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अदालत का वक्त बर्बाद करने पर हाईकोर्ट ने लगाई कांग्रेस नेता को लताड़ और खारिज की याचिका

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक न्यायाधीश पर पूर्वाग्रह का आरोप लगाने और 1984 के सिख विरोधी दंगों का मामला किसी और पीठ को भेजने की मांग करने पर कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को लताड़ा।
Author नई दिल्ली | November 4, 2016 22:13 pm
कांग्रेस नेता सज्जन कुमार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक न्यायाधीश पर पूर्वाग्रह का आरोप लगाने और 1984 के सिख विरोधी दंगों का मामला किसी और पीठ को भेजने की मांग करने पर कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को लताड़ा और कहा कि यह ‘‘न्यायाधीश को अपमानित करने की मंशा से किया गया सीधा हमला’’ है । अदालत ने कुमार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की भी चेतावनी दी । न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति पी एस तेजी की पीठ ने कुमार एवं अन्य की वह अर्जी भी खारिज कर दी जिसमें मामले की सुनवाई कर रही खंडपीठ के एक सदस्य पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगाया गया था । अदालत ने यह भी कहा कि यह ‘‘इन मामलों की सुनवाई रोकने की कोशिश है ।’ पीठ ने कहा कि इन याचिकाओं में दी गई दलीलें अदालत की अवमानना की तरह है, लेकिन वह कोई कार्रवाई शुरू नहीं कर रही है ताकि 32 साल पहले हुई घटना से जुड़े मामले में और विलंब नहीं हो ।


कड़े शब्दों में की गई टिप्पणियों में पीठ ने कहा, ‘‘एक न्यायाधीश को चुनकर निशाना बनाना और पीठ में शामिल न्यायाधीशों का नाम लेकर उन्हें संबोधित करना एवं उनके खिलाफ व्यक्तिगत आरोप लगाना दरअसल सार्वजनिक तौर पर संबंधित न्यायाधीश को अपमानित करने की मंशा से किया गया सीधा हमला है ।’ पीठ ने कहा कि यह कोशिश कड़ी निंदा के लायक है । कुमार एवं दोषियों – पूर्व विधायक महेंद्र यादव एवं किशन खोक्कर – को अवमानना की चेतावनी देते हुए पीठ ने कहा, ‘‘हम संयम बरत रहे हैं और अदालत की अवमानना कानून के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने से परहेज कर रहे हैं और अर्जी दाखिल करने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं शुरू कर रहे हैं क्योंकि ऐसा करने से इन मामलों में और देरी होगी ।’

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