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कैसे दिया जाता है चक्रवात का सिग्नल, जानिए चक्रवात के 1 से 11 तक के संकेतों का मतलब

सोमवार को चक्रवात ‘वरदा’ तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के समुद्र तट पहुंचेगा। चक्रवात की आशंका के चलते नौसेना अलर्ट पर रखा गया है।
फाइल फोटो। (Photo: PTI)

बंदरगाहों पर तूफान की चेतावनी का सिग्नल हमेशा मौजूद रहता है। इससे जहाजों को पता चलता है कि तूफान आने की कितनी संभावना है। कुछ देशों में तट पर अलग-अलग झंडों के माध्यम से ये संकेत दिया जाता है तो भारत में दिन और रात के लिए अलग तरह के संकेतों का प्रयोग किया जाता है। भारत में दिन में सिलिंडर और कोन का प्रयोग किया जाता है। वहीं रात में लाल और सफेद लैंप का प्रयोग किया जाता है। सोमवार (12 दिसंबर) को चक्रवात ‘वरदा’ तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के समुद्र तट पहुंचेगा। चक्रवात की आशंका के चलते नौसेना अलर्ट पर रखा गया है। तमिलनाडु के तटीय इलाकों में स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है।

कोलकाता और मछलीपट्टनम में 1864 में आए तूफानों के बाद भारत में चक्रवात का संकेत देने के लिए एक चेतावनी व्यवस्था बनाई गई। अगले ही साल कोलकाता तट पर पहला सिग्नल सिस्टम लगाया गया। भारत के सिग्नल सिस्टम में 1 से 11 अंकों का प्रयोग किया जाता है। इन अंकों को जलपोतों को चेतावनी देने के लिए प्रयोग किया जाता है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) तटो को आम तौर पर दिन भर में चार बार मौसम की जानकारी भेजी जाती है। चक्रवात आने की स्थिति में हर तीन घंटे में तटों में ये सूचना भेजी जाती है।

सिग्नल 1- इसका अर्थ हुआ कि समुद्र में दूर कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है। सतह पवन की रफ्तार 33 नॉट (करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटा) तक हो सकती है। इस सिग्नल का अर्थ हुआ कि तट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा हालांकि तेज हवा से सावधान रहना होगा।

सिग्नल 2- समुद्र में सुदूर दबाव बनने की आशंका है। सतह पवन की रफ्तार 34-47 नॉट (करीब 60-90 किमी प्रति घंटा) हो सकती है। ये संकेत तट से छूटने वाले जहाजों के लिए है।

सिग्नल 3- समुद्री दबाव बन चुका है और तट प्रभावित होने की आशंका। सतह पवन की रफ्तार 22-27 नॉट (40-50 किमी प्रति घंटा) तक हो सकती है। तट पर हवा के तेज बहाव से प्रभावित हो सकता है।

सिग्नल 4-  समुद्र के अंदर गहरा दबाव वाला क्षेत्र बन चुका है और वो बाद में तट को प्रभावित कर सकता है। सतह पवन की रफ्तार 28-33 नॉट (करीब 50-6- किमी प्रति घंटा) हो सकती है। इस सिग्नल का अर्थ है कि बंदरगाह पर खड़े जहाजों को नुकसान पहुंच सकता है। सिग्नल 3 और 4 का सरल अर्थ है कि तट पर मौसम सही नहीं है।

सिग्नल 5- इसका अर्थ हुआ कि समुद्री के अंदर बना हुआ दबाव चक्रवातीय तूफान का रूप अख्तियार कर रहा है और ये समुद्र तट से बंदरगाह को बाएं रखते हुए गुजर सकता है। सतह पवन की रफ्तार 34-47 (करीब 60-80 किमी प्रति घंटा) हो सकती है।

सिग्नल 6- सिग्नल 5 के समान ही बस इसमें चक्रवातीय तूफान तट बंदरगाह को दाएं तरफ रखते हुए गुजर सकता है।

सिग्नल 7- इसका अर्थ हुआ कि चक्रवात तट के निकट बंदरगाह तक पहुंच सकता है। सिग्नल 5, 6 और 7 का अर्थ हुआ कि बंदरगाह पर खतरा है।

सिग्नल 8- “अत्यधिक खतरे” की चेतावनी। इसका मतलब चक्रवात बहुत तेज है या बहुत तेज रफ्तार चक्रवात आने की आशंका है और ये ये चक्रवात बंदरगाह को बाएं रखते हुए गुजरेगा। सतह पवन की रफ्तार 48-63 नॉट (करीब 90-120 किमी प्रति घंटा) हो सकती है।

सिग्नल 9- “अत्यधिक खतरे” की चेतावनी। इसका मतलब चक्रवात बहुत तेज है या बहुत तेज रफ्तार चक्रवात आने की आशंका है और ये ये चक्रवात बंदरगाह को दाएं रखते हुए गुजरेगा। सतह पवन की रफ्तार 48-63 नॉट (करीब 90-120 किमी प्रति घंटा) हो सकती है।

सिग्नल 10-  “अत्यधिक खतरे” की चेतावनी। इसका मतलब चक्रवात बहुत तेज है और बंदरगाह तक पहुंच सकता है। सतह पवन की रफ्तार 64-119 नॉट (करीब 120-220 किमी प्रति घंटा) हो सकती है। 120 नॉट (करीब 220 किमी प्रति घंटा) से अधिक रफ्तार की सतह पवन को सुपर चक्रवात कहते हैं।

सिग्नल 11- इसका मतलब हुआ कि चक्रवात चेतावनी दफ्तर से संपर्क की सभी कोशिशें विफल हो चुकी हैं।

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