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महिलाएं प्रादेशिक सेना में शामिल हो सकती हैं, केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा

केंद्र ने कहा कि प्रादेशिक सेना में महिला उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया, अर्हता मापदंड और सेवा शर्तों में कोई भेदभाव नहीं है।
Author नई दिल्ली | July 25, 2016 20:49 pm
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि महिलाएं प्रादेशिक सेना में उसके रेलवे इंजीनियर रेजीमेंटों में शामिल हो सकती हैं एवं अपनी सेवाएं दे सकती हैं तथा उन पर मानद कमीशन के लिए भी विचार किया जाएगा। सरकार ने मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता धींगरा की पीठ के सामने हलफनामा दायर कर यह बात कही। पीठ प्रादेशिक सेना में महिलाओं की भर्ती की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। प्रादेशिक सेना नियमित सेना के बाद दूसरी रक्षा पंक्ति है। पीठ इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को करेगी। प्रादेशिक सेना उन स्वयंसेवकों का एक संगठन है जो सैन्य प्रशिक्षण हासिल करतें है। ताकि उन्हें आपातस्थिति में देश की रक्षा के वास्ते जुटाया जा सके।

केंद्र ने कहा कि प्रादेशिक सेना में महिला उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया, अर्हता मापदंड और सेवा शर्तों में कोई भेदभाव नहीं है। हलफनामे में कहा गया है, ‘प्रादेशिक सेना में महिला अधिकारियों का ब्रिगेडियर के रैंक तक प्रोन्नत किया जाता है जो प्रादेशिक सेना के अधिकारियों के लिए सर्वोच्च रैंक है।’ प्रादेशिक सेना के 2015 के विज्ञापन, जिसमें केवल कमा रहे रोजगारप्राप्त पुरुषों न कि महिलाओं का जिक्र था, को लेकर हलफनामें में कहा गया है कि विज्ञापन प्रादेशिक सेना की इंफैंट्री यूनिट में कमीशन के लिए था। इंफैंट्री यूनिट में पुरुषों की भर्ती प्रादेशिक सेना अधिनियम के तहत एक नीतिगत फैसला है । इस नीति को इस कानून में संशोधन के बाद ही बदला जा सकता है।

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