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पिता का सपना था याकूब बने क्रिकेटर, बन गया आतंकी

याकूब के पिता अब्दुल रज्जाक मेमन क्रिकेट में गहरी दिलचस्पी रखते थे और वह खुद मुंबई लीग में खिलाड़ी भी रहे थे। वह ‘टाइगर’ के नाम से चर्चित थे और वह चाहते थे कि उनका बेटा मुश्ताक बड़ा होकर क्रिकेटर बने।
Author July 30, 2015 15:23 pm
याकूब के पिता अब्दुल रज्जाक मेमन क्रिकेट में गहरी दिलचस्पी रखते थे और वह खुद मुंबई लीग में खिलाड़ी भी रहे थे। वह ‘टाइगर’ के नाम से चर्चित थे और वह चाहते थे कि उनका बेटा मुश्ताक बड़ा होकर क्रिकेटर बने। (फोटो: भाषा)

याकूब के पिता अब्दुल रज्जाक मेमन क्रिकेट में गहरी दिलचस्पी रखते थे और वह खुद मुंबई लीग में खिलाड़ी भी रहे थे। वह ‘टाइगर’ के नाम से चर्चित थे और वह चाहते थे कि उनका बेटा मुश्ताक बड़ा होकर क्रिकेटर बने।

अब्दुल रज्जाक को मेमन परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के साथ वर्ष 1994 में उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह विदेश से लौटे थे। वह जेल में बीमार हो गए थे और कुछ साल बाद उन्हें जमानत दे दी गई थी। उनकी मौत वर्ष 2001 में 73 साल की उम्र में हो गई थी।

अब्दुल रज्जाक की पत्नी हनीफा मेमन के खिलाफ उसके बेटे टाइगर और उसके दोस्तों के आतंकी कृत्यों को उकसाने का मामला दर्ज किया गया था। उन्हें भी कुछ साल जेल में रहने के बाद जमानत पर छोड़ दिया गया था। बाद में टाडा अदालत ने उन्हें साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था।

याकूब का भाई मुश्ताक मेमन उर्फ टाइगर कथित तौर पर एक तस्कर था और भारत में दाउद इब्राहिम के कारोबार का प्रतिनिधि था। वह विस्फोटों से एक दिन पहले दुबई चला गया था और वहां से फिर पाकिस्तान चला गया था।

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ऐसा माना जाता है कि वह पाकिस्तान में दाउद के साथ छिपा हुआ है। वह भारत के सबसे वांछित अपराधियों में से एक है। उसने बाबरी मस्जिद गिराई जाने के प्रतिशोध में दाउद के साथ मिलकर वर्ष 1993 के सिलसिलेवार बम धमाकों की साजिश रची थी।

पढ़ें याकूब के भाईयों की दांस्तां

बात अगर याकूब के भाई सुलेमान की करें तो वह अच्छी आदतों वाला व्यक्ति था और उसे भी अपने पिता की तरह क्रिकेट से प्यार था। उसे मेमन परिवार के अन्य सदस्यों के साथ वर्ष 1994 में गिरफ्तार किया गया। उनपर आतंकी कृत्यों को उकसाने और उसमें मदद देने का आरोप था।

गिरफ्तारी के कुछ वर्ष बाद उन्हें जमानत मिल गई और फिर साक्ष्यों के अभाव में वह बरी कर दिए गए। सुलेमान की पत्नी रूबीना को टाडा अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई क्योंकि बम विस्फोटों में जिस मारूति वैन का इस्तेमाल किया गया था, वह उसके नाम पर दर्ज थी। यह वैन वर्ली में लावारिस हालत में मिली थी और इसके अंदर एके-56 राइफलें और हथगोले बरामद किए गए थे।

आरोपी शोर सुनने के बाद इस वाहन को छोड़कर भाग गए थे क्योंकि उन्हें लगा था कि कोई विस्फोट हो गया है। वे कथित तौर पर एक मिशन के तहत कारपोरेटरों पर गोलियां चलाने के लिए नगरपालिका मुख्यालय जा रहे थे।

फोटो में देखें: याकूब मेमन का फांसी तक का सफर…

हालांकि रूबीना ने अपने बचाव में कहा था कि वह एक गृहिणी थी और उसके परिवार की कुछ संपत्ति उसके नाम पर थी लेकिन उसने बम विस्फोटों की साजिश में कोई हिस्सा नहीं लिया।

टाइगर के एक अन्य भाई एसा को भी मेमन परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गिरफ्तार किया गया था। वह ट्यूमर का शिकार बताया गया और उसने खराब सेहत के आधार पर बरी किए जाने की मांग की थी। हालांकि टाडा अदालत ने उसे दोषी करार दिया। वह औरंगाबाद जेल में उम्रकैद काट रहा है।

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टाइगर के एक अन्य भाई यूसुफ मेमन को भी गिरफ्तार किया गया था। उसके सिजोफेर्निया से पीड़ित होने का संदेह है। उसे टाडा अदालत ने दोषी करार दिया था और अब वह औरंगाबाद जेल में उम्रकैद काट रहा है।

अब्दुल रज्जाक और हनीफा का सबसे बड़ा बेटा अयूब मेमन फरार है। ऐसा माना जाता है कि वह टाइगर के साथ पाकिस्तान में है। साल 1993 बम विस्फोटों का मामला भारतीय न्यायिक व्यवस्था के इतिहास का सबसे लंबा मामला रहा, जो कि 14 साल तक चला।

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  1. K
    KKTripathy
    Jul 30, 2015 at 3:40 pm
    आज तड़के याकूब मेनन को दी गई फांसी न्याय तंत्र एवं न्यायपालिका के बजाय सरकार एवं सरकारी तंत्र की नीयत पर कहीं अधिक सवाल छोड़ गया है । भुल्लर,राजोना तथा राजीव गांधी के हत्यारों की फांसी की सजा पर तो भिन्न भिन्न कारणों से आप चुप बैठे रहते हैं,1992-1993 के मुंंबई दंगो के इंजीनियरों को तो आप ढूंढना ही नहीं चाहते और माया कोंडाणी जैसों की तो आप सजा पलटने की हर जुगत भिड़ा रहे हैं। साहब न्याय होना ही नहीं दिखना भी चाहिए,जो कि दूर दूर तक कहीं नहीं दिख रहा. हर तरह की हिंसा हिंसा होती है और हर तरह का आतँकआतँक
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