ताज़ा खबर
 

शीतकालीन सत्र का पहला दिन Secularism पर गरम

संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन गुरुवार को धर्मनिरपेक्षता और असहिष्णुता के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों के तीर खूब चले।
Author नई दिल्ली | November 27, 2015 00:04 am

संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन गुरुवार को धर्मनिरपेक्षता और असहिष्णुता के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों के तीर खूब चले। विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि संविधान के जिन आदर्शों ने हमें दशकों से प्रेरित किया, उस पर खतरा मंडरा रहा है। उस पर हमले हो रहे हैं। वहीं सरकार ने पलटवार में कहा कि संविधान की प्रस्तावना में बाद में शामिल किए गए ‘सेकुलर’ शब्द का सर्वाधिक राजनीतिक दुरुपयोग किया जा रहा है और यह राजनीतिक हित साधने का औजार बन गया है।

बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर भारत के संविधान के प्रति प्रतिबद्धता विषय पर संसद में दो दिवसीय विशेष चर्चा का आयोजन किया गया है। राज्यसभा में भी यही चर्चा होनी थी लेकिन उसके सदस्य खेखिहो झिमोमी का गुरुवार सुबह निधन हो जाने के कारण उनके सम्मान में उच्च सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने असहिष्णुता के मुद्दे पर राजग सरकार का नाम लिए बिना उन्हें निशाने पर लेते हुए कहा- हमें पिछले कुछ महीनों में जो कुछ देखने को मिला है, वह पूरी तरह से उन भावनाओं के खिलाफ है जिन्हें संविधान में सुनिश्चित किया गया है।

चर्चा की शुरुआत करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि 42वें संशोधन के तहत संविधान की प्रस्तावना में शामिल किए गए सेकुलर शब्द का आज की राजनीति में सर्वाधिक दुरुपयोग हो रहा है, जो बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे देश में सद्भाव का माहौल बनाने में कठिनाई आ रही है। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में 42वें संशोधन के जरिए जोड़े गए सेकुलर शब्द का औपचारिक अनुवाद पंथ निरपेक्ष है, धर्मनिरपेक्ष नहीं। लिहाजा धर्मनिरपेक्ष शब्द का प्रयोग बंद होना चाहिए। इसकी जगह पंथनिरपेक्षता का इस्तेमाल होना चाहिए। चर्चा के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में मौजूद थे।

फिल्म अभिनेता आमिर खान का नाम लिए बिना गृह मंत्री ने देश में कथित असहिष्णुता के नाम पर देश छोड़ने की बात करने वालों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव आंबेडकर को समाज के निचले तबके से ताल्लुक रखने के कारण कई बार अपमान, प्रताड़ना और तिरस्कार का शिकार होना पड़ा। लेकिन उन्होंने कभी देश छोड़ने की बात नहीं कही। उनकी यह टिप्पणी फिल्म अभिनेता आमिर खान की उन टिप्पणियों को लेकर पैदा हुए विवाद की पृष्ठभूमि में आई हैं जिनमें बालीवुड अभिनेता ने देश में हालिया कुछ घटनाओं पर चिंता जाहिर करते हुए अपनी पत्नी किरण राव के हवाले से कहा था कि उन्हें हिंदुस्तान छोड़कर चले जाना चाहिए।

उधर, सोनिया गांधी ने सत्ता पक्ष पर प्रहार करते हुए कहा कि जिन लोगों को संविधान में कोई आस्था नहीं रही, न ही इसके निर्माण में जिनकी कोई भूमिका रही है, वो इसका नाम जप रहे है, अगुआ बन रहे हैं। संविधान के प्रति वचनबद्ध होने पर बहस कर रहे हैं। इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है। हमले को धारदार बनाने के लिए आंबेडकर को उद्धृत करते हुए सोनिया ने कहा कि अंबेडकर ने चेताया था कि कोई भी संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो लेकिन अगर उसे लागू करने वाले बुरे हों, तो वह निश्चित रूप से बुरा ही साबित होगा और कितना भी बुरा संविधान क्यों न हो लेकिन उसे लागू करने वाले अच्छे हों, तो वह अच्छा साबित हो सकता है।

संविधान के निर्माण और डॉ. अंबेडकर पर कांग्रेस पार्टी की दावेदारी पेश करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि यह कांग्रेस का ही कमाल था कि संविधान निर्माण से जुड़ी हर घटना निश्चित आकार में प्रस्तुत की जा सकी। इस लिहाज से इस पर कांग्रेस पार्टी का हक बनता है। उन्होंने कहा कि यह बात आमतौर पर भुला दी जाती है कि डॉ. बीआर आंबेडकर की अनोखी प्रतिभा को पहचान कर ही कांग्रेस पार्टी ही उन्हें संविधान सभा में लाई। यह इतिहास है।

चर्चा शुरू होने से पहले लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने अपनी प्रारंभिक टिप्पणी में कहा कि भारत ने अपनी अनेकता और विविधता को अपने संस्थागत लोकतंत्र के साथ बहुत सफलतापूर्वक समायोजित कर लिया है और हमारा संसदीय लोकतंत्र जाति, पंथ, धर्म और भाषा का विचार किए बिना सभी समुदायों का शांतिपूर्ण, सहअस्तित्व सुनिश्चित करता है। अध्यक्ष ने कहा कि कोई निरंकुश न होने पाए इसके लिए भी हमारे संविधान में उपयुक्त प्रावधान है। इतिहास बताता है कि ऐसे प्रयासों को जनता ने सदैव अस्वीकार कर दिया है।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए अन्नाद्रमुक के पी वेणुगोपाल ने कहा कि जब देश के सभी नागरिक संविधान का पूरी तरह अनुसरण करेंगे, तभी यह एक पवित्र दस्तावेज बना रह सकेगा। उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने शिक्षा को विशेष तवज्जो दी क्योंकि उनका मानना था कि यह सामाजिक व आर्थिक उन्नति के लिए जरूरी है। लेकिन आज शिक्षा में हमारा निवेश और बजट कम है। इसे बढ़ाया जाना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने धर्मनिरपेक्षता शब्द को लेकर छिड़ी बहस पर सवाल उठाया कि सरकार इस शब्द विशेष से परेशान क्यों हो जाती है। आज जिस प्रकार से सार्वजनिक रूप से गृह मंत्री ने धर्मनिरपेक्षता का विरोध किया है, वह संविधान का विरोध करना है। उन्होंने कहा कि आज कुछ घटनाएं हो रही हैं जो गलत संदेश दे रही हैं। एआर रहमान, शाहरुख खान व आमिर खान जैसे कलाकार अगर बेचैनी महसूस कर रहे हैं तो इस मामले को देखा जाना चाहिए और यह भी देखा जाना चाहिए कि ये अभिनेता, कलाकार यदि ऐसा कह रहे हैं तो क्यों कह रहे हैं। असहिष्णुता आतंकवाद को जन्म देती है।

बीजू जनता दल के तथागत सतपथी ने सेकुलर शब्द को पंथ निरपेक्षता बताए जाने पर हैरानी जताते हुए कहा कि जो हिंदी नहीं जानते हैं, उनका क्या होगा? उन्होंने कहा कि बहुलवाद की आवाज का यह अर्थ नहीं है कि कौव्वों की संख्या ज्यादा है तो कौव्वों के कहने पर कौव्वे को राष्ट्रीय पक्षी घोषित कर दिया जाए। अब समय आ गया है कि हम अपने अहम को छोड़कर राष्ट्र निर्माण पर ध्यान दें। उन्होंने गुजरात में पटेल कोटा आंदोलन के दौरान इंटरनेट सेवाओं को प्रतिबंधित किए जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हमें अपने लोगों पर भरोसा करना होगा, वे हमसे कहीं बेहतर हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि हफ्ते में एक दिन सदन में कामकाज की कमान विपक्ष के हाथों में सौंपी जाए और विपक्ष एजंडा तय करे व सरकार केवल उसका पक्ष सुने।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.