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Ola, Ubar जैसी कैब्स के खिलाफ फिर हड़ताल, सड़क पर लोग रहे बेहाल

राष्ट्रीय राजधानी में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के विरोध में टैक्सी यूनियनों ने मंगलवार को एक बार फिर प्रदर्शन शुरू किया।
Author नई दिल्ली | July 27, 2016 01:13 am

राष्ट्रीय राजधानी में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के विरोध में टैक्सी यूनियनों ने मंगलवार को एक बार फिर प्रदर्शन शुरू किया। टैक्सी चालकों ने अपनी मांगों को लेकर बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है जिससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस हड़ताल के लिए आॅटो और टैक्सी की बीस यूनियनों ने मिलकर संयुक्त कार्य समिति बनाई है, जिसने अनिश्चितकालीन हड़ताल बुलाई है। हड़ताल के पहले दिन मंगलवार को समिति की ओर से दावा किया गया कि हड़ताल के समर्थन में करीब 85000 आॅटो और 15000 काली-पीली टैक्सियां सड़कों से गायब रहीं।

टै्क्सी चालकों की हड़ताल के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कनॉट प्लेस, नई व पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और आइएसबीटी जैसे स्थानों पर यात्रियों को आवागमन के साधन नहीं मिल रहे। आॅल दिल्ली आॅटो-टैक्सी ट्रांसपोर्ट कांग्रेस यूनियन (एडीएटीटीसीयू) के अध्यक्ष किशन वर्मा ने कहा कि आॅटो और टैक्सियों के चालक ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का विरोध कर रहे हैं। वर्मा ने कहा कि उबर और ओला के पास दिल्ली में टैक्सी चलाने का परमिट नहीं है, फिर भी हमारी रोजी-रोटी छीनने के लिए सरकार उन्हें अपनी गाड़ियां चलाने दे रही है।

दिल्ली आॅटोरिक्शा संघ और दिल्ली प्रदेश टैक्सी यूनियन के महासचिव राजेंद्र सोनी ने कहा कि हमने 17 अप्रैल को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा था, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली सरकार और केजरीवाल से बातचीत नहीं की जाएगी, तब शासन को आॅटो व टैक्सी चालकों की ताकत का पता चलेगा। वहीं यह पहली बार है कि प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा और कांग्रेस से जुड़ी यूनियनों ने भी एकजुट होकर हड़ताल का समर्थन किया है।

आरएसएस समर्थित यूनियनों के प्रमुख सोनी ने कहा कि सरकार ने हमें कई बार आश्वासन दिया कि वह ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं के खिलाफ कार्रवाई करेगी, लेकिन उसने अभी तक अपना वादा पूरा नहीं किया है। जबकि मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर रोक, नए टैक्सी परमिट, 15 साल पुरानी काली-पीली टैक्सियों को बदलने सहित तीन महीने के लिए लाइसेंस रद्द किए जाने जैसी मांगों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था।

वहीं दिल्ली सरकार ने इस हड़ताल को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा है कि ऐप आधारित कैब सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने का फैसला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि दिल्ली में ओला और उबर का संचालन गैरकानूनी है क्योंकि उनके पास अपनी टैक्सियां चलाने के लिए दिल्ली परिवहन विभाग का परमिट नहीं है। हमने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर उबर के सर्वर पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि कंपनी का मुख्य सर्वर अमेरिका में है। उन्होंने आगे कहा कि सम-विषम के दूसरे चरण में मुख्यमंत्री ने सर्ज प्राइसिंग (व्यस्त समय में किराया बढ़ाना) की शिकायतों पर इन ऐप आधारित कैब सेवाआें को कार्रवाई का सामना करने की भी चेतावनी दी थी।

टैक्सी चालकों की हड़ताल के दौरान सीलमपुर, मिंटो रोड और शकरपुर में तोड़फोड़ की छिटपुट घटनाएं सामने आई हैं। राजेंद्र सोनी का कहना है कि यह तोड़फोड़ किसी की ओर से करवाई गई है ताकि हड़ताल को प्रभावित किया जा सके। इस तोड़फोड़ में कोई आॅटो रिक्शा चालक शामिल नहीं है।

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