ताज़ा खबर
 

आखिर दोषी याकूब मेनन को फांसी पर चढ़ा ही दिया गया…

आखिर 1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेनन को फांसी पर चढ़ा ही दिया गया। लेकिन विवादों से घिरी यह फांसी कई सवाल छोड़ गई है। दो सवाल अहम...
Author July 30, 2015 11:31 am
आखिर 1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेनन को फांसी पर चढ़ा ही दिया गया। लेकिन विवादों से घिरी यह फांसी कई सवाल छोड़ गई है।

आखिर 1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेनन को फांसी पर चढ़ा ही दिया गया। लेकिन विवादों से घिरी यह फांसी कई सवाल छोड़ गई है। दो सवाल अहम हैं। पहला यह कि लोकतांत्रिक और सभ्य व्यवस्था में ऐसे कठोर और अमानवीय दंड का क्या वाकई कोई औचित्य है। वह भी तब जबकि दुनिया के अधिकांश देश इसे बर्बरता बता कर अपने यहां खत्म कर चुके हैं।

पर भारत में फांसी का प्रावधान न तो अभी तक आपराधिक दंड संहिता से हटा है और न इसे न्यायपालिका ने असंवैधानिक माना है। दूसरा सवाल इस मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से देखने वाले नजरिए से जुड़ा है। खासकर एमआईएम के सांसद ओवैसी की इस मुहिम के बाद कि याकूब को उसका मजहब देखकर फांसी देने में जल्दबाजी की गई। जबकि उससे भी पहले ऐसी सजा पाए दूसरे सैंकड़ों कैदियों को फांसी पर नहीं लटकाया जा रहा।


यह सही है कि फांसी की सजा जघन्यतम और विरले मामलों में ही दी जाती है। पर इसके औचित्य पर सवाल निरंतर उठे हैैं। कानूनी लड़ाई भी चली हैं। इसीलिए 1995 के बाद आठ साल तक देश में किसी को फांसी नहीं हुई । 2004 में धनंजय चटर्जी को फांसी पर लटकाया गया था।

PHOTOS: याकूब मेमन का फांसी तक का सफर…

फिर 21 नवंबर 2012 को मुंबई में ताज होटल पर हमला करने वाले पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब को फांसी हुई। वह पाकिस्तानी था सो किसी ने एतराज नहीं जताया। पर अगले ही साल संसद पर हमले के अपराधी अफजल गुरू को फांसी पर लटकाया गया तो तब की यूपीए सरकार की आलोचना हुई। इसके बाद बारी याकूब मेनन की आई तो इसे मजहब के आधार पर भेदभाव बताया गया। दूसरे तर्क भी दिए गए।

Also Read: याकूब मेमन ने दोषी ठहराये जाने पर कहा था: ‘निर्दोषों को आतंकवादी कहा जा रहा है’

हालांकि सरकार ने प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया । पर इस फांसी ने यह सवाल तो उठाया ही है कि फांसी पर लटकाने की प्रक्रिया पारदर्शी और सबके लिए समान हो तो भेदभाव का आरोप लगाने की गुंजाईंश ही न बचे। रही मेमन के प्रति दया भाव दिखाने की दलील तो ढ़ाई सौ से ज्यादा निर्दोष लोगों की हत्या के दोषी के प्रति भी रहम दिखाया जाएगा तो फिर अपराध के लिए किसी को भी दंडित करने का कोई मतलब नहीं बचेगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग