December 02, 2016

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जब एक सरकारी कर्मचारी ने नोटबंदी के बाद जमा कराए थे छह लाख रुपये, कहा था- कारण गोपनीय

ब्रिटिश सरकार ने 1946 में 500, 1000 और 10000 के नोट बंद कर दिए थे।

18 जनवरी 1946 को इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर।

आठ नवंबर को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की। भारतीय इतिहास में ऐसा तीसरी बार हुआ है कि सरकार ने बड़े नोटों को पूरी तरह बंद कर दिया हो। भारत में पहली बार बड़े नोट जनवरी 1946 में बंद किए गए थे। उस समय विस्काउंट वैवेल भारत के गवर्नर जनरल थे। अंग्रेजी हुकूमत ने कालेधन को बाहर निकलवाने के लिए 500, 1000 और 10,000 के नोट बंद कर दिए थे। उसके बाद 1978 में मोरारजी देसाई सरकार ने 1000, 5000 और 10,000 के नोट बंद कर दिए थे। 1946 के अखबारों से पता चलता है कि उस समय भी नोटबंदी के बाद वैसे ही हालत हो गए थे जैसे आज नजर आ रहे हैं।

ब्रितानी सरकार ने 11 जनवरी 1946 को नोटबंदी की घोषणा की। तब इंडियन एक्सप्रेस में खबर छपी की एक ब्रितानी अफसर ने भारतीय रिजर्व बैंक में 18 जनवरी 1946 को 6,03,000 रुपये मूल्य के पुराने नोट जमा किए। नोट जमा करने वाले ने इतनी बड़ी मात्रा में नोट रखने के बारे में सफाई देते हुए कहा था, “इसे गोपनीय सरकारी कारणों से जमा रखा गया था जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।” 1946 से 2016 तक मुद्रास्फिति को ध्यान में रखा जाए ये तो राशि आज के हिसाब से कम से कम साढ़े चार करोड़ रुपये होगी। जब से पीएम मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की है तब से ही अनुमान लगाया जा रहा है कि कालाधन रखने वाले नेताओं, व्यापारियों और सरकारी अफसरों को सबसे ज्यादा मुश्किल पेश आने वाली है। लेकन इस बार अभी तक किसी बड़े नेता, व्यापारी या अफसर द्वारा बड़ी धनराशि जमा किए जाने या बदलने की खबर नहीं आई है।

पीएम मोदी की घोषणा के अनुसार बैंकों और डाकघरों में 30 दिसंबर तक 500 और 1000 के पुराने नोट जमा करने किए जा सकेंगे। सरकार ने कहा है कि ढाई लाख रुपये से अधिक राशि जमा करने वालों पर सरकार नजर रखेगी और जिन लोगों द्वारा जमा की गई राशि उनकी आय से अधिक पाई जाएगी उन पर टैक्स के अलावा 200 प्रतिशत जुर्माना वसूला जाएगा। सरकार का दावा है कि बड़े नोटों को बंद करने से न केवल कालेधन बाहर आएगा बल्कि 500 और 1000 के बाजार में चल रहे नकली नोट भी बेकार हो जाएंगे। सरकार के दावे के अनुसार उसके इस फैसले से आतंकवादियों को मिलने वाले धन पर भी रोक लग जाएगी।

एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मंगलवार (15 नवंबर) को एक पीआईएल की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 10 नवंबर के बाद से विभिन्न बैंकों में 500 और 1000 के नोटों के तौर पर 3.25 लाख करोड़ रुपये जमा किए जा चुके हैं। रोहतगी ने कहा कि अगले कुछ दिनों में बैंकों में 11 लाख करोड़ रुपये राशि और जमा हो सकती है। लेकिन अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है जिसमें किसी एक व्यक्ति ने कोई बड़ी धनराशि बैंक में जमा की हो।

वीडियो: पीएम नरेंद्र मोदी की माँ ने बैंक में जाकर बदलवाए नोट-

वीडियोः बार-बार नोट बदलवाने पर रोक के लिए सरकार ने उठाया कदम-

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First Published on November 15, 2016 4:26 pm

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