December 07, 2016

ताज़ा खबर

 

अटल बिहारी वाजपेयी और राजीव गांधी की सरकारों ने भी चलाए थे बड़े नोट, क्या दिए थे तर्क, जानिए

राजीव गांधी सरकार ने 1987 में 500 के नोटों को दोबारा जारी किया था।

Author November 16, 2016 11:50 am
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी। (फाइल फोटो)

मई  1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के केंद्र में सत्ता संभालते ही वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा को नए करेंसी नोटों की बढ़ती मांग का सामना करना पड़ा। 1000, 5000 और 10,000 के नोटों को करीब दो दशक पहले सही मायनों में बंद कर दिया गया था। उसके बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में हुए विकास को देखते हुए सरकार बड़े नोट लाना चाहती थी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से इस पर राय मांगी गई। आरबीआई के बोर्ड में शामिल कुछ शीर्ष उद्योगपतियों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उसके बाद सरकार ने मोरारजी देसाई सरकार के 1978 के फैसले को पलटते हुए 1000 के बैंक नोट जारी किए। सिन्हा ने नौ दिसंबर 1998 को लोक सभा में कहा कि वो मानते हैं कि ज्यादातर सांसद इस बात पर उनसे सहमत होंगे कि अवैध लेनदेन की जड़ बड़े नोट नहीं हैं बल्कि कहीं और हैं। हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि वो जड़ कहां है।

ये भी ध्यान लेने लायक बात है कि तत्कालीन वित्त मंत्री ने अपने फैसले के बचाव में तर्क दिया था कि 1978 में बड़े नोटों को बंद करने के बाद रुपये की क्रय शक्ति काफी गिर गई है। 1982 को आधार वर्ष मानकर तुलनात्मक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार 1998 में 1000 का मूल्य 160 रुपये रह गया था। इसका मतलब ये था कि सामान्य उपभोक्ता को साधारण लेन-देन के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे थे। इसी वजह से एनडीए सरकार ने 1000 के नोट दोबारा जारी करने का फैसला किया। (ये भी ध्यान रखें कि तब भुगतान के दूसरे आधुनिक तरीके प्रचलन में नहीं आए थे)

जब विपक्षी दलों ने सरकार के फैसले का विरोध किया तो सिन्हा ने जवाब में कई रुचिकर आंकड़े पेश किए। सिन्हा के अनुसार 1998 में नए नोटों की मांग सालाना 15-20 प्रतिशत की दर से बढ़ रही थी। इस वजह से सरकार को नोटों की संख्या बढ़ानी पड़ रही थी। सरकार ने नासिक और देवास स्थित अपने छापेखाने को आधुनिक बनाया। आरबीआई को भी मैसूर और शालबनी स्थित अपने छापेखानों में नए मशीनें लगानी पड़ीं। 100 के नोटों पर दबाव घटान के लिए 500 के नोटों का मुद्रण पहले से बढ़ा दिया गया। सरकार ने कुल एक लाख करोड़ रुपये मूल्य के 360 करोड़ नोट (100 रुपये के 200 करोड़ नोट, 500 के 160 करोड़ नोट) आयात किए। इसके बावजूद सिन्हा ने बताया कि नए नोट की मांग 2004-05 तक 1268 करोड़ नोटों तक पहुंच जाएगी। इसलिए सरकार को 1000 के नोट मुद्रित करने पर बाध्य होना पड़ा।

ऐसा नहीं है कि इस मुद्दे पर पहले विचार नहीं किया गया था। 1987 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पास वित्त मंत्रालय का भी प्रभार था। राजीव सरकार ने 1978 में बंद किए गए 500 नोटों को दोबारा जारी किया। हालांकि जब पीवी नरसिम्हाराव प्रधानमंत्री थे तो वित्त मंत्रालय के मुद्रा विभाग के संयुक्त सचिव ने बड़े नोट जारी करने की सलाह दी थी जिसे ठुकरा दिया गया था।

वीडियोः जानिए भारत में कब कब हुआ है विमुद्रीकरण-

वीडियोः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां ने बैंक में जाकर बदलवाए नोट-

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on November 16, 2016 11:33 am

सबरंग