ताज़ा खबर
 

मोदी ने मांगा सीमा के सवाल का जल्द समाधान, शी ने कहा: सकारात्मक सोच से निपटाएंगे मुद्दे

जनसत्ता ब्यूरो नई दिल्ली। भारत-चीन शीर्ष स्तरीय वार्ता पर लद्दाख गतिरोध का साया बना रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमा पर लगातार हो रही घटनाओं के बारे में गंभीर चिंता जताते हुए सीमा के सवाल का जल्द समाधान चाहा। हालांकि दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के 12 समझौतों पर दस्तखत किए हैं। चीन […]
Author July 6, 2017 16:54 pm

जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत-चीन शीर्ष स्तरीय वार्ता पर लद्दाख गतिरोध का साया बना रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमा पर लगातार हो रही घटनाओं के बारे में गंभीर चिंता जताते हुए सीमा के सवाल का जल्द समाधान चाहा। हालांकि दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के 12 समझौतों पर दस्तखत किए हैं।
चीन के सैनिकों और वहां के नागरिकों की भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की घटनाओं के परिदृश्य में भारत की यात्रा पर आए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से बातचीत में प्रधानमंत्री ने उन्हें स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखने संबंधी दोनों देशों के बीच हुए समझौते का कड़ाई से पालन होना चाहिए।

बुधवार को अमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे चीन के राष्ट्रपति की मेजबानी के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उनके साथ शिखर बैठक की। सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तरीय, दोनों वार्ताएं मिलाकर लगभग तीन घंटे तक चलीं। इसमें फैसला हुआ कि चीन अगले पांच सालों में भारत में 20 अरब डालर का निवेश करेगा।

लेकिन लगता है कि दोनों दिनों की वार्ता मुख्यत: सीमा विवाद के इर्द-गिर्द घूमती रहीं जिनमें चुमार और डेमचॉक की घटनाएं शामिल हैं। अमदबाद में भी मोदी ने इन मामलों पर बात की थी, हालांकि सराकर ने उसे शिष्टाचार वार्ता बताया है।

मोदी ने चीन के राष्ट्रपति की मौजूदगी में मीडिया से कहा कि सीमा पर लगातार हो रही घटनाओं के संबंध में मैंने हमारी गंभीर चिंता उठाई। हम इस बात पर सहमत हुए कि सीमावर्ती क्षेत्र में शांति और सौहार्द हमारे परस्पर विश्वास और संबंधों की पूरी क्षमता पाने की आवश्यक बुनियाद है। यह एक आवश्यक समझ है, जिसका कड़ाई से पालन होना चाहिए। जबकि हमारे सीमा संबंधी समझौतों और विश्वास बहाली उपायों ने अच्छी तरह से काम किया है। मैंने यह सुझाव भी दिया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्पष्टीकरण शांति और सौहार्द बनाए रखने के हमारे प्रयासों में बड़ा योगदान करेगा और राष्ट्रपति शी से आग्रह किया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा का स्पष्टीकरण करने की रुकी प्रक्रिया को बहाल किया जाना चाहिए। हमें सीमा सवाल का भी शीघ्र समाधान करना चाहिए।

सीमा की घटनाओं पर अपना पक्ष रखते हुए शी ने कहा कि चूंकि सीमा का सीमांकन होना अभी बाकी है, कभी-कभार कुछ घटनाएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा, लेकिन दोनों पक्ष सीमा संबंधित विभिन्न स्तरीय तंत्र के जरिए स्थिति से तुरंत और प्रभावकारी ढंग से निपटने में सक्षम हैं जिससे ऐसी घटनाओं का द्विपक्षीय संबंधों पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़े। चीन मैत्रीपूर्ण परामर्श के माध्यम से भारत के साथ जल्द से जल्द सीमा विवाद हल करने को प्रतिबद्ध है।

तीन दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन की वार्ता के बाद विभिन्न क्षेत्रों के 12 समझौतों पर दस्तखत किए गए। इनमें भारत में चीनी औद्योगिक पार्कों की स्थापना और भारतीय रेलवे में निवेश शामिल हैं।

मोदी ने कहा कि चीन भारत का सबसे बड़ा पड़ोसी है। इसलिए परस्पर विश्वास, एक-दूसरे की संवेदनाओं और चिंताओं का सम्मान और हमारे संबंधों व हमारी सीमाओं पर शांति व स्थिरता हमारे रिश्तों की अपार क्षमताओं को पाने के लिए जरूरी है। सीमा की घटनाओं के अलावा प्रधानमंत्री ने चीन की वीजा नीति और सीमा पारीय नदियों के विषयों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि हमने चीन की वीजा नीति और सीमा पारीय नदियों के संबंध में भारत की चिंताओं पर चर्चा की। मुझे विश्वास है कि इनका शीघ्र समाधान होने से परस्पर विश्वास एक नए स्तर को पाएगा।

चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि वे एक-दूसरे की संवेदनाओं और चिंताओं का सम्मान करना जारी रखेंगे और जिन मुद्दों को सुलझाया जाना बाकी है उनसे ऐसे सकारात्मक सोच से निपटेंगे जो इन दोनों अहम पड़ोसी देशों के सौहार्दपूर्ण रिश्तों के अनुरूप हो।
मोदी ने कहा कि भारत चीन के साथ रिश्तों को बहुत अहमियत और प्राथमिकता देता है और बुधवार को अमदाबाद और गुरुवार को दिल्ली में हुई अब तक की वार्ता में दोनों देश हर स्तर पर संबंधों को प्रगाढ़ बनाने और नियमित शिखर स्तरीय बैठकें करने पर सहमत हुए।
उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देश असैन्य परमाणु ऊर्जा में सहयोग की चर्चा प्रक्रिया शुरू करने पर सहमत हुए जिससे ऊर्जा सुरक्षा में सहयोग का आयाम खुलेगा। भारत-चीन के आर्थिक संबंधों का वर्तमान स्तर दोनों देशों की क्षमता के साथ न्याय नहीं कर रहा है। उन्होंने दोनों के व्यापार में आई मंदी और व्यापार असंतुलन पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों के चीन के बाजार और निवेश में पहुंच के अवसरों में सुधार के लिए मैंने उनसे सहयोग मांगा। राष्ट्रपति शी ने मुझे आश्वस्त किया कि इस बारे में हमारी चिंताओं पर वे ठोस कदम उठाएंगे। भारत में चीन द्वारा औद्योगिक पार्क स्थापित करने और अगले पांच साल में 20 अरब डालर निवेश करने संबंधी चीन के साथ हुए समझौतों के संदर्भ में मोदी ने कहा कि इससे हमारे आर्थिक संबंधों का एक नया अध्याय खुलेगा।

चीन ने जो वित्तीय वादे किए हैं वे हाल में जापान की ओर से की गई घोषणाओं से कम हैं। मोदी की जापान यात्रा के दौरान उस देश ने अगले पांच साल में भारत में 35 अरब डालर निवेश का भरोसा दिलाया है जबकि चीन ने इतने ही वर्षों में 20 अरब डालर का। बहरहाल, मोदी ने शी की यात्रा को भारत और चीन के बीच के संबंधों के लिए ऐसा ऐतिहासिक अवसर बताया जो अपार संभावनाओं से भरा है।

उन्होंने कहा कि हम हमारे संबंधों का एक नया युग शुरू कर सकते हैं। अगर हम अपने अवसरों और चुनौतियों के प्रति संवेदनशील हैं तो मुझे विश्वास है कि हम उन्हें बड़ी सफलता में बदलने में अपनी जिम्मेदारी पूरी करेंगे। मोदी के साथ वार्ता को लाभप्रद बताते हुए शी ने कहा कि उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री को अगले साल चीन यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भारत नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.
सबरंग