April 23, 2017

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कैराना: एनएचआरसी ने मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू लड़कियों को छेड़े जाने की रिपोर्ट तो दी, पर नहीं देख पाई यह कड़वा सच

कांधला की एक मस्जिद के मौलाना मोहम्‍मद मुस्‍तकीम कहते हैं कि हर हफ्ते यहां चोरी-डकैती होती हैं।

Author October 24, 2016 08:47 am
हिंदुओं ने दी गांव छोड़ने की धमकी। (Source: EXPRESS PHOTO)/FILE Photo

उत्‍तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना में हिंदुओं के पलायन के आरोप पर राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। मगर यहां के निवासियों से बात करने पर कुछ अलग तस्‍वीर सामने आती है। जुलाई-अगस्‍त में ‘हिंदुओं के पलायन’ के दावों की जांच करने के लिए मानवाधिकार आयोग की टीम कैराना आई थी। उसकी रिपोर्ट के अनुसार, कैराना और मुजफ्फरनगर का दौरा करने वाली सदस्यों ने कहा कि कैराना का पलायन सांप्रदायिक प्रकृति का नहीं है।उन्होंने कहा कि हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने अन्य स्थानों में बेहतर कारोबारी मौके पाने के लिए कैराना छोड़ा। लोगों ने किसी खास समुदाय के डर से यह पलायन नहीं किया। मानवाधिकार आयोग की जांच टीम का कहना था कि ‘‘बढ़ते अपराध’’ और ‘बिगड़ती’ कानून एवं व्यवस्था के चलते कैराना से कई परिवारों ने पलायन किया। आयोग ने दावा किया है मुस्लिम युवकों ने कैराना में हिंदू लड़कियों को छेड़ा, जिससे वे घर के बाहर निकलने में भी डरने लगे। दंगों से प्रभावित करीब 29,300 लोग मुजफ्फरनगर और शामली में फैली 65 ‘काला‍ेनियों’ में रह रहे हैं। इनमें से 90 फीसदी नजदीकी कस्‍बे से 15-20 किलोमीटर दूर बसे हैं, जहां एनएचआरसी रिपोर्ट कहती है कि हिंदू लड़कियों को छेड़ा गया था। द इंडियन एक्‍सप्रेस ने कैराना के ऐसे करीब 20 कैंपों का दौरा किया। ज्‍यादातर मुस्लिम बेहद गरीब हैं, वे घर-बार छोड़कर यहां किसी तरह बसर कर रहे हैं। मूल रूप से मुजफ्फरनगर के फुगना गांव के निवासी, हसनपुर कॉलोनी के राहत कैंप में रह रहे 60 साल के सुलेमान आयोग की रिपोर्ट पर हैरानी जताते हैं, वह कहत हैं कि वे बहुत कम ही कैराना कस्‍बे में जाते हैं। उन्‍होंने कहा, ”मेरे तीन बच्‍चे दिनभर पत्‍थर तोड़ते हैं, तब कहीं जाकर हमें एक वक्‍त की रोटी नसीब होती है। कैंप में कोई परिवार इस ईद पर कुर्बानी नहीं दे सका, न ही हमारे पास सेवइयों के लिए पैसा है। हम अपनी समस्‍या में इतने परेशान हैं, लड़कियां क्‍या छेडेंगे, वो भी 20 किलोमीटर जाकर कैराना में? जितना पैसा वहां जाने में खर्च होगा, उतने में हम 10 रोटी बना सकते हैं।”

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कांधला की एक मस्जिद के मौलाना मोहम्‍मद मुस्‍तकीम कहते हैं कि हर हफ्ते यहां चोरी-डकैती होती हैं। उन्‍होंने कहा कि ”कैंपों में बिजली नहीं है, इसलिए वह अासान निशाना बनते हैं।” 2013 के बाद मुजफ्फरनगर से मुस्लिम समुदाय के लगभग 25,000-30,000 सदस्यों को कैराना शहर में बसाने की वजह से कैराना का जनसांख्यिकी बदलकर मुस्लिम समुदाय के पक्ष में चला गया। 17 अक्‍टूबर को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट की आलोचना करते हुए कहा कि लोगों ने अपने कारोबार की वजह से शहर छोड़ा है। संस्‍था ने बताया कि 2011 जनसंख्‍या के अनुसार, कैराना की जनसंख्‍या 89,000 से ज्यादा थी, जिनमें 80 फीसदी से ज्‍यादा मुस्लिम थे। कांधला में करीब 70 फीसदी मुस्लिम थे।

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कैराना में पहले से मुस्लिमों की बहुलता होने पर जोर देते हुए कांधला नगर पालिका चेयरमैन और सपा नेता वाजिद हुसैन कहते हैं, ”2,000 दंगा पीड़‍ितों के आ जाने से वे (मुस्लिम) और हावी नहीं हो जाते।” उन्‍होंने कहा, ”गिरती कानून-व्‍यवस्‍था की वजह से लोग गए होंगे, अगर ऐसा है तो राज्‍य सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। एनएचआरसी प्रवक्‍ता जैमिनी श्रीवास्‍तव ने कहा कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप दी है और फिलहाल कुछ कहने को नहीं है।

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First Published on October 24, 2016 8:47 am

  1. N
    Nirvikar Goel
    Oct 24, 2016 at 3:37 am
    सत्य यह है की कैराना में हिंदुओं को प्रताड़ित किया जाता है, कोई भी पूरा सच नहीं बता रहा. शाशन से तो कोई भी सच की आशा नहीं है मानव आयोग ने भी अधूरी रिपोर्ट दी है.
    Reply

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