए एक राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा कराया जाए। न्यायाधीशों ने कहा कि शिकायतकर्ता धन पर प्राप्त ब्याज पाने की हकदार होगी और समयावधि पूरी होने पर वह राशि निकालने के योग्य होगी।

शिकायतकर्ता ने अदालत को बताया कि उसे शिकायत निरस्त किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। वह मामला निपटाना चाहती है जबकि आरोपी ने उसके भविष्य और अजन्मे बच्चे के लिए 10 लाख रुपए जमा करने पर सहमति जताई। आरोपी ने पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट रजिस्ट्रार के पास पांच लाख रुपए जमा कराए थे और मंगलवार को जानकारी दी कि उसने बची हुई राशि भी जमा करा दी है।

पीड़िता ने अदालत को बताया कि कुछ गलतफहमी की वजह से आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई। उन्होंने कहा कि शुरुआत में आरोपी के खिलाफ लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी क्योंकि वह लापता था। पीड़िता ने कहा कि यह उसे पता था कि आरोपी शादीशुदा है।

पुणे की पुलिस ने इस साल छह जून को प्राथमिकी दर्ज करके पीड़ित की शिकायत पर बलात्कार और चोट पहुंचाने की घाराओं के तहत आरोप लगाया था। प्राथमिकी में कहा गया कि आरोपी ने शादी का वादा कर पीड़िता से बलात्कार किया था। इसके बाद आरोपी ने मामला निरस्त करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

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